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पिछड़ा वर्ग ए और बी आरक्षण का आर्थिक वर्गीकरण पुरी तरह से ग़लत व गैरकानूनी : वर्मा

कृष्ण प्रजापति | June 26, 2018 07:37 PM
कृष्ण प्रजापति
पिछड़ा वर्ग ए और बी आरक्षण का आर्थिक वर्गीकरण पुरी तरह से ग़लत व गैरकानूनी  : वर्मा 
 
कैथल, 26 जून (कृष्ण प्रजापति): लोकतंत्र सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय महासचिव एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रजापति हनुमान वर्मा द्वारा प्रैस में जारी बयान में कहा कि हरियाणा में सरकार में हावी आरक्षण विरोधी अधिकारियों और ताकतों ने पहले से वर्गीरत पिछड़ा वर्ग A एवं B को अब आर्थिक तौर पर बांट दिया है। पिछड़ा वर्ग एवं बी आरक्षण का आर्थिक वर्गीकरण पुरी तरह गलत और गैर कानूनी है व समाज को बांटने वाली है। यह पिछड़ा वर्ग के नेताओं और उसके उच्च अधिकारियों की विफलता भी है।
इन्दिरा साहिनी मामले में उच्चतम न्यायालय ने साफ किया है कि क्रीमी लेयर की परिभाषा व्यक्ति के सामाजिक स्तर के हिसाब से ही होनी चाहिए न कि आर्थिक आधार पर। अदालत ने साफ साफ लिखा है कि अगर कोई मजदूर दूबई या विदेश जाकर ज्यादा तनख्वाह कमाता है तो वह क्रीमी लेयर में नहीं होगा जबकि उतनी ही आजिविका कमाने वाले प्रथम श्रेणी अधिकारी, संविधानिक पदों पर विराजमान व्यक्तियों और उधोगपति प्रोफेसनल अपने उच्च सामाजिक स्तर के कारण क्रीमी लेयर में शामिल होंगे। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग पिछले 25 सालों से सरकार को क्रीमी लेयर के लिए उच्चतम न्यायालय के फैसले के हिसाब से भारत सरकार को राय देता आ रहा है और हरियाणा सरकार भी आज तक भारत सरकार के क्रीमी लेयर की अधिसूचना को मानती रही।
वर्मा ने कहा भारत सरकार के क्रीमी लेयर अधिसूचना अनुसार प्रथम श्रेणी अधिकारी और संविधानिक पदों पर विराजमान व्यक्तियों, आठ लाख रूपए से ज्यादा कमाई करने वाले उधोगपति प्रोफेसनल अपने उच्च सामाजिक स्तर के कारण क्रीमी लेयर में शामिल होंगे। चतुर्थ, तृतीय, द्वितीय श्रेणी के कर्मचारी की सैलरी, खेती करने वाले किसानों और मजदूरों की कमाई को उनके मध्यम, निम्न सामाजिक स्तर के कारण क्रीमी लेयर में नहीं शामिल किया गया है ताकि ज्यादा से ज्यादा पिछड़ा वर्ग के लोग आरक्षण का लाभ उठा सकें।
वर्मा ने कहा अभी कुछ आरक्षण विरोधी अधिकारियों और ताकतें सरकार को बरगलाने में सफल हो गए हैं और पहले से वर्गीरत पिछड़ा वर्ग के लोगों को आर्थिक आधार पर बांट दिया है जो कि पुरी तरह गलत है और नियमों के खिलाफ है। हाल ही में पिछड़ा वर्ग A एवं B के लोगों को आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से भी वर्गीरत किया गया है। क्रीमी लेयर मामले में भारत सरकार द्वारा निर्धारित आठ लाख रूपए की सीमा को हरियाणा में घटाकर छः लाख रूपए कर दिया है और इसमे भी तीन लाख वार्षिक तक कमाने वाले और 3 से 6 तक कमाने वालों की अलग-अलग श्रेणी बना दी गई है। यह पिछड़ा वर्ग के लोगों को बांटने की कोशिश है। यहां हरियाणा सरकार ने साफ नहीं किया है चतुर्थ तृतीय द्वितीय श्रेणी के कर्मचारी की सैलरी खेती करने वालों की कमाई को क्रीमी लेयर में शामिल किया जाएगा या नहीं। यहां ये बताना भी उल्लेखनीय है कि नये आरक्षण एक्ट 2016 में पिछड़ा वर्ग A एवं B के लिए प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी की नौकरी में आरक्षण क्रमशः 11 एवं 6% किया गया था लेकिन आज तक इसे भी लागू नहीं किया गया है।
वर्मा ने कहा पिछडावर्ग को नियमों के खिलाफ आर्थिक रूप से बांटना आरक्षण विरोधी ताकतों की हरियाणा में पिछड़े वर्ग को बांटने की योजना है और इस गलत कार्य को न रोक पाना इसके नेताओं और उच्च अधिकारियों की विफलता और वह उनकी समाज के प्रति उदासीनता हैं।
वर्मा ने कहा अगर महात्मा ज्योतिबा फुले, बाबा साहेब आंबेडकर भी बैरिस्टर बनने के बाद अपनी ही सोचते और समाज को भूल जाते तो आज दलित व पिछड़ा वर्ग की हालत पता नहीं क्या होती। आर्थिक तौर पर पिछड़ा वर्ग का वर्गीकरण पुरी तरह गलत और गैर कानूनी है व पिछड़ा समाज को बांटने वाली है वह इसको तुरंत प्रभाव से रोकना चाहिए, हरियाणा में क्रीमी लेयर की परिभाषा भारत सरकार के क्रीमी लेयर अधिसूचना के अनुसार आठ लाख ही होनी चाहिए और प्रथम, द्वितीय श्रेणी की नौकरी में पिछड़ा वर्ग ए एवं बी का आरक्षण एक्ट 2016  के अनुसार क्रमशः 11 एवं 6% नही असल में ये 16 एवं 11 % होना चाहिए । जो पिछड़ावर्ग के बच्चों के एडमिशन में ये कर्मिलेयर 3/6 लागू नहीं होना चाहिए । हरियाणा में पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, सदस्य व अधिकारी भी पिछड़ा वर्ग या दलित समाज से ही होने चाहिए ताकि आरक्षण विरोधी ताकतें हावी न हो और पिछड़ा वर्ग के हितों की रक्षा की जा सके। अगर सरकार अपना ये तुगलकी फरमान वापिस नहीं लेती तो पिछड़ावर्ग सरकार की ईंट से ईंट बजा देगा 
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