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कैथल-बेटियों में नहीं है प्रतिभा की कमी लेकिन आर्थिक स्थिरिथा रही आड़े

कृष्ण प्रजापति | May 04, 2018 05:17 PM
कृष्ण प्रजापति

गोल्ड मेडल जीतकर समाज व प्रदेश का नाम रोशन कर रही हैं बेटियां

बेटियों में नहीं है प्रतिभा की कमी लेकिन आर्थिक स्थिति आ रही है आड़े

कई बार गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी है बेटियां

15 जून को इंटरनेशनल खेलने नेपाल जाएंगी पूनम और मनीषा प्रजापति

कैथल, 04 मई (कृष्ण प्रजापति): इसे हमारे देश की व्यवस्था की विडंबना समझिए या गलत प्रचलन कि जब व्यक्ति कुछ हासिल कर लेता है तो उसको सम्मानित करने वालों का तांता लग जाता है और उसको ढेर सारा चढ़ावा भी चढ़ता है लेकिन प्रतिभावान व्यक्ति को तंगी के दिनों में अगर थोड़ा सा भी सहयोग मिल जाए तो वह मैडलों की झड़ी लगा सकता है। जी हां हमारे समाज में ऐसी बेटियां भी हैं जिनमें प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और यूं कहिए कि वे किसी भी क्षेत्र में आज लड़कों से पीछे नहीं है लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते आगे बढ़ने के लिए उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसी ही कहानी है प्रजापति समाज की आन बान और शान मनीषा खोवाल व पूनम खोवाल पुत्री गुलाब खोवाल प्रजापति निवासी बहादुरगढ़ हरियाणा की, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर चुकी है। इसके साथ ही वे पढ़ाई के मामले में भी हायर एजुकेशन प्राप्त कर रही है। इन दोनों बेटियों के माता-पिता कैंसर रोग से पीड़ित हैं और पिताजी मार्बल का कार्य करते थे लेकिन जब उन्हें डॉक्टर द्वारा कैंसर पीड़ित बता दिया गया व ईलाज के चलते काम छूटता गया तो वे काम करने में अब असमर्थ होने लगे और बीमारी के कारण उनका वह कार्य छूट गया।

  

आजकल घर का गुजारा करने के लिए वे फोटोस्टेट का कार्य करते हैं और बेटियों को पढ़ा भी रहे हैं व खेलों में आगे भी भेज रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते उन्होंने हार नहीं मानी और बेटियों को खेलने के लिए विदेशों में भी भेजने की हिम्मत कर रहे हैं। हालांकि उनके हौसले को सभी सलाम कर रहे हैं लेकिन गुलाब सिंह प्रजापति ने बताया कि वे बेटियां और बेटों में कोई फर्क महसूस नहीं करते और उनकी पांच बेटियां हैं जो पढ़ाई में भी अव्वल है और खेलों के मामले में भी काफी प्रतिभावान है और पूनम जहां रेस लगाने में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक प्राप्त कर चुकी हैं तो वहीं मनीषा भी कुश्ती के 65 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश और जिला स्तर पर तो मेरी बेटियों ने मेडल के ढेर लगा रखे हैं और नेशनल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मैडलों की कोई कमी नहीं है लेकिन वे इन बेटियों की पढ़ाई और खेलों के दौरान होने वाले खर्च को वहन करने में असमर्थ है।

  

बॉक्स--प्रदेश की सामाजिक संस्थाओं व समाज सेवकों से अपील बेटियों का साथ दो ताकि आगे बढें बेटियां-पढ़ें बेटियां


पूनम और मनीषा के पिता गुलाब प्रजापति ने कहा कि वैसे तो उन्होंने कभी आर्थिक स्थिति की कमजोरी की परवाह नहीं की लेकिन अब बेटियां बी.ए. और एम.ए. की पढ़ाई करने के साथ-साथ खेलों में भी काफी अच्छा प्रदर्शन कर रही है लेकिन माता-पिता दोनों कैंसर रोग से पीड़ित होने के कारण और 5 बेटियां होने के कारण घर का खर्च चलाने में बहुत मुश्किल हो रही है इसलिए उन्होंने बेटियों को पढ़ाने व खेल में आगे ले जाने के खर्चे में असमर्थता जताते हुए किसी सामाजिक संगठन, एनजीओ अथवा समाज सेवकों से सहयोग की अपील की है। ताकि बेटियों की शिक्षा व खेल प्रैक्टिस प्रभावित न हो।

  

बॉक्स -- दोनों बेटियां कई बार जीत चुकी है गोल्ड मेडल


प्रजापति समाज की बेटियां पूनम और मनीषा गत 28 से 30 अप्रैल को जालंधर के डीएमएस स्कूल में हुए दूसरे स्पोर्ट्स एंड कल्चरल डेवलपमेंट फाउंडेशन राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी है और विजेता खिलाड़ियों का उनके यहां पहुंचने पर स्वागत भी किया गया था। मनीषा ने 65 किलो भार वर्ग में कुश्ती में स्वर्ण पदक जीता है तो वहीं पूनम ने रेस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर समाज, देश, प्रदेश व बहादुरगढ़ का नाम रोशन किया है। पूनम व मनीषा प्रजापति ने बताया कि वे आगे खेलना चाहती हैं और आगामी 15 जून को इंटरनेशनल गेम्स नेपाल में आयोजित होंगे वे उन इंटरनेशनल गेम्स में खेलने नेपाल जाएंगी।

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