Wednesday, June 20, 2018
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Uttar Pradesh

माता सीता का अपमान संपूर्ण नारी जाति एवं सनातन धर्म का अपमान है :-ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास

राहुल अग्रहरि उर्फ रवि ब्यूरो चीफ pbh | June 03, 2018 07:41 PM
राहुल अग्रहरि उर्फ रवि ब्यूरो चीफ pbh

माता सीता का अपमान  संपूर्ण नारी जाति एवं सनातन धर्म का अपमान है :-ओम प्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास 

 

उप मुख्यमंत्री को तत्काल मंत्रिमंडल से बाहर किया जाए अन्यथा इसका परिणाम होगा गंभीर होगा-संस्थान

 

 

       सर्वोदय सद्भावना संस्थान की एक बैठक रामानुज आश्रम मे आलोक जोतिषी  की अध्यक्षता में संपन्न हुई। जिसमें प्रदेश सरकार के उपमुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा द्वारा माता सीता के प्रति दिए गए बयान कि वह टेस्ट ट्यूब बेबी हो सकती है की घोर निंदा की गई।

          ओमप्रकाश पांडे अनिरुद्ध रामानुज दास ने कहा कि उन्हें ज्ञान नहीं है भगवान नारायण गर्भ को दिए हुए वचन के अनुसार गर्भ में आते हैं ।तुलसीदास जी ने भी  रामचरितमानस में  भगवान के गर्भ में आने का उल्लेख किया है । श्रीमद्भागवत में  देवताओं ने आकर के  कारागार के अंदर गर्भ स्तुति का पाठ किया है ।

            माता लक्ष्मी जी  गर्भ में नहीं आती है। रामावतार के पहले भगवान नारायण जी मत्स्य,  वाराह ,कच्छप ,नरसिंह,  वामना वतार एवं परशुराम का अवतार लिया था। महाराज मनु और शतरूपा ने  नैमिषारण्य क्षेत्र में 23000 वर्षों तक तपस्या किया। भगवान नारायण ने उन्हें वचन दिया कि हम आपके पुत्र रूप में आएंगे ।माता शतरूपा ने कहा कि लक्ष्मी जी हमारी बहू के रूप में अवतरित हो ।

       भगवान नारायण ने लक्ष्मी जी से कहा कि आप भी चलिए माता लक्ष्मी ने कहा मैं गर्भ में नहीं जाऊंगी । मैं पृथ्वी के गर्भ से अवतरित हूँगी। इसीलिए वह एक कुंभ से अवतरित हुई। द्वापर में  राजा भीष्मक  अपनी पत्नी के साथ प्रतिदिन तालाब में स्नान करने जाया करते थे ।वहां पर एक दिन कमल के वृक्षों में कमल के पुष्पों के ऊपर एक बालिका मिली जिसे लाकर लालन पालन किया वही बालिका आगे चलकर रुकमणी बनी । भगवान श्रीकृष्ण से उनका विवाह हुआ वह भी लक्ष्मी जी की अवतार थी इसलिए किसी के गर्भ में अवतरित नहीं हुई ।

       कलयुग में श्री विष्णु चित्त स्वामी भगवान वरदराज के अनन्य भक्त थे ।एक दिन तुलसी के वृक्षों में उन्होंने देखा कि एक बालिका लेटी हुई है और चारों तरफ से गायों ने उनको घेर रखा है ।गायों के स्तन से दूध निकल रहा है ।उस बालिका को वह ले आए और लालन पालन किया। उस बालिका का नाम गोदामबा  पड़ा । श्री संप्रदाय के 12 अल्वारो मेंआप एक आलवार आंडाल के रूप में जानी जाती है। आपका विवाह भगवान रंगनाथ से हुआ जिस समय पांडु देश के राजा और विष्णु चित्त स्वामी उन्हें भगवान रंगनाथ के मंदिर के सामने ले गए भगवान का पट खुला और भगवान निकल कर के आए गोदामबा जी को अंदर ले गए मंदिर का पट बंद हो गया ।तब से आज तक श्री वैष्णव लोग एक महीने माता गोदामबा जी का पर्व मनाते हैं। वह भी गर्भ में नहीं आयी ।  

          इस तरह की बातें करना सनातन धर्म के विरुद्ध है ।

इन्होंने सनातन धर्म का अपमान किया है इन्हें तत्काल मंत्रिमंडल से निकाला जाए अन्यथा सरकार को इसका फल अवश्य मिलेगा। कार्यक्रम में मुख्य रूप से  पंडित आलोक ज्योतिषी,नारायणी  रामानुज दासी ,अतुलानंद महाराज, आचार्य चंद्रिका प्रसाद, पंडित प्रदीप मिश्रा, राजेंद्र शुक्ल एडवोकेट, रामपाल सिंह ,गिरीश दत्त मिश्रा आदि प्रमुख रूप से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा उन्होंने मर्यादा का उल्लंघन करते हुए सनातन धर्म का अपमान किया है यह माता सीता का अकेले अपमान नहीं  संपूर्ण नारी जाति का अपमान है और मांग किया कि राज्यपाल महोदय और मुख्यमंत्री योगी नाथ दिनेश  शर्मा  को तत्काल मंत्रिमंडल से बाहर करें।

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