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दूसरों को रोशनी देने वाले बिजली कर्मचारी स्वयं भय के सांये में रहने को मजबूर, कभी-भी हो सकता है बड़ा हादसा

September 29, 2018 07:04 PM
सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट

सतनाली 132 केवी पावर हाउस के जर्जर आवासीय क्वार्टर दे रहे हैं हादसों को न्यौता
दूसरों को रोशनी देने वाले बिजली कर्मचारी स्वयं भय के सांये में रहने को मजबूर, कभी-भी हो सकता है बड़ा हादसा


सतनाली मंडी (प्रिंस लांबा)।

 

प्रदेश भर में जहां हरियाणा सरकार बिजली विभाग को आधुनिक इमारतों व हाइटेक उपकरणों से अपडेट करने में लगी हुई है, वहीं हरियाणा बिजली प्रसारण निगम के अधीन आने वाले कस्बा स्थित 132 के.वी. पावर हाउस की जर्जर इमारतें कुछ और ही बयां कर रही हैं। पावर हाउस का जर्जर भवन व आवासीय क्वार्टरों के हालात देखकर सरकार के सारे दावे फैल होते दिखाई दे रहे हैं। सभी के घरों को प्रकाशमय करने वाले बिजली विभाग के कर्मचारी स्वयं भय के सांये में काम करने को मजबूर हैं। पावर हाउस में कार्यरत कर्मचारियों के निवास हेतु बनाए गए आवासीय क्वार्टर काफी वर्ष पुराने होने के कारण जर्जर हालात में पहुंच चुके हैं।

काफी वर्ष पहले बने सतनाली पावर हाउस की जर्जर इमारतों में किसी भी समय कर्मचारियों के साथ बड़ा हादसा हो सकता है। पावर हाउस भले ही लगभग 40-45 वर्ष पुराना हो चुका है, लेकिन यहां समस्याओं की कमी की जगह इजाफा ही होता रहा है। जर्जर इमारत और हावी अव्यवस्थाओं के चलते कर्मचारियों का यहां रहना व कार्य करना किसी सजा से कम नहीं हैं। पावर हाउस के अंतर्गत आने वाले आवासीय क्वार्टर, जिनकी जर्जर हालत के चलते यहां सब डिवीजन कार्यालय बना दिया गया। उनकी स्थिति सुधरने की बजाए बद से बदतर होती जा रही है। जहां कभी इन आवासीय क्वार्टरों की दीवारें गिर जाती है तों वहीं छतों से टपकता बारिश का पानी व नीचे गिरता प्लास्टर भी कर्मचारियों के होश उड़ाए हुए है कि किसी दिन जर्जर छतें हादसे का सबब न बन जाएं। क्वार्टरों के जर्जर हालात के कारण उनमें झाड़-झंखाड़ तक उग आए हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि दूसरों को रोशनी देने वाले बिजली कर्मचारी स्वयं जान हथेली पर लेकर अंधकार में कार्य करने को मजबूर हैं।

बीजेपी सरकार पर टिकी थी ग्रामीणों की आश:
इस बारे में ग्रामीणों ने कहा कि जब भाजपा सरकार सत्ता में आई तो उनमें एक आश जगी थी कि सतनाली में वर्षों पहले 33 के.वी. पावर हाउस बनाया गया था, जिसको इनेलो सरकार द्वारा 132 के.वी. तो कर दिया गया परंतु सब डिवीजन नहीं बनाया गया, जिसके कारण लोगों को बिजली संबंधी छोटे-छोटे कार्यों के लिए 70 से 80 किलोमीटर दूर महेंद्रगढ़-नारनौल के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उनसे तो छूटकारा मिलेगा परंतु 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो सब डिवीजन बना और न ही जर्जर इमारतों की सूध ली गई। जिस कारण इन आवासीय क्वार्टरों के गिरने के भय से कर्मचारी इन्हें छोडक़र किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।

क्या कहते बिजली विभाग के एक्शियन व एसएससी?
इस बारे में हरियाणा बिजली प्रसारण निगम के एक्शियन सुरेश यादव ने बताया कि मेरे पास महेंद्रगढ़ से सतनाली पावर हाउस के जर्जर आवासीय क्वार्टरों की कोई सूचना नहीं आई है। महेंद्रगढ़ एसएससी द्वारा किसी भी पावर हाउस में कार्य के दौरान आ रही समस्याओं की सूचना रेवाड़ी दी जाती है, अगर वहां से कोई भी सूचना मिलती है तो जल्द से जल्द उसका निवारण किया जाएगा।

एसएससी महेंद्रगढ़ राकेश ने बताया कि इन आवासीय क्वार्टरों को विभाग द्वारा कंडम घोषित किया जा चुका है, इनकी जगह नए आवास बनाए जाएंगे, जिस बारे में कई बार रेवाड़ी सूचना दी जा चुकी है। अब नए आवास कब बनेंगे, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है क्योंकि यह कार्य एक्शियन के अधीन आता है।

 


फोटो कैप्शन: जर्जर आवासीय क्वार्टरों का दृश्य।

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