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स्कूलो में बच्चों की एक कलास थियेटर की भी लगनी चाहिए- अभिनेता यशपाल शर्मा।

नरेन्द्र जेठी | June 13, 2018 06:34 PM
नरेन्द्र जेठी
साक्षात्कार -----
 
स्कूलो में बच्चों की एक कलास थियेटर की भी लगनी चाहिए- अभिनेता  यशपाल शर्मा।
अच्छा कलाकार होने के साथ-साथ अच्छा इंसान होना भी जरूरी।
अश्लीलता  व गंदगी को सपोर्ट न करें, अच्छा सिनेमा देखें। यशपाल ने कहा
नरवाना, 13 जून (नरेन्द्र जेठी)  हरियाणा से बालीवुड में जाकर हरियाणा का नाम रोशन करने वाले फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है। लगान के लाखा, गंगाजल के सुंदर यादव, टशन के एएसपी राणा, बम्बई से आया मेरा दोस्त में मुख्य खलनायक की भूमिका निभाने वाले यशपाल शर्मा ने यशराज बैनर, कबीर खान, आशुतोष गावरीकर, प्रकाश झा के अलावा लगभग सभी बड़े निर्माता निर्देशकों के साथ काम करके अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यशपाल शर्मा आज किसी काम से नरवाना में पहुंचे और फिल्मी दुनिया की चकाचौंध व हरियाणवी फिल्मो के विकास जैसे मुद्दो पर सवंाददाता नरेन्द्र जेठी से उन्होनें बेबाकी से बातचीत की। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के अंश - 
जेठी-यशपाल जी नमस्कार! सबसे पहले आपको निरन्तर मिल रही सफलताओं पर बधाई। मेरा पहला प्रश्न है कि आपकी सफलता और फिल्म जगत में अभिनेता के रूप में जो लोकप्रियता आपको मिली है, उसके पीछे कौन-कौन से मुख्य बिन्दु आप मानते हैं? 
यशपाल- मुझे नहीं लगता कि मैंने बहुत ज्यादा उंचाईयां पाईं हैं। मैं समझता हूं कि मैं अभी सीख ही रहा हूँ। दूसरी बात जो लोग फिल्मों में आना चाहते हैं उनसे मैं कहूंगा कि केवल ग्लैमर और फिल्मों की चमक-दमक से प्रभावित होकर आना ठीक नहीं, अपने आपको और अपनी क्षमताओं को पहचान कर ही निर्णय करें।
जेठी- यदि किसी में अभिनय से सम्बन्धित गुण हों तो वह क्या करे?
यशपाल- उन्हें अपने आपको पहचानना और उससे जोडऩा शुरू कर देना चाहिए। उसके  चाहे अच्छा सिनेमा देखना हो, चाहे डबलमीनिंग वाली वल्गर फिल्मों     से बचना हो। गन्दे और डबल मीनिंग वाले संवादों को लाइक न करें, इससे     गन्दगी को बढ़ावा मिलता है। जहां तक सम्भव हो अच्छा साहित्य पढ़ें, इनमें मुंशी प्रेमचन्द का साहित्य, अमर चित्रकथा, देश का इतिहास, व पंचतंत्र की
कहानियां आदि शामिल हैं। 
जेठी- ये नवोदित कलाकारों के लिए आपने बहुत अच्छी बात कही है, इसके अलावा बच्चों में इन रुचियों को कैसे विकसित करें।
यशपाल- उन्हें थिएटर से रूबरू कराएं, क्योंकि यह पर्सनल्टी डैवल्पमैंट का बहुत अच्छा साधन है जो कि बहुत प्रभावी भी है।
जेठी- तो क्या स्कूल स्तर पर इस प्रकार की कोशिश करने की वकालत कर रहे हैं आप?
यशपाल- बिल्कुल! मैं शिक्षकों व शिक्षामन्त्री तक से कहना चाहता हूूं कि स्कूलों में  बच्चों की एक क्लास थिएटर की ज़रूर लगाएं, जिससे उनके व्यक्तित्व का विकास हो और आगे इस क्षेत्र में उन्हें काम पाने में भी आसानी हो। यदि आपकी बॉडी अच्छी है और आपमें डांस का भी गुण है तो ये आपको इस कला से जोड़ते हैं, पर इसके साथ-साथ आपका एक अच्छी सोच के साथ अच्छे इन्सान होना ज़रूरी है। केवल अच्छा दिखने से कुछ नहीं होगा।
जेठी- मुम्बई की चकाचौंध में रच बस कर भी आप हरियाणा से इतना जुड़ाव होने के कारणों पर क्या कहेंगे?
यशपाल- मैं अढ़ाई साल के अर्से से ही हरियाणा से ज्यादा जुड़ पाया हूं। 'पगड़ी, और 'सतरंगी, फिल्मों की वजह से मुझे लगा कि हरियाणा में भी पंजाब व महाराष्ट्र की तरह अच्छी फिल्में बन सकती हैं। फिर मैंने अध्ययन करके     जाना, 'वीरा-शेरा, 'चन्द्रावल, से पहले और बाद, 'लाडो, से पहले और बाद की स्थिति। पर उनमें से कुछेक हरियाणवी फिल्में ही हिट हुईं। गोवा के फिल्म फैस्टीवल में हमारे पास चार फिल्में भी नहीं थीं। जो हम फेस्टीवल में भेज पाते। 'चन्द्रावल, ने बहुत पैसा कमाया, जे. पी. कोशिक ने बड़ा सुपर संगीत दिया, 'लाडो, को नेशनल अवार्ड मिला, पर.....पर उसके बाद अकाल ही पड़ गया।  फिर आई 'पगड़ी, और 'सतरंगी,। इन  फिल्मों ने पैसा तो नहीं कमाया पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई, नेशनल अवार्ड जीता। बरजिन्दर कौर तथा रवि चौहान ने कमाल किया, रवि भाटिया ने पैसा नहीं कमाया पर अपनी फिल्मों से हलचलें पैदा करदीं। 
जेठी- तो अब आप हरियाणवी फिल्मों का क्या भविष्य देखते हैं? 
यशपाल- अब जागरण हो चुका है! कुछ लोग काम कर रहे हैं, और कुछ बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। 'मलाल, फिल्म बन रही है, राजीव भाटिया जी 'जानीचोरÓ बना रहे हैं। अल्पना सुहासिनी जी ने हिसार में बहुत अच्छी गोष्ठी करवाई। हम कोई भी काम करें मेकिंग में कमाल लाएं, केवल करने के लिए काम न करें। अच्छा माल बनाएं, फिर सफलता दूर नहीं।
जेठी- अच्छी फिल्मों की यदि अच्छी मार्केटिंग नहीं होगी, तो भी वह दर्शकों तक नहीं पहुंचेगी, इस बारे में आपका क्या कहना है?
यशपाल- मार्केटिंग बाद की बात है सबसे पहले माल अच्छा हो, फिल्म अच्छी बने, 'दंगल, बन गई, 'पनघट, बन गई। अच्छी फिल्में बनेंगीं तो यहां के संगीत  कलाकारों को भी काम मिलेगा। ढोलकवादकों , हारमोनियम वादकों, व बीन वादकों को रोजगार मिलेगा।
जेठी- यशपाल जी! हरियाणवी मूल के होने तथा हरियाणवी संस्कृति के स्नेही होने के कारण आप हरियाणवी में आजकल क्या कर रहें हैं ?
यशपाल- मैं आजकल हरियाणा के सर्वमान्य लोक-कवि दादा गुरु पं0 लख्मीचन्द पर इसी साल फिल्म बना रहा हूं। बड़े जद्दोजहद व खोजबीन के बाद मुझे     इसके लिए प्रोड्यूसर मिल गया है जो कि हरियाणा से बाहर के हैं जो कि मेरे लिए औ भी खुशी की बात है। पं0 लख्मीचन्द को बिना स्कूल जाए कैसे भाषा व पूरे ब्रह्माण्ड का आध्यात्मिक ज्ञान हुआ, ये शेाध का विषय है। ये फिल्म दो भागों में बनेगी, इसका दूसरा भाग मैं अगले वर्ष बनाऊँगा। 
जेठी- आपकी फिल्म के लिए मेरी मंगलकामनाएं, अन्त में आप हरियाणवी कला-कारों को क्या सन्देश देना चाहेंगे?
यशपाल- हरियाणवी कलाकारों से मेरा कहना है कि हरियाणवी गीतों, कहानियों लोक-कथाओं और परम्पराओं को आगे बढ़ाएं, सम्मान दें, लाइक करें, स्पोर्ट करें और जहां तक संभव हो गन्दगी से बचें 
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