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Guest Writer

राम मंदिर बस एक चुनावी मुद्दा है

January 29, 2017 07:29 AM
General

 राम मंदिर बस एक चुनावी मुद्दा है

उत्तर प्रदेश में चुनाव आते ही एक बार फिर से राम मंदिर का मुद्दा गर्माने लगा है । हर बार की तरह इस बार भी उत्तर प्रदेश की सत्ता पे नजरें गराये बैठी भारतीय जनता पार्टी ने अपनी वर्षो पुराने संदूक से राम मंदिर मुद्दे को बाहर निकाल लिया है । प्रदेश में जारी चुनावी दंगल में अपनी जीत पक्की करने के लिये भाजपा ने फिर से राम मंदिर का वही पुराना राग अलापना शुरू कर दिया है ।

प्रदेश में होनेवाले विधानसभा चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी करते हुए भाजपा ने अपने सबसे पुराने मुद्दे को हवा देने की कोशिश की। शनिवार को घोषणापत्र जारी करने के मौके पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राम मंदिर मुद्दे को उछालते हुए कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कोशिश जारी है और इसके लिए प्रक्रिया चल रही है । इससे पूर्व पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य भी उत्तर प्रदेश में बहुमत की स्थिति में राम मंदिर निर्माण की दलील दे चुके हैं ।

वैसे भी बाबरी मस्जिद व राम जन्म भूमि का मुद्दा शुरू से ही भारतीय जनता पार्टी के लिए एक राजनैतिक मुद्दा रहा है । जिसे प्रत्येक चुनावी मौसम में भारतीय जनता पार्टी बखूबी उछालती रही है और चुनाव बीत जाने के बाद ठंडे बस्ते में डाल कर रख देती है । यूं तो ये मुद्दा वर्षो पुराना है पर उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी इसे कुरेदना नहीं भूलती है और प्रदेश की जनता के भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुये वह भगवान राम को राजनैतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते आई है । जिसका फायदा उसे समय समय पे होता हुआ भी दिखा है ।

और अगर बात बीजेपी की की जाये तो उसे राजनैतिक रूप से यहां तक पहुंचाने में भगवान राम और उनके जन्मभूमि से जुड़े इस मुद्दे का बहुत बड़ा योगदान है । बीजेपी के हरेक सफलता के पीछे कहीं ना कहीं रामजन्मभूमि का मुद्दा खासा तौर पर प्रभावी रहा है ।

पर इसके बावजूद बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद जब से राम मंदिर के निर्माण की बात शुरू हुई तब से आज तक भाजपा अपने मतदाताओं के विश्वास पर खरा नहीं उतर पाई है । और सायद यही वजह है कि पार्टी उत्तर प्रदेश की राजनीति से एकाएक समाप्त होने लगी ।  प्रदेश में भाजपा पतन के कागार पर खड़ी है और यह सिर्फ इसीलिए क्योंकि उसने हर बार चुनाव बीतने के बाद भगवान राम और उनसे जुड़े भक्तों को निराश किया है ।

उत्तर प्रदेश में पहली बार भाजपा की सरकार का नेतृत्व करने वाले यशस्वी नेता कल्याण सिंह ने तो अपने पूरे मंत्रिमंडल के साथ अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थल पे राम मंदिर बनवाने की सपथ ली थी । पर यह सपथ भी पूरी नहीं हो पाई । इतना ही नहीं बल्कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने के वक्त लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती, विनय कटियार समेत भाजपा के सभी बड़े नेताओं ने भी बाबरी विध्वंस और राम मंदिर निर्माण की अपील की थी ।

हालांकि बाबरी विध्वंस के बाद पार्टी नेताओं द्वारा इस मुद्दे को दफना दिया गया, पर आए दिन समय समय पर भारतीय जनता पार्टी इसे दफनाए गये गहरे खड्डे से निकालकर बेतहासा लहराती है और चुनाव बाद इसे पुणः  उसी खड्डे में दफना देती है ।

अब तो हाल यह है कि पार्टी के कई बड़े नेता अक़्सर राम मंदिर निर्माण के बारे में कुछ न कुछ बोलते रहते हैं और पार्टी में आला स्तर का नेतृत्व यह सफाई देते नहीं थकता कि ये हमारा चुनावी मुद्दा नहीं है ।

पर अब एक बार फिर से इस चुनावी माहौल में भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को हवा दे दी है । पार्टी के मैनीफेस्टों के साथ साथ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने भी विधान सभा चुनावों में पूर्ण बहुमत मिलने के पश्चात राम मंदिर निर्माण के वायदें को दोहराते हुए पार्टी के वर्षो पुराने इतिहास को सजीव कर दिया है । ये अलग बात है कि श्री मौर्य 24 घंटे के भीतर ही अपने बयान से पलट गए ।

देश में यह पहली बार नहीं हुआ है । इससे पहले भी पार्टी के सभी बड़े नेताओं ने समय समय पर अयोध्या में भव्य राम मंदिर की बात पे जोर दिया है और अपना काम निकल जाने के बाद मामला अदालत में होने की दुहाई देकर  मुद्दे को रफा-दफा करने की कोशिश की है । जिसे देश की जनता अब भली भांती समझने लगी है और वह इस चुनाव भगवान राम से किये गये सभी कोरे वादों का जवाब मांगने को आतुर है ।

                                               मुकेश सिंह
                                         सिलापथार, असम 
                  mukeshsingh427@gmail.com

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