Thursday, January 24, 2019
Follow us on
Haryana

मौत की सवारी बन बच्चों को ढो रही हैं जर्जर स्कूली बस

सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट | July 10, 2018 07:57 PM
सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट

मौत की सवारी बन बच्चों को ढो रही हैं जर्जर स्कूली बस
पिकअप गाडिय़ों में भेड़-बकरियों की तरह ढो रहे हैं बच्चों को, प्रशासन को है बड़े हादसे का इंतजार
निजी विद्यालय महानगरों की तर्ज ले रहे हैं मोटी फीस, सुविधाएं शून्य


सतनाली मंडी (प्रिंस लांबा)।

 

शिक्षा मंत्री के गृहक्षेत्र में प्रशासन सोया कुंभकरणी नींद, नहीं है किसी की परवाह। मौत की सवारी बनकर बच्चों को ढो रही हैं जर्जर स्कूली बसें, क्या यहीं हैं निजी शिक्षण संस्थानों की सुविधाएं? क्षेत्र के निजी स्कूलों में संचालित जर्जर बसों व पिकअप गाडिय़ों में भेड़-बकरियों की तरह बच्चों को ढोया जा रहा है। जिसकी चेकिंग करने की बजाए प्रशासन मूकदर्शक बना बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। इन स्कूलों के मानक पूरे न होने पर भी आरटीए की ओर से किसी भी स्कूल में नोटिस जारी नहीं किए जा रहे हैं जबकि स्कूलों की जर्जर बसों व पिकअप गाडिय़ों को जब्त करने का प्रावधान है।

अगर कानून की माने तो जब तक इन जर्जर बसों के मानक पूरे नहीं होते, तब तक इन खटारा बसों को सडक़ों पर नहीं उतारा जा सकता। परंतु सतनाली क्षेत्र में तो ठीक इसके विपरीत चल रहा है और प्रशासन है कि बच्चों की सुरक्षा की बजाए हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इन स्कूलों में संचालित बच्चों को लाने, ले जाने वाली बसों व पिकअप गाडिय़ों के खिलाफ सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन कोई भी कठोर कदम नहीं उठा रहा है। सतनाली क्षेत्र के निजी स्कूलों की बसें छात्रों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। कानून के हिसाब से तो सामान ढोने वाले वाहनों में तो स्कूली बच्चों को किसी भी सूरत में लाया-ले जाया नहीं जा सकता। अगर कोई भी निजी स्कूल संचालक ऐसा करता है तो गाड़ी इम्पाउन्ड के साथ सजा भी हो सकती है।

क्षेत्र में चल रहे कई निजी स्कूल संचालक भव्य स्कूल ईमारतें बनाकर बच्चों व उनके अभिभावकों को आकर्षित तो कर लेते हैं परंतु उनके पास बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं हैं। ये स्कूल संचालक महानगरों के विद्यालयों की तरह अभिभावकों से मोटी फीस लेकर उनकी जेबें तो ढीली कर रहे हैं परंतु सुविधाओं के नाम पर बिल्कुल शून्य हैं। यहां तक कि बच्चों को सामान ढोने वाले वाहनों, पिकअप गाडिय़ों में भेड़-बकरियों की तरह ढोया जा रहा है। ऐसा नहीं है कि किसी को इस बारे में पता नहीं है। प्रशासन के साथ-साथ अभिभावक भी मूकदर्शक बनें यह सब देख रहे हैं और इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। निजी स्कूलों की इन जर्जर व खटारा बसों में काफी संख्या में खामियां है, जोकि बच्चों की सुरक्षा से संबंधित है। न तो इन बसों में कैमरे लगे हुए हैं और जिन बसों में अगर कैमरे लगे भी हुए हैं तो वे काम नहीं कर रहे हैं, न ही उनमें जीपीएस सिस्टम लागू है। वहीं उनमें स्पीड कंट्रोल करने के लिए स्पीड गवर्नर भी नहीं लगे हुए हैं। इस तरह की किसी भी स्कूली बस को संचालित कैसे किया जा सकता है।
इस बारे में उत्तम सिंह आईएएस महेंद्रगढ़ से बात करनी चाही तो उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

Have something to say? Post your comment
More Haryana News
फतेहपुर बिल्लोच एम्स की शाखा को इंतज़ार अगली सरकार का???
लड़कियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं प्रदीप दहिया।
मांगे राम गुप्ता से समर्थन की अभी भी उम्मीद राजनीतिक दलों को
सीएम के गोद लिए गांव की तस्वीर देखकर आप रह जाएंगे हैरान !
मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में अचानक किया विकास कार्यों का निरीक्षण - अचानक पहुंचे द्वारका एक्सप्रैस-वे के निर्माण की प्रगति को देखने,
जनस्वास्थय विभाग मौन, समस्या सुलझाए कौन
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर किए जाऐगें किसानों के कर्ज माफ : चीमा
विकास के पक्षधर लेकिन पहले हो दुकानदारों की व्यवस्था : संदीप
शीशे गलती से टूटते हैं और रिश्ते गलतफहमियों से-दुष्यंत
इलाके के तस्वीर व तकदीर बदलने का चुनाव है - सुरजेवाला