Saturday, February 23, 2019
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Guest Writer

राहुल की लड़ाई भ्रष्टाचार से है या मोदी से ?

देश की नब्ज नहीं पकड़ सके अण्णा

2019 में सभावित लोकसभा चुनाव में भारी पड़ेंगे महंगाई, बेरोजगारी, बेतहाशा बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम, आदिवासी-दलित समाज की समस्याएं

सफलता का मंत्र है कल नहीं, आज

महागठबंधन.राजनैतिक दलों का देश हित चुनाव जीत कर सत्ता हासिल करने तक ही सीमित है?

कठिन है राजनीतिक उजालों की तलाश

आर्थिक मोर्चे पर भारत की सुदृढ़ता

सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम

भाजपा को नये रास्ते बनाने होंगे

किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह जी की जयंती (23 दिसंबर) पर विशेष

क़र्ज़ माफ़ी सत्ता की चाबी

अशोक गहलोत की ताजपोशी का अर्थ

चंद्रबाबू नायडू के समक्ष विपक्षी एकता की चुनौती

नक्सलवाद को हराती सरकारी नीतियाँ ,29 मार्च 2018 को सुकमा में 16 महिला नक्सली समेत 59 नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष आत्मसमर्पण किया

आखिर कहाँ सुरक्षित है बेटिया ? बलात्कार की घटनाओ से शर्मशार होता भारत

क्या भ्रष्टाचार एक चुनावी जुमला है..............

एक्ट में एक ही दिन में ही जांच करके पता लगाया जाए कि आरोप फर्जी है या सही अगर फर्जी पाया जाए तो बेल वरना जेल

2 अप्रैल,2018 का वंचित तबकों द्वारा किया गया व्यापक आंदोलन,जिसे हिंसात्मक तौर पर चर्चित किया गया,इससे भी ज्यादा व्यापक आंदोलन

उपचुनावों के आधार पर लोकसभा चुनाव आंकना भूल होगी

बैंकों की घुमावदार सीढ़ियां ... !!

न्यूज वल्र्ड के सोमालिया! - यूथोपिया ... !

नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है

भारत में अभी भी पकौड़े और चाय में बहुत स्कोप है साहब

डूबते सूरज की बिदाई नववर्ष का स्वागत कैसे पेड़ अपनी जड़ों को खुद नहीं काटता,

इंसानियत का रुदन हम कब सुने पायेंगे साहब

राहुल के सामने बड़ी चुनौती।

क्या कभी नारी को गुस्सा आया है

हदिया जैसी लडकियां लव नहीं जिहाद का शिकार होती हैं

विपक्ष में होने का मतलब केवल विरोध के लिए विरोध करना नहीं होता

क्या हार्दिक मान सम्मान की परिभाषा भी जानते हैं?

दिल बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है

सरकार की प्रथम जबाबदेही जनता के प्रति है लोकसेवकों के प्रति नहीं

साहब भारत इसी तरह तो चलता है

शेखस्पीयर ने बरसों पहले कहा था कि  "नाम में क्या रखा है" लेकिन सच्चाई यह है कि नाम अगर भारत देश में गाँधी हो, मध्यप्रदेश या राजिस्थान में सिंधिया हो, पंजाब में बादल हो,यूपी और बिहार में यादव हो,महाराष्ट्र में ठाकरे हो,कश्मीर में अब्दुल्ला या मुफ्ती मुहम्मद हो,हरियाणा में चौटाला हो ( लिस्ट बहुत लम्बी है) तो इंसान के नसीब ही बदल जाते हैं।

जनता तो भगवान बनाती है साहब लेकिन शैतान आप

खुशियों का फैसला जो भावना मानवता के प्रति अपना फर्ज निभाने से रोकती हो क्या वो धार्मिक भावना हो सकती है?

वीआईपी वाली फिलिंग है कि जाती ही नहीं..... वीआईपी कल्चर बोले तो.....नेताजी छोड़ने ही नहीं वाले

चन्द कागज के टुकड़ों के आगे हार गई 30 मासूमों की जिंदगी.....

.......क्यों हम बेटियों को बचाएँ........

...जनता के नौकर की जगह तानाशाह बन बैठे हैं सरकारी बाबू....

भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

आधुनिक व्यवस्था प्रोफेशनल बनाती है इंसान नहीं "

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