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शिक्षक नहीं, कैसे हो पढ़ाई, शिक्षा मंत्री के गृहक्षेत्र के इस स्कूल को है शिक्षकों का इंतजार

सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट | July 10, 2018 07:58 PM
सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट

शिक्षक नहीं, कैसे हो पढ़ाई, शिक्षा मंत्री के गृहक्षेत्र के इस स्कूल को है शिक्षकों का इंतजार
साइंस की जगह मजबूरी में आर्ट पढ़ रहे हैं विद्यार्थी
बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा फैल, बेटियों ने लगाई खट्टर सरकार से शिक्षक पूरे करने की लगाई फरियाद


सतनाली मंडी (प्रिंस लांबा)।

 

एक ओर जहां हरियाणा सरकार प्रदेश को शिक्षा का हब बनाना चाहती है। वहीं ऐसे अनेक सरकारी स्कूल हैं, जहां शिक्षक ही नहीं है, जिसके चलते छात्रों को साइंस की जगह मजबूरी में आर्ट की पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिन छात्रों का सपना साइंस पढक़र कुछ बनाना था, वो अब शिक्षा के नाम पर मात्र औपचारिकता ही पूरी कर पा रहे हैं।

प्रदेश तो क्या, अगर शिक्षा मंत्री के गृहक्षेत्र में देखा जाए तो शिक्षा के क्षेत्र के खामियां ही खामियां हैं। न तो बच्चों को सुविधा मिल पा रही है और न ही शिक्षा। क्षेत्र के गांव सुरेहती पिलानियां स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में पिछले वर्ष लगभग 500 विद्यार्थी शिक्षा गृहण कर रहे थे, परंतु स्कूल में शिक्षकों की कमी के चलते अब इस विद्यालय में 450 विद्यार्थी ही रह गए हैं। इन विद्यार्थियों का सपना ऊंची उड़ान भरने का था, लेकिन इनके होंसलों को शिक्षा विभाग की गलत निति ने कुचलकर रख दिया। इस राजकीय उच्च विद्यालय में पिछले डेढ़ वर्ष से वाणिज्य व अर्थशास्त्र, गणित विषय के लक्चरार तथा हिंदी व विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं है। शिक्षकों के अलावा देखा जाए तो यह विद्यालय प्रधानाचार्य की भी कमी के चलते राम भरोसे चल रहा है।

अब आप ही अंदाजा लगा सकते हैं कि यहां बच्चे कैसी शिक्षा ले रहें होंगे और आगे चलकर इनका भविष्य क्या होगा? इस समस्या के चलते अब ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि अगर सरकार समय रहते स्कूल में शिक्षकों की कमी पूरी कर देती है तो ठीक, वरना उन्हें मजबूरन स्कूल को ताला लगाना पड़ेगा। ऐसा नहीं हैं कि इस समस्या को लेकर इन्होंने कभी शिकायत ही न की हो। अब तक जिला शिक्षा अधिकारी, जिला उपायुक्त, शिक्षा मंत्री से लेकर मुख्य मंत्री तक शिक्षकों की कमी को लेकर ग्रामीण फरियाद कर चुके है, लेकिन गूंगी बहरी सरकार है की सुनने का नाम ही नहीं ले रही है।

बच्चों की माने तो स्कूल में गणित व विज्ञान के शिक्षक नहीं होने की वजह से उन्हें विज्ञान की जगह कला संकाय में पढऩा पड़ रहा है। अगर उनके स्कूल में शिक्षक पुरे हों तो वह अच्छे अंक लाकर स्कूल और गांव का नाम रोशन कर सकते हैं। अब देखना होगा की खट्टर सरकार इन बच्चों की फरियाद पर कितना ध्यान देती है या फिर इनका भविष्य अंधकार में ही रहेगा।

 


फोटो कैप्शन: राजकीय उच्च विद्यालय सुरेहती पिलानियां का दृश्य।

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