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जब नए सांसदों को राजनीतिक शुचिता का पाठ पढाने हरियाणा आए वाजपेयी

रणबीर रोहिल्ला | August 17, 2018 06:57 PM
रणबीर रोहिल्ला

जब नए सांसदों को राजनीतिक शुचिता का पाठ पढाने हरियाणा आए वाजपेयी
सूर्या साधना केंद्र, झिंझौली में आयोजित हुआ था तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग
13 महीने चली सरकार की मजबूत नींव चाहते थे अटल बिहारी वाजपेयी

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत।

सरकारें आएंगी, सरकारें जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगडेंगी, लेकिन देश का लोकतंत्र जिंदा रहना चाहिए। भारत का लोकतंत्र अमर रहना चाहिए। महज 13 दिन की सरकार चलाने के अनुभव के बाद भाजपा के शिखर पुरूष अटल बिहारी वाजपेयी की रूह से निकले इन शब्दों पर वह हमेशा अटल रहे। वर्ष 1998 में एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद पर आसीन होकर अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली से सटे सोनीपत में आए तो अपनी पार्टी के नए सांसदों को राजनीतिक शुचिता का पाठ पढाने के लिए।
वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहर लाल के मीडिया सलाहकार राजीव जैन उन दिनों तत्कालीन मुख्यमंत्री बंसीलाल के मीडिया सलाहकार होते थे। वीरवार को दिल्ली में भाजपा के शिखर पुरुष एवं राष्ट्र सेवा में तल्लीन रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए निकले भावुक राजीव जैन बोले कि वाजपेयी जी ने अपने जीवन में इतनी चिंता सरकार की नहीं की, जितनी उनको राजनीतिक शुचिता की थी। 13 दिन की सरकार चलाने के कडवे अनुभव के बाद वर्ष 1998 में पुन: केंद्र में प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी अपनी सरकार की नींव को मजबूत करना चाहते थे, हालांकि यह सरकार भी 13 महीने ही चल पाई थी। उन्होंने भाजपा की टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे सदस्यों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग दिल्ली के सटे सोनीपत के झिंझौली में आयोजित किया। सूर्या साधना केंद्र, झिंझौली में नए सांसदों के लिए प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पूरा एक दिन का समय निकाला और उनकी विचारधारा और संबोधन का केंद्र बिंदु केवल राजनीतिक शुचिता रही। उनका मानना था कि आपसी राजनीतिक हितों की पूर्ति से देश का बडा नुकसान हो रहा है। बहुत से देशों के उदाहरण थे, जो भारत के बाद आजाद हुए और तत्कालीन दौर में भारत से अच्छी तरक्की कर रहे थे। आपसी हितों को छोडकर राष्ट्रसेवा की ओर बढने तथा देश को सशक्त बनाने के सपने को पूरा करने के लिए वाजपेयी ने सांसदों को निज हित का राष्ट्र हित में त्याग करने का आह्वान किया था। राजनीतिक शुचिता उनके जीवन चरित्र की रीढ थी, यही कारण है कि उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम बनाने और अन्य लोकसभा सदस्यों को भी इस राह पर अग्रसर होने की राह दिखाई और पथ प्रदर्शक की अहम भूमिका निभाई।

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