Thursday, October 18, 2018
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हरियाणा में सता का फाईनल बेशक दूर लेकिन सेमीफाईनल करीब,निगाहें अरविन्द केजरीवाल के इस दौरे पर टिकी

राजकुमार अग्रवाल | September 19, 2018 03:53 AM
फ़ाइल फोटो
राजकुमार अग्रवाल

हरियाणा में सता का फाईनल बेशक दूर लेकिन सेमीफाईनल करीब


अरविन्द केजरीवाल 30 सितम्बर को आ रहे हैं जीन्द, सभी की निगाहें अरविन्द केजरीवाल के इस दौरे पर टिकी


जींद :

हरियाणा में सता का फाईनल बेशक दूर है लेकिन लगता है सेमीफाईनल आ गया है। विधायक हरिचंद मिढ़ा के निधन के बाद जीन्द में उपचुनाव के हालात पैदा हो गए हैं अगर ऐसा होता है तो यह उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ करेगा। जहां प्रदेश की तीनों प्रमुख पार्टियां भाजपा, इनेलो और कांग्रेस के सामने इस चुनाव में जीत हासिल करने की बड़ी चुनौतियां हैं वहीं इस बार अगर आप पार्टी चुनाव में कुदती है तो इन तीनों पार्टियों के समीकरण बिगड़ते देर नहीं लगेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का 30 सितम्बर का जीन्द दौरा आगामी उपचुनाव की संभावनाओं को देखते हुए अहम माना जा रहा है।
जीन्द सीट शहरी सीट मानी जाती रही है ऐसे में शहरी सीट का ठप्पा लेकर चल रही भाजपा के लिए इनेलो के खाते वाली इस सीट पर जीत हासिल करना कम चुनौती पूर्ण नहीं होगा भले ही जीत-हार से बीजेपी सरकार पर प्रत्यक्ष तौर पर कोई असर नहीं पडने वाला लेकिन उपचुनाव के परिणाम भविष्य की राजनीति में बदलाव ला सकते हैं। ऐसे में भाजपा इस सीट को जीतने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी। जीन्द से भाजपा की टिकट पर मुख्यमंत्री के निजी सचिव राजेश गोयल, प्रदेश महासचिव जवाहर सैनी और सुरेन्द्र बरवाला का नाम सुर्खियों में है। इसके अलावा आधा दर्जन से ज्यादा नेता भी लाईन में हैं। सुनने में तो यह भी आ रहा है कि इनेलो के विधायक रहे स्व. हरिचंद मिढ़ा के बेटे कृष्ण मिढ़ा भी भाजपा से किस्मत अजमा सकते है। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल जब से हरिचंद मिढ़ा के अंतिम संस्कार में शामिल हुए तब से तो ये चर्चाएं और भी गरम हैं।
करीब 15 वर्षो से सत्ता से दूर इनेलो ने सता वापसी के लिए बसपा से हाथ मिलाया है। इसके बाद भी इनेलो के लिए बीजेपी राज में जीन्द से सीट निकालना इतना आसान नहीं होगा। पिता और भाई के जेल जाने के बाद से लगातार पार्टी की कमान संभाल रहे अभय सिंह चौटाला यह अच्छे से जानते है कि अगर जरा सी भी ढील हुई तो जीन्द की सीट हाथ से जाते देर नहीं लगेगी। इनेलो अपनी सीट बचाए रखने के लिए कृष्ण मिढ़ा को मैदान में उतार सकती है। एक तो यह है कि कृष्ण मिढ़ा के पिता लगातार दो बार यहां से विधायक रहे, दूसरा यह है कि कृष्ण मिढ़ा के पिता के निधन से सहानुभूति की लहर भी काम आ सकती है। अगर कृष्ण मिढ़ा भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ते हैं तो ऐसी स्थिति में कुरूक्षेत्र युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ए के चावला को भी चुनाव लड़ाया जा सकता है। यूवा इनेलो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश गिल, इनेलो नेता अशोक लीलू, व्यापार प्रकोष्ठ के जिला प्रधान सतीश जैन इत्यादि के नाम भी चर्चा में हैं।
लगातार 10 वर्षो तक प्रदेश में राज कर चुकी कांग्रेस जीन्द से बांगर बेल्ट के जरिये सता की सीढियां चढना चाहेगी। कांग्रेस मानती है कि अगर इस बार उपचुनाव में इनेलो के गढ़ जीन्द में बाजी मार ली गयी तो फिर हरियाणा के आम चुनाव में सता पर काबिज होना आसान हो जाएगा। यहां कांग्रेस में टिकट के दावेदारों की लंबी लाईन लगी है जहां तंवर गुट से प्रमोद सहवाग, रणदीप गुट से सुधीर गौतम अपनी अपनी दावेदारी जता रहे हैं वहीं हुड्डा ग्रुप की तरफ से बलजीत रेढू, बलराम कटवाल और महावीर कम्प्यूटर का नाम लाईन में है। हुड्डा ग्रुप यहां से किसी वैश्य समाज के नेता को मैदान में उतारना चाहती है ऐसे में पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता के बेटे महावीर गुप्ता, बृज मोहन सिंगला के बेटे अंशुल सिंगला व अग्रवाल समाज के अन्य कईं नेता लाईन में हैं।
अभी तक आम आदमी पार्टी हरियाणा में मुकाबले में कहीं नजर नहीं आ रही थी लेकिन जिस तरीके से अरविन्द केजरीवाल ने पिछले दिनों दिल्ली में अपने निवास पर हरियाणा के पत्रकारों को बुलाकर अपनी बात रखी और कहा वे इस बार पूरे जोर शोर से हरियाणा के चुनावी मैदान में उतरेंगे। ऐसे में लग रहा है कि अगर आम आदमी पार्टी ने भी जीन्द के संभावित उप चुनाव में अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा तो भाजपा, कांग्रेस और इनेलो तीनों के समीकरण बिगड़ते दिखाई देंगे। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल 30 सितम्बर को जीन्द आ रहे है। इस दिन वे अग्रवाल समाज के एक राज्य स्तरीय समारोह में शिरकत करेंगे। अब सभी की निगाहें अरविन्द केजरीवाल के इस दौरे पर टिकी है। वैसे तो यह समारोह एक सामाजिक समारोह है लेकिन केजरीवाल के इस आगमन को हरियाणा की राजनीती से जोड़ कर देखा जा रहा है अगर केजरीवाल इस दिन जीन्द उपचुनाव में आप पार्टी के लडने की घोषणा करते हैं तो निसंदेह यह घोषणा भाजपा, कांग्रेस और इनेलो तीनों के लिए खतरे की घंटी साबित होगा। आप की टिकट के लिए वैश्य समाज के कुछ नेताओं के नाम जोर शोर से सामने आ रहे हैं।
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उपचुनाव होगा कि नहीं ?
इस बार उपचुनाव आम चुनाव से पहले होगा या नहीं इस बारे में हमने जीन्द के चुनाव कार्यालय में बातचीत की। यहां के चुनाव कार्यालय के रवि शंकर का कहना है कि जीन्द के विधायक हरिचंद मिढा़ के निधन की सूचना चंडीगढ़ मुख्यालय को भेज दी गई है। चुनाव होगा कि नहीं यह चुनाव आयोग तय करेगा।
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क्या कहना है संभावित उम्मीदवारों का
1. इनेलो से कृष्ण मिढ़ा का कहना है कि अगर उपचुनाव होता है तो पिता के अधूरे सपनों को लेकर मैदान में उतरेंगे। मौका मिला तो जीन्द के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगे।
2. इनेलो से ही प्रदीप गिल का कहना है कि विकास के मुददे पर जनता के बीच जाऐंगे। बसपा से गठजोड़ का फायदा मिलेगा। सौ फिसदी चुनाव हम जीतेंगे।
3. कांग्रेस से प्रमोद सहवाग का कहना है कि कांग्रेस में कोई गुटबाजी नहीं है। उपचुनाव में पूरी कांग्रेस एक खड़ी नजर आएगी। मेडिकल कालेज, यूनिवर्सिटीज, विकास के मुददे को लेकर चुनाव लड़ेगे।
4. पूर्व मंत्री मांगे राम गुप्ता के बेटे महावीर गुप्ता का कहना है कि उपचुनाव का कोई औचित्य नहीं। लाखों रूपये खर्च होंगे और साथ में समय की बर्बादी। आम चुनाव नजदीक हैं।
5. कांग्रेस से महावीर का कहना है कि हमारा मुकाबला इनेलो से है। भाजपा कहीं टक्कर में नहीं है। अगर इस बार उपचुनाव हुए तो कांग्रेस ही बाजी मारेगी।
6. भाजपा नेता जवाहर सैनी का कहना है कि भाजपा का किसी से कोई मुकाबला नहीं। चार साल में हमने जितना काम किया उतना काम तो पिछले 50 साल में भी नहीं हुआ। जनता विकास के नाम पर वोट देगी।
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जीन्द में आज तक कौन जीता कौन हारा
1967 में दयाकिशन अपने प्रतिद्वंदी आई सिंह को हराकर एमएलए बने।
1968 में फिर चुनाव हुए और दयाकिशन अपने प्रतिद्वंदी शंकर दास को हराकर विजयी हुए।
1972 में दल सिंह विधायक बने उन्होंने दयाकिशन को मात दी।
1977 में मांगे राम गुप्ता प्रताप सिंह को हराकर एमएलए बने।
1982 में बृजमोहन सिंगला मांगे राम गुप्ता को हराकर एलएलए बने।
1987 में परमानदं मांगे राम गुप्ता को हराकर एमएलए बने।
1991 में मांगे राम गुप्ता टेकराम को हराकर विजयी हुए।
1996 में बृज मोहन सिंगला ने मांगे राम गुप्ता को हराया।
2000 में मांगे राम गुप्ता गुलशन लाल को हराकर एलएलए बने।
2005 में मांगे राम गुप्ता एक बार फिर एमएलए बने। उन्होंने सुरेन्द्र सिंह को हराया।
2009 में डा. हरिचंद मिढ़ा विधायक बने। उन्होंने मांगे राम गुप्ता को हराया।
2014 में डा. हरिचंद मिढ़ा विधायक बने। उन्होंने सुरेन्द्र सिंह को हराया

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