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आर्य समाज नरवाना के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन

नरेन्द्र जेठी | June 10, 2018 05:25 PM
नरेन्द्र जेठी

आर्य समाज नरवाना के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन 
नरवाना, 10 जून (नरेन्द्र जेठी)  आर्य समाज नरवाना रजि. के प्रांगण में रविवारीय साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। जिसमें पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने यज्ञ सम्पन्न करवाया तथा यज्ञमान के आसन पर राजवीर सिंह नम्बरदार उपस्थित रहे। यज्ञोपरांत धर्मपाल आर्य, आदित्य आर्य व धर्मपाल गुप्ता ने अपने-अपने विचार भजनों व गीतों के माध्यम से दिए। पुरोहित मिथिलेश शास्त्री ने कहा कि संसार में व्याक्ति का चरित्र सबसे बड़ा है, चरित्र अनमोल रत्न है। जो कोई तोल सकता धन, धरती के क्या विशाद आ जाए बैकुण्ठ हाथ - यानि चरित्र धरती व स्वर्ग के ऐश्वर्य से भी बड़ा है। जिस व्यक्ति के पास चरित्र रूपी रत्न है उसके आगे समस्त संसार नतमस्तक है। निर्धन धनवान से डरता है दुर्बल बलवान से और मूर्ख विद्वान से डरता है परन्तु चरित्रवान से ये सब डरते हैं। वे माता-पिता धन्य हैं जिन्होंने ऐसे उज्ज्वल नरपुंगव को जन्म दिया है उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम 
है। चरित्र मानव जीवन का दर्पण है। इसके निर्माण के लिए बाहर की रूपरेखा पर विचार करना पर्याप्त नहीं है। बाहर का चरित्र व्यवहार कहलाता है व्यवहार का व्यक्तिगत रूप आचार है और आचार का मौलिक रूप विचार है। मनुष्य के जीवन में इससे सत्य और कोई बात नही है कि हम जैसा बनने का विचार करते हैं वैसे ही बन जाते हैं। पुरूष अपने संकल्पों से बना हुआ होता है। कार्य करने से पूर्व उसके मन में उस कार्य को करने का विचार उत्पन्न होता है। वही संकल्प आगे चलकर कार्यरूप में बदल जाते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि चरित्र निर्माण में विचार की मूल कारण है। चरित्र एक अनमोल हीरा है जिसका जन्म माता की कोख में होता है। चरित्र निर्माण का मूल विचार है, विचार शुद्धि के लिए परमात्मा को सदैव अपने हृदय में विराजमान कर उनका चिंतन करते रहना चाहिए और बुरे विचारों से बचने के लिए आठ अंगों से संयम और नियम का पालन करते रहना चाहिए। इस अवसर पर पूर्व प्रधान नरेश चन्द, आदित्य, मंत्री विजय कुमार, किताब सिंह, धर्मपाल आर्य, धर्मपाल गुप्ता, राजवीर, अर्जुन 
देव, महेन्द्र आर्य, सुनील आर्य आदि उपस्थित रहे।

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