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राजनितिक दलों के चंदे पर भी टैक्स ले सरकार तभी आएगी पूर्ण पारदर्शिता: अमित जोगी

AHN | February 01, 2017 09:05 PM

राजनितिक दलों के चंदे पर भी टैक्स ले सरकार तभी आएगी पूर्ण पारदर्शिता: अमित जोगी

-आम बजट उस आम की तरह जिसमे गुठली बड़ी फल कम।

1 फरवरी, 2017, रायपुर: मरवाही विधायक अमित जोगी ने केंद्रीय बजट पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि केंद्र सरकार का रेल और आम बजट उस आम की तरह है जिसमे गुठली बड़ी होती है और फल का खाने वाला हिस्सा कम। यानि सरकार ने जिस बजट को किसानों और गरीबों का बताया है उस बजट में उनके लिए ही कुछ ख़ास नहीं है। मसलन नोटबंदी के बाद किसानों को जो भारी नुक्सान उठाना पड़ा है उसकी भरपाई पूर्ण कर्ज माफ़ी देकर की जानी थी लेकिन सरकार ने केवल खानापूर्ति के लिए ऋण पर ब्याज दर कम किया है। छत्तीसगढ़ में पहले से ही भाजपा सरकार की वादाखिलाफी के शिकार किसान, नुक्सान में अपनी फसल बेच रहे हैं,तो उनके लिए ब्याज में कटौती कोई ख़ास बड़ी राहत नहीं है। मूल मुद्दा है उचित समर्थन मूल्य का, जिस पर सरकार चुप है। 2015 में सूखा और 2016 में नोटबंदी, छत्तीसगढ़ के किसानों को पड़ी इस दोहरी मार से बचाने राज्य सरकार ने भी कोई उपाय नहीं किये हैं जिससे प्रदेश में हालात नाजुक हो गए हैं। 

अमित जोगी ने कहा कि राजनितिक दलों के चंदे पर पारदर्शिता की बात तब तक बईमानी है जब तक उसको इनकम टैक्स के दायरे में न लाया जाए। कुछ सकारात्मक कदम उठाये गए हैं लेकिन अगर सरकार काले पैसे को लेकर गंभीर है तो उसे राजनितिक दलों के चंदों पर चारों तरफ से नज़र रखनी होगी। बिलकुल उसी तरह जिस तरह वो आजकल एक आम आदमी की कमाई पर नज़र रखे हुए है। हाल ही में हुए खुलासे के मुताबिक देश के राजनितिक दलों के पास आज चंदे के रूप में लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपये जमा है। अगर सरकार इस रकम पर टैक्स लेती है तो ये पैसा जनकल्याण में काम आ सकता है।     

अमित जोगी ने कहा कि केंद्र सरकार का वार्षिक बजट कई मायने में असंतुलित है मसलन 150 लाख गाँवों में ब्रॉडबैंड की बात है लेकिन गाँवों में बुनियादी सुविधा 'शुद्ध पेय जल' पर सरकार ने कोई बात नहीं की । इसी तरह भारी बेरोजगारी से जूझ रहे देश में रोजगार बढाने कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं । जोगी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि लगता है कि बुलेट ट्रेन चलाने वाली सरकार ने बुलेट की तेज़ी से बजट बनाया है तभी रेलवे सुरक्षा का उल्लेख करना भूल गयी है

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