Monday, December 10, 2018
Follow us on
BREAKING NEWS
30 साल का लड़का प्रदेश की राजनीति में बहुत धमाकेदार एंट्री मार गया ,दुष्यंत ने चाचा अभय को जींद में दी मात कांग्रेस की सरकार आने पर नही रहेगी हल्के मे कोई भी समस्या बाकी : संदीप गर्गपॉजिटिव विचार है खुशहाल जीवन का आधार - ब्रहमाकुमार ओंकार चंदपृथला से जननायक जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द भरद्वाज सेकड़ो गाडी और बसों को लेकर जींद रैली में पहुँचे।सादलपुर-सिवानी रूट पर आज ट्रेनें रहेगी बाधित आम जनता के लिए पर्याप्त ट्रेनें व बसें भी उपलब्ध नहीं करवा पा रही सरकारें, वीआईपी सुविधाओं पर इतना खर्च क्यों व कब तक ?भारत में दो प्रधानमंत्रियों को छोड़कर जितने भी प्रधानमंत्री हुए है वो मुस्लमान ही हुए है:दिनेश भारती बिजली निगमों के लिए दिसंबर माह एक ऐतिहासिक माह : शत्रुजीत कपूर
Entertainment

उम्र के आखिरी पड़ाव में समझ आई प्यार की कीमत, ‘‘द लास्ट डिसीजन’’ने दिया संदेश

राकेश शर्मा | July 22, 2018 05:28 PM
राकेश शर्मा

उम्र के आखिरी पड़ाव में समझ आई प्यार की कीमत, ‘‘द लास्ट डिसीजन’’ने दिया संदेश
------------------
दाम्पत्य जीवन में आई कड़वाहट से लिया ‘‘द लास्ट डिसीजन’’
------------------
कुरुक्षेत्र 22 जुलाई राकेश शर्मा
पति-पत्नी के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, जिसके कारण दाम्पत्य जीवन को खुशी से जीना थोड़ा मुश्किल होने लगता है। ऐसे में या तो अधिकतर दम्पति अपने रास्ते अलग-अलग कर लेते हैं या अपनी जिंदगी को दूसरों के अनुसार जीने का प्रयास करते रहते हैं। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी दम्पति अपने जीवन को किस प्रकार से प्रेम की डगर पर ले आते हैं, ऐसा कुछ दिखाने का प्रयास किया न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने। मौका था नाटक द लास्ट डिसीजन के मंचन का। बारिश के मौसम के चलते हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर की भरतमुनि रंगशाला में आयोजित नाटक द लास्ट डिसीजन का मंचन देखने भारी संख्या में लोग पहुंचे। नाटक का लेखन व निर्देशन युवा रंगकर्मी विकास शर्मा द्वारा किया गया। दो पात्रीय नाटक के माध्यम से पति-पत्नी के जीवन के कुछ अनसुलझे पहलूओं को सुलझाने का प्रयास किया गया। नाटक के दौरान मंच संचालन डा. मोहित गुप्ता ने किया। लगभग 75 मिनट की अवधि के नाटक में दिल्ली शहर की कहानी को दिखाने का प्रयत्न किया गया, जिसमें व्यस्तताओं के कारण पति मोहन अपनी पत्नी माध्वी को न तो ठीक से प्यार दे पाया और न ही पत्नी होने का दर्जा। नाटक की शुरुआत दम्पति के बुढ़ापे से होती है, जहां उम्र के आखिरी पड़ाव में पहुंचने पर पति को एहसास होता है कि वह अपनी पत्नी को उतना प्यार नहीं दे पाया, जितने प्यार की वह हकदार है। तब पति अपनी पूरी जिंदगी को याद करता है। नाटक की कहानी तुरंत वर्तमान से भूत की ओर मुड़ जाती हैै। दृश्य बदलते ही लाईब्रेरी का दृश्य दर्शकों के सामने आता है, जहंा मोहन लाईब्रेरी में जाकर अक्सर माध्वी को देखता था। उसे माध्वी से प्यार हो जाता है। माध्वी भी मोहन की बातों पर फिदा होकर उससे शादी करने का निर्णय ले लेती है और देानों शादी के बंधन में बंध जाते है। शादी होने के बाद उनकी जिंदगी एक अलग ही मोड़ ले लेती है और मोहन अपने आॅफिस के कारण घर-परिवार से दूर होने लगता है। अपनी बेटी को भी मोहन बोर्डिंग में भेज देता है, जिसके कारण माध्वी बिल्कुल अकेली हो जाती है। मोहन अपने गुस्से के कारण अक्सर माध्वी पर हाथ उठाना शुरु कर देता है। लेकिन माध्वी चुपचाप सब कुछ सहन करती रहती है। जब कहानी अपने अंत की ओर बढ़ती है तो मोहन को खुद पर पछतावा होता है कि उसने कभी भी अपनी पत्नी को उतना प्यार नहीं दिया जितना प्यार उसे देना चाहिए था। अंत में मोहन माध्वी को उसका हक देने का अंतिम फैंसला करता हैै। केवल दो पात्रीय नाटक में साजन कालड़ा और पारुल कौशिक द्वारा निभाए गए अलग-अलग उम्र के किरदार लोगों को बांधने में कामयाब रहे। नाटक में वर्तमान और भूत साथ-साथ चलते रहे। पलक झपकते ही मंच पर सेट और कलाकारों की वेशभूषा में होता बदलाव दर्शकों को अचम्भित कर रहा था। सेट में लगा वाशबेसिन ओर उसमें से निकलते पानी ने लोगों को अपनी ओर खींचने में पूरा योगदान दिया। नाटक की विषय-वस्तु इतनी प्रभावशाली थी कि रंगशाला में बैठे दर्शक नाटक को अपने जीवन से जुड़ा हुआ पा रहे थे। जहां एक ओर प्रेम दर्शाते दृश्य लोगों को रोमांचित कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर भावुक कर देने वाले दृश्यों ने भी दर्शकों की आंखे भिगोने में कसर नहीं छोड़ी। पति के अत्याचार बर्दाश्त करती माध्वी का किरदार निभा रही पारुल कौशिक के अभिनय ने जहां अलग-अलग समय की महिला को दिखाने प्रयास किया, वहीं मोहन के किरदार में साजन कालड़ा ने भी अपनी उम्र से तीन गुना बड़े व्यक्ति का किरदार निभाकर भरपूर वाहवाही बटौरी। नाटक के माध्यम से लेखक व निर्देशक विकास शर्मा ने आमजीवन से जुड़ी घटनाओं को दर्शकों के सामने लाकर खड़ा कर दिया। नाटक का सेट, संगीत तथा लाईट्स ने भी नाटक को बेहतरीन बनाने में अपना पूरा सहयोग दिया। नाटक में जहां मंच पर केवल दो कलाकारों ने 75 मिनट तक लोगों को उबने नहीं दिया वहीं मंच के पिछे कार्य कर रहे कलाकार निकेता शर्मा, नितिन गम्भीर, कुलदीप शर्मा, आकाशदीप, चंचल शर्मा, नितिन तथा अनूप ने भी नाटक को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। प्रकाश व्यवस्था मनीष डोगरा ने सम्भाली तथा संगीत संचालन गौरव दीपक जांगड़ा का रहा। रुप सज्जा नरेंद्र कश्यप द्वारा की गई। नाटक की दमदार प्रस्तुति उपरांत अधिकतर दर्शक अपने स्थान पर खड़े होकर तालियां बजाते नजर आए। नाटक के अंत में मैक के क्षेत्रीय निदेशक संजय भसीन ने विकास शर्मा को सम्मानित किया तथा दर्शकों को सम्बोंधित करते हुए कहा कि आज के समय में पति-पत्नी अपने परिवार को चलाने के लिए किसी भी प्रकार का समझौता करना पसंद नहीं करते। पति-पत्नी के रिश्ते में आई खट्टास का उनके बच्चों पर भी असर दिखने लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिकता के रंग में डूबे युवा प्यार के अर्थ को नहीं समझते। आज के युवा प्रेम को भुलकर केवल आकर्षण की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में नाटक के माध्यम से दिया गया संदेश समाज में बदलाव लाने में सहयोग देगा। इस मौके पर अजमेर सिंह, धर्मपाल गुगलानी, सीमा काम्बोज, मनोज कुमार, शिवकुमार किरमच, डा. मधूदीप सिंह, नरेश सागवाल, चंद्रशेखर शर्मा, सतीश कालड़ा, अजय कुमार शर्मा, निशी मंगोतरा, अमन सैनी, योगेश कुमार योगी सहित भारी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।

Have something to say? Post your comment
More Entertainment News
20 साल बडे जीजा के साथ करवाई रही थी 15 वर्षीय नाबालिग लडक़ी की शादी, शादी रूकी
फिल्में दिलाऐंगी मुल्तानी भाषा को अलग पहचान : रमेश मल्हौत्रा
मेहनत पहुंचाएगी टीवी के परदे पर : बीरबल खोसला
जर्मनी के कलाकारों के मुख से भी निकला एंडी हरियाणा
मशहूर हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा कल कैथल में
दुनिया में अश्लील पोस्टर नहीं लगेंगे। अश्लील किताबें नहीं छपेगी
स्कूलो में बच्चों की एक कलास थियेटर की भी लगनी चाहिए- अभिनेता यशपाल शर्मा।
बहु ने कहा-मेरे ससुर ने मुझे वो दिया जो पति नही दे पाया, सुहागरात से अबतक ससुर ही मेरे काम आए…?
नचले इंडिया 3 के नेशनल लेवल का हुआ आयोजन।
हरियाणवी हास्य कलाकार झंडू ने जागरण में जमाया रंग