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सेवानिवृत आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी के कांग्रेस में शामिल होने से बदलने लगे सैमीकरण,तंवर खेमे को मिला बल,

ईश्वर धामू | June 16, 2018 07:50 PM
ईश्वर धामू

सेवानिवृत आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी के कांग्रेस में शामिल होने से बदलने लगे सैमीकरण
तंवर खेमे को मिला बल, तंवर विरोधी गुट बदलने लगा अपनी रणनीति
ईश्वर धामु
भिवानी। हरियाणा के चर्चित आईएएस अधिकारी प्रदीप कासनी सेवानिवृति के बाद कांग्रेस में क्या शामिल हुए कि पार्टी के सैमीकरण ही बदलते नजर आने लगे है। कासनी के लिए सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कॉमेंट आ रहे हैं। क्योकि सर्विस में रहते हुए ही प्रदीप कासनी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिए रहे हैं। अब सेवा निवृति के बाद तो उनके लिखने में पैनापन आ गया है। सामयिक मुद्दे पर सटीक टिप्पणी और किसी भी मुद्दे पर साहित्यिक अंदाज में अभिव्यक्ति सोशल मीडिया में उनकी पहचान बन चुकी थी। सोशल मीडिया में बराबर आ रही टिप्पणियों से इतना तो आभास हो रहा था कि वें देर-सवेर से सक्रिए राजनीति में आयेंगे। सेवानिवृति के प्रारम्भ में लगता था कि वें इनेलो में जा सकते हैं। ऐसा उनके जातीय सैमीकरण के कारण भी कयास लगाए जा रहे थे। परन्तु उन्होने कांग्रेस में शामिल होकर चर्चाकारों का राजनैतिक गणित ही बिगाड़ दिया। इतना ही नहीं कांग्रेस में भी उन्होने प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर केे नेतृत्व में प्रवेश पाया। उन्होने कांग्रेस के सभी नेताओं को अपने कद का अहसास राहुल गांधी से मुलाकात करके करवा दिया। हालांकि कुछ चर्चाकार यह भी कह रहे हैं कि उनको भूपेन्द्र हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस में शामिल होना चाहिए था। पर अपने राजनैतिक ज्ञान और सुझबुझ से प्रदीप कासनी ने एक सही निर्णय लिया। क्योकि अब से पहले जो भी नेता कांग्रेस में भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में शामिल हुए, उनकी एंट्री पर पार्टी में ही कई सवाल पैदा हो गए थे। निसंदेह एक विचारवान, साहित्यप्रेमी और राजनैतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले इस अधिकारी का कांग्रेस में आने का पार्टी को बड़ा लाभ मिलेगा। यह आज चर्चा का विषय नहीं है कि कासनी चुनाव लड़ेंगे या नहीं? पर ऐसे समय में जब कांग्रेस में भंयकर गुटबंदी चल रही है और पार्टी का एक बड़ा व प्रभावी गुट अपनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष का जम कर विरोध कर रहा है, तो निसंदेह ऐसे में पार्टी में नव आगंतुक प्रदीप कासनी की नैतिक जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वें अपने नेतृत्व को कैसे और क्या सहारा दे सकते हैं? क्योकि एक प्रशासनिक अधिकारी होने के कारण उनको सरकार के सम्पर्क तारों का ज्ञान है तो अपने समय के प्रखर और प्रभावी जननेता रहे धर्मसिंह कासनी का बेटा होने के कारण वें राजनैतिक दांव-पैचै की भी पूरी जानकारी रखते हैं। यही कारण है कि उनके अशोक तंवर के नेतृत्व में कांग्रेस में शामिल होने से तंवर विरोधी खेमे में बचैनी पैदा हो गई है। तंवर विरोधी खेमे को यह थोड़ा भी आभास नहीं हो पाया कि प्रदीप कासनी कांग्रेस में आ रहे हैं। कासनी के आने से अशोक तंवर का जाटों द्वारा किए जाने वाले विरोध के तेवर ढ़ीले पड़ जायेंगे। इतना ही नहीं कासनी के अपने क्षेत्र के समर्थक अब निसंदेह तंवर के समर्थन में आयेगें। यह बताया गया है कि शीध्र ही कासनी को पार्टी में एक बड़ा और महत्वपूर्ण पद दिया जा रहा है। पद मिलने के बाद वें अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद ही राजनैतिक बदलाव की तस्वीर उभर कर सामने आयेगी।

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