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तो ऐसे लोगों के लिए पत्रकार भ्रष्टाचारी क्या, कुछ भी हो सकता है ?

Raj Aggarwal | April 30, 2018 04:56 PM
Raj Aggarwal

तो ऐसे लोगों के लिए पत्रकार भ्रष्टाचारी क्या, कुछ भी हो सकता है ?

कहा जाता है कि पत्रकार या मीडियाकर्मी समाज का आईना होता है वह तो कबीर की की तर्ज पर कि ‘‘न काहूॅ से दोस्ती न काहॅू से बैर’’ के आधार पर समाज के शोषित, पीड़ित, असहाय लोगों की आवाज उठाता है। यह वह पक्ष होता है जो किसी सामन्ती विचारधारा के पोषक लोगों द्वारा सताये गये होते है। तो जाहिर सी बात होती है कि आवाज उठाने वाले पत्रकारों/मीडियाकर्मी सामन्ती विचारकों के लिए ऑख की किरकिरी बन जाते हैं। इसलिए कि अमुक पत्रकार ने क्यों आवाज उठा दी। यों कहिए कि उसकी असामाजिक नीति पर पड़े पर्दे को उठाकर असली तस्वीर जनमानस के सामने रख देता है। बस एक पत्रकार का यही दोष हो सकता है। जबकि यह पत्रकारिता की धर्म श्रेणी में आता है। ऐसे में उस पत्रकार को दबाने या अन्य षड्यन्त्र रचते है और इससे पहले अपने षड्यन्त्र को छिपाने हेतु सक्षम अधिकारियों के समक्ष पत्रकार को दोषी और स्वयं को दूध का धुला साबित करते है। जिसमें षड्यन्त्र एक पर्दा का जा सकता है। जो पत्रकार के प्रति रच सकते है। और सारांश रूप में यह कहा जाये कि ऑनस्पाट अधिकारी उसकी जॉच करा डाले और पत्रकार की भी तो शायद जो शोषण, मारपीट आदि का खेल चलता रहता है उस पर अंकुश लग जाये। यही नहीं दूध का धुला दशरथ देवी महाविद्यालय के बृजेश तिवारी का समाज के प्रति शिक्षण की ऑड़ में शोषण, अन्याय, असामाजिका का कृत्य होता है। खुलासा हो सकता है। जरूरत है कि ऐसे लोगों पर जॉच शीघ्र सुनिश्चित करानी की।

इसी क्रम में आपकों बता दें कि सुरजीत यादव पर दशरथ देवी महाविद्यालय ने जो आरोप लगायें है उस पत्र का कुछ सारांश पहले आप पढ़ लीजिए   

1. दशरथ देवी महाविद्यालय प्राचार्य द्वारा कहा गया कि फर्जी पत्रकार बनकर संस्थानो से शोषण करना व अवैध वसूली करना ।
उत्तर - सुरजीत यादव ने अपने पत्रकारिता के कार्यकाल में अब तक कितने लोगों से धन वसूली की और इन पर मुकदमा क्यों पंजीकृत नहीं हुआ।


2. आये दिन कथित पत्रकार बनकर महाविद्यालय व अन्य विद्यालयों से धन उगाही का प्रयास कर रहे है और न मिलने पर सोशल मीडिया पर विद्यालयों के विरुद्ध भ्रामक आरोप लगाकर संस्थान की छवि ख़राब कर रहे है।
उत्तर - सुरजीत यादव किन-किन महाविद्यालयों से धन उगाही का प्रयास किया उनके प्रबंधकों ने कार्यवाही क्यों नहीं सुनिश्चित करवायी।

3. थाना बाजार शुक्ल में कई आपराधिक मामले ( भ्रामक प्रचार प्रसार, मारपीट , दलित उत्पीडन , धोखाधड़ी, सरकारी कार्य में बाधा, ) आदि से सम्बंधित अभियोग पंजीकृत है ।
उत्तर- सुरजीत यादव पर इतने अभियोग पंजीकृत होने के बावजूद जेल के बजाय क्यों अपने स्पष्ट लेखने पर डटे हैं। और दशरथ देवी महाविद्यालय प्रबन्धन के पास बृजेश तिवारी द्वारा बताये गये पंजीकृत अभियोग के क्या सबूत है यदि कोई सबूत हो तो उसे उजागर करें ।

4. बृजेश तिवारी का आरोप है कि सुरजीत यादव स्थानीय स्तर पर (ग्राम पंचायत , ब्लाक , थाना, स्वास्थ्य , शिक्षा ) आदि विभागों के कर्मचारियो अधिकारियो से कथित पत्रकारिता के नाम पर आये दिन धन उगाही व उनके खिलाफ भ्रामक प्रचार प्रसार करने के कारण कहासुनी व वाद-विवाद होते रहते है ।
उत्तर- बृजेश तिवारी द्वारा जिन विभागों से धन उगाही का आरोप लगाया गया, उन विभागों के अधिकारियों ने अभी तक सुरजीत यादव के खिलाफ एक भी शिकायत नहीं की। तो ऐसे में उन विभागों की वकालत करना अपने द्वारा किए गये भ्रष्टाचार, शोषण पर पर्दा डालना नहीं तो क्या है।

6. बृजेश ने अपने शिकायती पत्र में कहा है कि सुरजीत यादव के कृत्यों से क्षेत्र की स्थानीय जनता भी आक्रोशित है जो कभी भी अवांछित घटना का कारण बन सकती है ।
उत्तर- सुरजीत यादव से जो लोग आक्रोशित हैं उन लोगों ने सुरजीत के खिलाफ क्या कार्यवाही सुनिश्चत करवायी और रही बात अवांछित घटना की तो सुरजीत यादव को श्रीमती दशरथ देवी महाविद्यालय प्रबन्धन से भय है की वो अपने कृत्यों पर पर्दा डालने हेतु सुरजीत यादव के खिलाफ कोई भी अवांछित घटना को अंजाम दे सकते है।
 

7. बृजेश तिवारी दशरथ देवी महाविद्यालय प्राचार्य का कहना है कि सुरजीत यादव के पास पत्रकारिता की कोई शैक्षिक योग्यता भी नही है।
उत्तर- महाविद्यालय प्रबन्धन के पास कौन से तथ्य हैं की सुरजीत यादव के पास पत्रकारिता की योग्यता नहीं है उन तथ्यों के साथ में उन्हें सुरजीत यादव के खिलाफ कार्यवाही सुनिश्चित करवाना चाहिए, न कि अपने असामाजिक कृत्यों को छुपाने के लिए फर्जी आरोप लगाना चाहिए ।

क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार मनोज त्रिपाठी जी ने कहा की लोग इस तरह के आरोप लगाते हैं , शायद उनके कहने का मतलब होगा की लोग अपने कारनामे छुपाने के लिए पत्रकारो पर फर्जी आरोप लगाते हैं

नोट- अगले अंक में जरूर पढ़े क्या है दशरथ देवी महाविद्यालय के प्राचार्य के डिग्री का सच, अलग- अलग अंक पत्र पर अलग-अलग जन्मतिथि की कहानी, भ्रष्टाचार की कहानी

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