Thursday, June 21, 2018
Follow us on
BREAKING NEWS
पांच घण्टे रिक्शा चला कर नही होती योग की जरूरत--------मां की ममता भी नहीं जागी, दोनों बच्चियों को बिलखता छोड़ चली गई मायकेतरावड़ी थाने की चार दिन से बिजली खराब -नही हो रहे कामकाज, शिकायत करने के बावजूद भी सो रहा बिजली विभागमोबाइल फोन ने उड़ाया अंतर्राष्ट्रीय योग का मखौल योग का नहीं किसी जाति धर्म से लेना देना - प्रभारी मंत्री, योग करने से होता है शारीरिक व मानसिक विकास- डीएम अमेठीघरौंडा जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के पसीने छूट , जताई मांगों पर सहमतिभारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा द्वारा नरवाना मण्डल में पौधारोपण का कार्यक्रम किया गया जींद-पति समेत पांच लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीडऩ का मामला दर्ज
Haryana

आर्य समाज नरवाना के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन

नरेन्द्र जेठी | June 10, 2018 05:25 PM
नरेन्द्र जेठी

आर्य समाज नरवाना के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन 
नरवाना, 10 जून (नरेन्द्र जेठी)  आर्य समाज नरवाना रजि. के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने यज्ञ सम्पन्न करवाया तथा यज्ञमान के आसन पर राजवीर सिंह नम्बरदार उपस्थित रहे। यज्ञोपरांत धर्मपाल आर्य, आदित्य आर्य व धर्मपाल गुप्ता ने अपने-अपने विचार भजनों व गीतों के माध्यम से दिए। पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि संसार में व्याक्ति का चरित्र सबसे बड़ा है, चरित्र अनमोल रत्न है। जो कोई तोल सकता धन, धरती के क्या विशाद आ जाए बैकुण्ठ हाथ - यानि चरित्र धरती व स्वर्ग के ऐश्वर्य से भी बड़ा है। जिस व्यक्ति के पास चरित्र रूपी रत्न है उसके आगे समस्त संसार नतमस्तक है। निर्धन धनवान से डरता है दुर्बल बलवान से और मूर्ख विद्वान से डरता है परन्तु चरित्रवान से ये सब डरते हैं। वे माता-पिता धन्य हैं जिन्होंने ऐसे उज्ज्वल नरपुंगव को जन्म दिया है उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम 
है। चरित्र मानव जीवन का दर्पण है। इसके निर्माण के लिए बाहर की रूपरेखा पर विचार करना पर्याप्त नहीं है। बाहर का चरित्र व्यवहार कहलाता है व्यवहार का व्यक्तिगत रूप आचार है और आचार का मौलिक रूप विचार है। मनुष्य के जीवन में इससे सत्य और कोई बात नही है कि हम जैसा बनने का विचार करते हैं वैसे ही बन जाते हैं। पुरूष अपने संकल्पों से बना हुआ होता है। कार्य करने से पूर्व उसके मन में उस कार्य को करने का विचार उत्पन्न होता है। वही संकल्प आगे चलकर कार्यरूप में बदल जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि चरित्र निर्माण में विचार की मूल कारण है। चरित्र एक अनमोल हीरा है जिसका जन्म माता की कोख में होता है। चरित्र निर्माण का मूल विचार है, विचार शुद्धि के लिए परमात्मा को सदैव अपने हृदय में विराजमान कर उनका चिंतन करते रहना चाहिए और बुरे विचारों से बचने के लिए आठ अंगों से संयम और नियम का पालन करते रहना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व प्रधान नरेश चन्द, आदित्य, मंत्री विजय कुमार, किताब सिंह, धर्मपाल आर्य, धर्मपाल गुप्ता, राजवीर, अर्जुन 
देव, महेन्द्र आर्य, सुनील आर्य आदि उपस्थित रहे।

Have something to say? Post your comment
More Haryana News
पांच घण्टे रिक्शा चला कर नही होती योग की जरूरत--------
मां की ममता भी नहीं जागी, दोनों बच्चियों को बिलखता छोड़ चली गई मायके
तरावड़ी थाने की चार दिन से बिजली खराब -नही हो रहे कामकाज, शिकायत करने के बावजूद भी सो रहा बिजली विभाग
घरौंडा जनस्वास्थ्य विभाग अधिकारियों के पसीने छूट , जताई मांगों पर सहमति
भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा द्वारा नरवाना मण्डल में पौधारोपण का कार्यक्रम किया गया
जींद-पति समेत पांच लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीडऩ का मामला दर्ज
फिर हंगामेदार रही नगरपालिका की बैठक -विकास न होने से खफा पार्षद को विरोध करना पड़ा मंहगा
नरवाना युवा कांग्रेस ने फल बांटे
मेला मंडी में योगाभ्यास की पायलट रिहर्सल मंगलवार को सम्पन्न हुई।
चीका -विधायक बाजीगर पर लगाया चेयरपर्सन की कुर्सी हिलाने की साजिश रचने का आरोप