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तोशाम-क्या गूल खिलाएगी तोशाम विधानसभा सीट ,बंसी लाल परिवार आज भी कब्जाना चाहता है यहाँ की चौधर

तोशाम विष्णु दत्त शास्त्री | June 09, 2018 06:32 PM
तोशाम विष्णु दत्त शास्त्री

विष्णु दत्त शास्त्री,
तोशाम (भिवानी)। आगामी 2019 के चुनावों को लेकर हरियाणा की राजनिति में दिन-प्रतिदिन बदलते समीकरणों के बीच हरियाणा के राजनेताओं के लिए अहम सीट मानी जाने वाली तोशाम विधानसभा सीट पर भी नेताओं ने कमर कसनी शुरु कर दी है। जैसे-जैसे साल 2019 व विधानसभा चुनाव नजदीक आता जा रहा है वैसे-वैसे पिछले कुछ दिनों से अनेक पार्टियों के नेता सक्रिय होकर हल्के में लोगों को लुभाने की जुगत में लग गए हैं। पूर्व में हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे बंसीलाल का गढ माना जाने वाला तोशाम राजनैतिक तौर पर हरियाणा में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। क्योंकि वर्तमान में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्रवधु एवं हरियाणा कांग्रेस विधायक  दल की नेता किरण चौधरी यहां से विद्यायक हैं वे भी पिछले कुछ महिनों से हल्के में लोगों के बीच चुनावों को लेकर सक्रिय दिखने लगी हैं।

वह लगातार पिछली तीन योजनाओं से तोशाम की विधायक  हैं और अबकि बार मुख्यमंत्री के पद के लिए दावा करने वाली किरण चौधरी अपने पुश्तैनी गढ में एक बार फिर जीत दर्ज कर हरियाणा की राजनिति व कांग्रेस हाईकमान में अपनी अलग ही पहचान बनाने की कोशिश में हैं। कांग्रेस नेता किरण चौधरी को उम्मीद है कि अबकि बार हरियाणा में कांग्रेस सरकार के आने पर वे तोशाम से विजयी हासिल करके मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचेंगी।

इस बात का जिक्र सीएलपी लीडर अपने पिछले तोशाम हल्के के दौरों के दौरान ठेठ हरियाणवी अंदाज में काफी दफा  कर चुकी हैं कि मोटी कलम इबकै हाथ में आते ही तोशाम के और भी वारे-न्यारे कर दयूंगी। वहीं दूसरी तरफ किरण चौधरी के राजनैतिक  विरोधी व वर्तमान में भिवानी-महेंद्रगढ लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह भी अबकि बार लोकसभा का चुनाव लडने से पहले ही मना कर चुके हैं। ऐसे में यदि भारतीय जनता पार्टी उन्हें तोशाम विधानसभा का टिकट थमाती है तो तोशाम के राजनैतिक समीकरण और भी अधिक रोचक हो जाते हैं क्योंकि धर्मबीर सिंह भी तोशाम विस सीट से दो बार विद्यायक रह चुके हैं उन्होंने यहां से सन् 1987 में लोकदल की टिकट पर चुनाव लडते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल को करीबन दो हजार से अधिक वोटों से मात दी थी तत्पश्चात् धर्मबीर सिंह ने कांग्रेस की टिकट पर लडते हुए सन् 2000 में बंसीलाल के सुपुत्र सुरेंद्र सिंह को करीबन 20 हजार से अधिक वोटों से कडी मात देते हुए धूल चटाई थी।

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लेकिन पिछली करीबन तीन योजनाओं से वे इस सीट से लडने के लिए दूरी ही बनाए हुए हैं लेकिन उनके पक्ष में मजे की बात यह है कि वे इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल व उनके सुपुत्र सुरेंद्र सिंह को हराकर तोशाम हल्के के लोगों में एक अमिट छाप छोडे हुए हैं ऐसे में वे यहां के लोगों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। वहीं वे हरियाणा की राजनिति में भी माहिर माने जाते हैं क्योंकि पहले कांग्रेस सरकार के समय उन्हें बाढडा से विधानसभा का टिकट मिला उसके बाद उनके लिए बिल्कुल अंजान जगह सोहना से विधानसभा का टिकट मिला उसके पश्चात् पिछले लोकसभा चुनावों में उन्हें भाजपा से भिवानी-महेंद्रगढ लोकसभा का टिकट मिला तो उन्होंने कहीं भी मात न खाते हुए हर जगह विजय हासिल की चाहे वह बाढडा हो चाहे सोहना चाहे भिवानी-महेंद्रगढ लोकसभा क्षेत्र। अब ऐसे में धर्मबीर सिंह अंजान जगह सोहना व लोकसभा चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी से भी विजय हासिल कर आए तो तोशाम क्षेत्र के लोगों से तो उनका पुराना नाता रहा है।

 

लेकिन यहां उनके सामने चट्टान की तरह खडी कांग्रेस पार्टी की तरफ से वर्तमान में विधायक दल की नेता किरण चौधरी बडी चुनौती बन सकती हैं क्योंकि पिछली करीबन तीन योजनाओं से निरंतर इस सीट पर विजय हासिल करने वाली किरण चौधरी के इस किले को किसी भी राजनेता के लिए भेद पाना इतना आसान नहीं होगा। यदि अबकि बार भी धर्मबीर सिंह पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के गढ में ही उनकी पुत्रवधू किरण चौधरी को विधानसभा चुनावों में तोशाम से मात देने में कामयाब होते हैं तो हरियाणा की राजनिति में उनसे बढकर राजनैतिक विजेता शायद ही कोई होगा। यदि ऐसे में सांसद धर्मबीर सिंह को भाजपा से तोशाम विधानसभा का टिकट नहीं मिलता है तो वे किस क्षेत्र व किस पार्टी से चुनाव लडने का मन बनाएंगे यह तो समय ही बताएगा। लेकिन धर्मबीर सिंह के अलावा भाजपा के लिए तोशाम क्षेत्र से विस प्रत्याशी कौन होगा ऐसे में पार्टी के लिए टिकट देने में भी असमंजश की स्थिती बनेगी क्योंकि यहां से भाजपा में टिकट के दावेदार अनेकों होंगे जिनमें पिछले काफी  सालों से हल्के के लोगों के बीच देखे जाने वाले व वर्तमान में भाजपा निगरानी कमेटी के चेयरमैन रविंद्र बापौडा का अग्रणी स्थान होगा यदि उन्हें भाजपा से तोशाम हल्के की टिकट मिल जाती है तो उनके लिए इस सीट को जीतना कठिन तो होगा लेकिन असंभव नहीं।

क्योंकि उनका पैतृक गांव बापौडा भी बडा गांव होने की वजह से वोटरों की संख्या अच्छी खासी है और वे अपने गांव के अनेक युवाओं की पहली पसंद हैं। रविंद्र बापौडा पिछले काफी  समय से तोशाम हल्के के लोगों के बीच में भी सुख-दुख में साथ रहे हैं जिससे स्थानीय लोगों के दिलों में वे भी अमिट जगह बनाए हुए हैं। वहीं भाजयुमो के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व वर्तमान में भाजपा के प्रदेश सचिव मुकेश गौड भी काफी  बार तोशाम से चुनाव लडने की चर्चा में आए हैं यदि पार्टी गौड को तोशाम से चुनाव मैदान में उतारती है तो उनके लिए भी किरण चौधरी से पार पाना टेढी खीर होगा। वहीं दिल्ली में अपना परचम लहराने वाली आम आदमी पार्टी के नेता पवन हिंदुस्तानी भी अबकि बार तोशाम से पार्टी की जीत की ताल ठोक रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गत मार्च माह में तोशाम पहुंचे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आगमन पर पवन हिंदुस्तानी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या वाली भीड ने विपक्षी पार्टीयों को यह संकेत दे दिया था कि आगामी समय में आप पार्टी भी हल्के में अपनी दमदार ताल ठोकेगी। उधर दूसरी तरफ पिछले काफी चुनावों में तोशाम हल्के से सिर्फ संघर्ष ही करते नजर आए इनैलो पार्टी के पूर्व प्रत्याशी, नेता व कार्यकत्र्ता भी तोशाम में अबकि बार जीत का दावा ठोक रहे हैं। क्योंकि पिछले चुनावों में इनैलो पार्टी की प्रत्याशी कमला रानी ने किरण चौधरी के गढ में करीबन 38 हजार चार सौ 77 मत प्राप्त करके दूसरा स्थान प्राप्त किया था जिससे अबकि बार पार्टी नेता व कार्यकत्र्ता पूरे जोश के साथ अपनी पार्टी के जीत का दावा करते नजर आ रहे हैं। लेकिन खास बात यह होगी की अबकि बार तोशाम विस से इनैलो प्रत्याशी कौन होगा क्योंकि लगभग हर बार पार्टी द्वारा विस चुनावों में प्रत्याशी बदला जाता है पहले सुनील लांबा तो फि र कर्नल गजराज सिंह तथा पिछली दफ ा कमला रानी तो अबकि बार तोशाम विस से इनैलो प्रत्याशी कमला रानी ही रहेंगी या कोई और। यह तो समय ही बताएगा की अबकि बार इनैलो किस प्रत्याशी को तोशाम विस मैदान में उतारती है। वहीं कुछ राजनैतिक ज्ञाताओं से यह भी जानने को मिल रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों में सांसद धर्मबीर सिंह इनैलो पार्टी में शामिल हो सकते हैं। इनैलो पार्टी में शामिल होकर तोशाम से इनैलो पार्टी की तरफ से किरण चौधरी को कडी टक्कर दे सकते हैं। क्योंकि इनैलो पार्टी में शामिल होने के पश्चात् धर्मबीर सिंह अपने पर्सनल वोटरों के अलावा हल्के से पुराने संबंध रहने के साथ-साथ इनैलो के वोटरों का भी जमकर लाभ उठाएंगे ऐसे में किरण चौधरी को मात देने के लिए धर्मबीर सिंह के लिए इनैलो पार्टी ब्रह्मास्त्र का काम करेगी। यदि वाकई में ऐसा होता है तो किरण चौधरी के लिए अपने गढ तोशाम को बचाना न केवल एक बडी चुनौती होगा बल्कि कांग्रेस हाईकमान के सामने भी अपनी मुख्यमंत्री की दावेदारी को पेश करने का सपना भी धूमिल हो सकता है। आखिर यह तस्वीर तो पार्टीयों के टिकट वितरण करने के पश्चात् ही साफ हो पाएगी की कौन प्रत्याशी किस चुनाव चिन्ह् के साथ मैदान में उतरता है और किस प्रत्याशी का मुकाबला किसके साथ हो पाता है। लेकिन यह बात स्पष्ट है कि अभी से बन रहे चुनावी समीकरणों को देखते हुए अबकि बार तोशाम हल्के की विधानसभा सीट को जीत पाना प्रत्येक प्रत्याशी के लिए टेढी खीर ही साबित होगा।

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