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बाबा रे बाबा। भाजपा नेताओं का बाबा के प्रति प्यार बरकरार,चोरीछुपे मिलना भी शुरू।

राजकुमार अग्रवाल | May 22, 2018 08:16 PM
राजकुमार अग्रवाल
बाबा रे बाबा।
भाजपा नेताओं का बाबा के प्रति प्यार बरकरार,चोरीछुपे मिलना भी शुरू।
 
 
भाजपा नेताओं का दुष्कर्मी बाबा गुरमीत राम रहीम के प्रति प्रेम व लगाव अभी भी कम होने का नाम नहीं ले रहा।बीजेपी नेता और प्रदेश के परिवहन व जेल मंत्री कृष्ण लाल पंवार सोमवार को अचानक ही बिना किसी पूर्व सूचना या कार्यक्रम के सुनारियां गांव स्थित रोहतक जेल पहुंचे और वहां बंद गुरमीत राम रहीम से अकेले में तकरीबन आधा घंटा तक मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान जेल के अधिकारियों व कर्मचारियों को इनसे दूर ही रखा गया।गौरतलब है कि गुरमीत राम रहीम सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा के मुखिया हैं, जिसके लाखों की तादाद में अनुयायी हैं। इस समय गुरमीत राम रहीम अपने ही डेरे की दो युवा साध्वियों के साथ बलात्कार व यौन शोषण के आरोप में 20 वर्ष के कारावास की सजा काटने के लिए जेल में बंद हैं। गुरमीत के जेल जाने से पहले भी बीजेपी का बाबा के प्रति गहरा लगाव जगजाहिर रहा है। बीजेपी के कई मंत्री बाबा के जेल जाने से पहले तक भी बाबा के समक्ष डेरे में नतमस्तक होते रहे हैं । राज्य के प्रमुख मंत्री रामविलास शर्मा और अनिल विज तो बाबा के खास चेले माने जाते रहे हैं और ये बाबा को 51 लाख रूपये की राशि का चैक भेंट में देकर जबरदस्त विवादों में भी घिर चुके हैं । बाबा ने 2014 के चुनावों में खुल कर बीजेपी की मदद करने का फरमान अपने अनुयायियें को जारी किया था, जिसके बाद बीजेपी को पहली बार हरियाणा में पूर्ण बहुमत हासिल हुआ था । चुनाव में जीत हासिल होने के बाद हरियाणा बीजेपी के 47 में 40 विधायक इकट्ठे हो कर डेरे में पहुंचे थे और कृतज्ञता स्वरूप बाबा के पैरौं में अपना माथा रगड़ कर आये थे ।सीबीआई अदालत से बाबा को सजा मिलने के बाद पंचकूला में हुए हिंसक तांडव के उपरांत बीजेपी नेताओं ने बाबा से दूरी बना ली थी, लेकिन कल अचानक मंत्री कृष्ण लाल पंवार का जेल में पहुंचना और बाबा से मिलना कई तरह के संदेह पैदा करता है । लगता है कि बाबा से दूरी बनाना बीजेपी के नेताओं की आंशिक मजबूरी थी , लेकिन अंदर ही अंदर बाबा के प्रति उनका प्रेम पहले की तरह ही ठाठें मार रहा था, जो अब फिर से फूट फूट कर बाहर आ रहा है । हालांकि बाबा और पंवार के बीच क्या बातचीत हुई , इसका कोई अधिकारिक ब्यौरा नहीं दिया गया है, लेकिन समझा जाता है कि पंवार आगामी लोकसभा व विधान सभा चुनावों के मद्देनजर बाबा को पार्टी की तरफ से सफाई देने और बाबा की घोर नाराजगी दूर करने के मकसद से ही जेल में गये थे , ताकी भविष्य में बाबा से बीजेपी के पक्ष में फतवा जारी कराने का माहौल अभी से बनाया जा सके। चर्चा यह भी है कि कृष्ण लाल पंवार बाबा से यह समझौता करने गये थे कि सीबीआई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली बाबा की हाई कोर्ट में लगी याचिका पर हरियाणा सरकार ढ़ुलमुल रूख अपना लेगी और उनकी रिहाई की भूमिका में मददगार बनेगी, यदि बाबा चुनावों में बीजेपी के पक्ष में फतवा जारी करने का वायदा करें तो।संवैधानिक जिम्मेदारी के पद पर आसीन एक वरिष्ठ एवं कैबीनेट मंत्री का अचानक जेल में जाकर एक जघन्य बलात्कारी बाबा से मिलने का इसके अलावा मुझे तो कोई और दूसरा कारण नजर नहीं आता। क्या ऐसी सरकार और सत्ता के लालच में अपराधियों तक से खुली सौदेबाजी करने वाले मंत्रियों को एक पल के लिए भी सत्ता में रहने का अधिकार है ?
 साभार ---रोहतक से सर्वदमन सांगवान
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