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घरौंडा क्षेत्र में वायरल ने पसारे पांव मात्र 4 डॉक्टरों के सहारे चल रहा सीएचसी, जबकि 13 डॉक्टर्स की जरूरत

प्रवीण कौशिक | September 14, 2018 01:42 AM
प्रवीण कौशिक

घरौंडा क्षेत्र में वायरल ने पसारे पांव मात्र 4 डॉक्टरों के सहारे चल रहा सीएचसी, जबकि 13 डॉक्टर्स की जरूरत
सरकार के दावों की खुल रही पोल
प्राइवेट हस्पतालों में लूटने को मजबूर है गरीब मरीज।
घरौंडा : प्रवीण कौशिक
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घरौंडा अक्सर किसी कमी के कारण सुर्ख़ियों में रहता आया है। और सरकार सभी सुविधाएँ होने का दावा अक्सर करती आई है। लगभग डेढ़ लाख लोगो के स्वास्थ की चिन्ता के लिए क्षेत्र में 9 में से मात्र 4 डॉक्टर्स है। गांव की पीएचसी में इन्ही में ड्यूटी लगती आई है। बार बार विभाग को सूचित करने के बाद भी विभाग की नींद नही खुल रही। आपरेशन की सुविधा भी यहां बन्द कर दिए जाने से रोष है।

क्षेत्र में वायरल ने अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। वायरल मरीजों की संख्या बढ़ने के बाद अस्पताल में डॉक्टरों का टोटा है। मौजूदा स्थिति यह है कि 600 से 700 वाला सीएचसी मात्र तीन डॉक्टरों के सहारे हैं। जबकि सीएचसी के अंतर्गत आने वाली बरसत, चौरा और गगसीना पीएचसी में मरीजों को चेक करने के लिए कोई डॉक्टर ही नही है।
वहीं दूसरी ओर कुटेल की पीएचसी को मात्र एक डॉक्टर ऑपरेट कर रहा है। सीएचसी के डॉक्टरों के मुताबिक सीएचसी व पीएचसी में तेरह सीटें खाली हैं। खास बात यह है कि वायरल बुखार का सीजन शुरू हो चुका है, ऐसे में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों कमी ने मरीजों का दर्द ओर भी ज्यादा बढ़ा दिया है। मजबूरन मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में लुटना पड़ रहा है। यमुना क्षेत्र में बुखार के ज्यादा केस आ रहे हैं, लेकिन उस क्षेत्र की पीएचसी में डॉक्टरों की ही नियुक्ति नही है। इस कारण उन मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
घरौंडा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पसरा सन्नाटा :
अस्पताल में वायरल बुखार के मामले बढ़े हैं। सीएचसी व पीएचसी में 13 डॉक्टरों की जरूरत है, लेकिन कुछ डॉक्टरों का तबादला हो गया है तो कुछ डेपुटेशन पर हैं। सीएचसी व पीएचसी में चार डॉक्टर हैं। डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए कई बार पत्र व्यवहार किया गया है।

डॉ. कुलबीर सिंह, एसएमओ, सीएचसी घरौंडा।

सीएचसी के अधीन आने वाली पीएचसी गगसीना, चौरा व बरसत में डॉक्टर ही नही है। गगसीना, चौरा व बरसत के ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं देने का दावा करती है लेकिन धरातल पर हालात कुछ ओर ही है। कहीं एकाध अस्पताल में डॉक्टर हैं तो उस पर काम का इतना बोझ होता है कि वह डेपुटेशन करवा लेता है।
यमुना क्षेत्र में दो पीएचसी, दोनों बिना डॉक्टर के
जब भी डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड या वायरल के केस होते है तो यमुना क्षेत्र में सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। यमुना क्षेत्र में डेढ़ दर्जन के आस-पास गांव हैं। गांवों की आबादी के अनुसार सरकार ने चौरा व बरसत में पीएचसी बनाई है। विडंबना यह है कि इन दोनों ही पीएचसी में किसी भी डॉक्टर की तैनाती नही है। पीएचसी में डॉक्टर ना होने से मरीजों को अपने इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है।

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