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अमेठीः माननीय मंत्री जी कहते है गॉवों का होगा विकास, प्रशासन कह रहा है मेरे पास नहीं बजट, देखिए विशेष रिपोर्ट

सुरजीत यादव | August 01, 2018 06:44 PM
सुरजीत यादव

सरकार के दावे प्रशासन के कारनामें में बड़ा फर्क, आईयें जानते हैं क्या है अन्तर ?
सरकार कहती है गॉवों का विकास होगा, प्रशासन कहता है बजट नहीं

अमेठी। आखिर सरकार के दावा और प्रशासन के कारनामा में इतना अधिक फर्क क्यों हैं यह अयत्न्त गम्भीर सवाल है ? सरकार कुछ, कहती है तो प्रशासन कुछ अलग ही राग अलापती है आईयें आपको एक रिपोर्ट के माध्यम से बताते हैं कि क्या है सरकार दावा और प्रशासन का कारनामा

स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण-2018 के तहत जवाहर नवोदय विद्यालय गौरीगंज में आयोजित कार्यशाला में उपस्थित जनपद की सभी 682 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों को सम्बोधित करते हुए -प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि ग्राम प्रधान के पूर्ण सहयोग के बगैर गांव का सम्पूर्ण विकास सम्भव नहीं है, क्योंकि गांव की जनता के द्वारा उन्हें विकास के लिए चुना जाता है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान इस स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान के अन्तर्गत सबसे पहले गांव में साफ-सफाई, आम जनता के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराते हुए फिर गांव के सम्पूर्ण विकास का संकल्प लें। उन्होंने बताया कि इस अभियान में बेहतर कार्य करने वाले ग्राम प्रधानों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित भी किया जायेगा।


लेकिन हो रहा सब इसके उल्टा आपको बता दें हर मींटिग और कार्यशाला में माननीय मंत्री जी कहते है गॉव स्वच्छ होगें, गॉवों में पेयजल की स्वच्छ व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन प्रशासन कहता है हमारे पास बजट नहीं है । आपको दिखाते है एक छोटी रिपोर्ट अमेठी जनपद के विकास खण्ड बाजार शुक्ल अन्तर्गत एक्काताजपुर निवासी सुरजीत यादव ने जनसुनवायी पोर्टल के माध्यम से प्रशासन अर्थात् जिला अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र भेजा था कि मेरे गॉव 100 मीटर रास्ता ठीक कराया जाय, कारण एक दर्जन घरों के लोगों को कीचड़ के रास्ते से आना जाना पड़ता है दर्जनों बच्चों को उसी कीचड़ से स्कूल आना जाना होता बच्चों को गिरकर चोटिल भी होना पड़ता है। अतः खड़ण्जा /नाली की बनवा दिया जाय अगर यह सम्भव न हो तो मिट्टी सोलिंग ही करवा दिया जाय। जिसमें मात्र खर्च 10 हजार से 20 हजार के अन्दर ही आयेगा। लेकिन प्रशासन से जबाब मिला हमारे पास बजट नहीं है। सोचनें की बात ये है कि प्रशासन के पास 100 मीटर रास्ता बनवाने के लिए बजट नहीं है तो क्या माननीय मंत्री जी हर मीटिंग में सिर्फ दिखावा और जनता हो गुमराह करने के लिए ही ऐसे दिश निर्देश एवं भाषण देते है। फिरहाल यह तो चिन्तनीय विषय है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि हर गांव की कार्ययोजना में बेहतर सफाई व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, जलभराव होने पर निकासी की व्यवस्था, कच्ची गलियों को पक्का तथा पक्की गलियों में टूट-फूट की मरम्मत तथा गांव के प्रत्येक पात्र व्यक्ति को जनकल्याणकारी योजनाओं में सभी प्रकार की पेंशन, आवास, खाद्यान्न की उपलब्धता के साथ गांव का आदर्श विकास करायें। उन्होंने कहा कि जो लोग पात्रता की श्रेणी में होते हुए लाभ से वंचित रह गये हैं उनके लिए पुनः एक दिन समर्पण तथा साफ नीयत के साथ अपने गांव के हर व्यक्ति को संतृप्त करने का संकल्प लें।
 
लेकिन क्या सरकारी स्कूलों में जलभराब की समास्या प्रशासन के नजर में नहीं है ग्रामीण समय-समय पर प्रशासन को अवगत भी कराते हैं स्थानीय पत्रकार भी समाचार पत्रों के माध्यम से सरकार एवं प्रशासन को अवगत कराते हैं लेकिन प्रशासन है तो अमल में नहीं लाता है। आपकों बता दें कि महोना पश्चिम गंजगड़ौली गॉव के सैकड़ों दलित बस्ती के ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से 26 मई 2018 को पेयजल के लिए एक हैण्डपम्प के लिए मांग किया था परन्तु अभी तक उस गॉव को पेयजल की समास्या अमल में नहीं लायी गई। ग्रामीण चिल्लाते रहें साब हैण्डपम्प नहीं लगा तो हम सब प्यास से मर जायेगें । माननीय मंत्री जी मंच और प्रेसवर्ता में चिल्लाते रहे कि गॉवों शुद्धपेय जल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाय। लेकिन प्रशासन है के पास या तो बजट नहीं है या प्रशासन सरकार की योजनाओं को अमल में लाना नहीं चाहती है।  

वहीं जिलाधिकारी शकुन्तला गौतम ने कार्यशाला में उपस्थित ग्राम प्रधानों से कहा स्वच्छ शौचालय निर्माण तथा उनके उपयोग करने के संबंध में कहा कि अपने गांव को बीमारियों से मुक्त करने के लिए शौचालयों का शत-प्रतिशत उपयोग करें, जिससे खुले में शौचमुक्त गांवों की संख्या में अच्छी वृद्धि हो और जनपद की स्थिति प्रदेश में अब्बल रहे। लेकिन जब गॉव, बस अड्डा, सड़क आदि पर जल भराव की समास्या रहेगी तो क्या बीमारियॉ नहीं पनपेंगी, पनपेंगी लेकिन स्कूल में जल निकासी समुचित व्यवस्था नहीं होने से तो बच्चे बीमार होगें ही, तो शासन व प्रशासन इन उपजती समास्याओं पर ध्यान क्यों नहीं देती यह बहुत बड़ा सवाल है।

   

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