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प्रदेश के चर्चित मंढिय़ाली गोलीकांड में शहीद हुए किसानों को दी श्रद्धांजलि

October 10, 2018 06:12 PM
सतनाली से प्रिंस लांबा की रिपोर्ट

प्रदेश के चर्चित मंढिय़ाली गोलीकांड में शहीद हुए किसानों को दी श्रद्धांजलि
1997 में बिजली-पानी की मांग कर रहे दो दर्जन से अधिक गांव के किसानों पर तत्कालीन मुख्यमंत्री बंशीलाल सरकार ने चलवा दी थी गोलियां


सतनाली मंडी (प्रिंस लांबा)।

 

हर वर्ष की भांति इस बार भी मंढिय़ाली कांड में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि देने के लिए बुधवार को किसान संघर्ष समिति द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। ज्ञात हो कि प्रदेश में बिजली-पानी की समस्या को लेकर समय-समय पर विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में अनेक आंदोलन हो चुके हैं, परंतु इन्हीं समस्याओं को लेकर सतनाली क्षेत्र के गांव मंढिय़ाली में भी इस तरह का एक आंदोलन पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंशीलाल की सरकार में हो चुका है। यह आंदोलन आज भी मंढिय़ाली कांड के नाम से जाना जाता है। आज भी पुलिस की गोलियों के सामने असहाय किसानों का मंजर याद कर क्षेत्रवासियों की आंखें नम हो जाती हैं तथा इस कांड में शहीद हुए किसानों को याद करने के लिए गांव बारड़ा की शहीद स्मारक पर हर वर्ष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है।

गौरतलब है कि सन् 1997 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ. बंशीलाल की सरकार में सतनाली क्षेत्र के गांव बारड़ा, नांवा, सोहड़ी, बासड़ी, श्यामपुरा, सतनाली, सुरेहती पिलानियां, सुरेहती मोडियाना, सुरेहती जाखल, डालनवास, गादड़वास, माधोगढ़, डिगरोता, सतनाली बास, ढ़ाणा सहीत दो दर्जन से अधिक गांवों के किसानों ने सरकार से बिजली-पानी की मांग की थी। सरकार ने यहां के किसानों की बिजली-पानी की मांग को नजरअंदाज कर दिया था। जिसके चलते किसानों ने धरने-प्रदर्शन आरंभ कर दिए। जब प्रशासन द्वारा धरने-प्रदर्शनों पर भी ध्यान नहीं दिया गया तो नतीजन मंढिय़ाली कांड का जन्म हुआ तथा इस गोलीकांड में पांच किसान शहीद हो गए। इस कांड ने सरकार का तख्ता पलट कर रख दिया व इसकी गूंज दिल्ली की संसद तक सुनाई दी थी। तब से ही इस कांड में शहीद हुए किसानों की याद में हर वर्ष श्रद्धांजलि देने के लिए सभा आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर प्रदेश व अन्य राज्यों से सैकड़ों की संख्या में किसान नेता व ग्रामीण बारड़ा गांव में शहीदों को दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे तथा किसानों की दिनोंदिन बढ़ती जा रही समस्याओं पर चिंता जाहिर की।

सभा को संबोधित करते हुए किसान संघर्ष समिति प्रधान सूबे सिंह डालनवास ने कहा कि आज देश-प्रदेश में किसानों की हालत बद्द से बद्दतर होती जा रही है। आज तक कितनी सरकारें आई और गई लेकिन किसानों के बारे में किसी ने भी नहीं सोचा। आज हमारे देश में किसानों की आत्महत्या एक राष्ट्रीय समस्या का रूप धारण कर चुकी है। आए दिन देश के किसी ना किसी हिस्से से किसानों के आत्महत्या की खबरें मिलती रहती हैं। देश की प्रगति एवं विकास में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद भी किसानों को जिंदगी से निराश होकर ऐसे कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है। भारतीय कृषि बहुत हद तक मानसून पर निर्भर है तथा मानसून की असफलता के कारण नकदी फसलें नष्ट होना व सरकार द्वारा किसानों का प्रोत्साहन न करना किसानों द्वारा की गई आत्महत्याओं का मुख्य कारण है। मानसून की विफलता, सूखा, कीमतों में वृद्धि, ऋण का अत्यधिक बोझ आदि परिस्तिथियां समस्याओं के एक चक्र की शुरुआत करती हैं। बैंकों, महाजनों, बिचौलियों आदि के चक्र में फंसकर भारत के विभिन्न हिस्सों के किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं, परंतु कोई भी सरकार किसानों की इन समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। आज भारत के किसानों को एक मंच पर खड़े होने की जरुरत है, अन्यथा देश से किसानों का नाम मिट जाएगा।

इस मौके पर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन राजकीय उच्च विद्यालय बारड़ा के खेल मैदान में किया गया। जिसमें लडक़ों व लड़कियों के लिए 100, 400, 800 व 1600 मीटर की दौड़ तथा कबड्डी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इस अवसर पर किसान नेता कमल महंडी, सुरेश कादमा, विनोद तंवर पाली, रविंद्र गागड़वास, जनरल रणबीर यादव, विरेंद्र पहलवान बडऱाई, संजय रिवासा, रूद्रपाल तंवर, झोझू सरपंच दलबीर गांधी, महाराज सरस्वती खरखड़ी, रामफल कंडेला, हरिराम पहलवान कादमा, बिल्लु खांडा सहित प्रदेश के कोने-कोने व अन्य प्रदेशों से किसान उपस्थित रहे।

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