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एक चुनौती :- अपने युवा बच्चे को अनुशासन में कैसे रखे????

लायन विकास मित्तल | लायन विकास मित्तल | February 13, 2017 05:04 PM
लायन विकास मित्तल
एक चुनौती :- अपने युवा बच्चे को अनुशासन में कैसे रखे????
 
 
दोस्तों काफी अन्तराल के बाद आपके रुबरु हूँ लगभग सभी घरो में ये नियम है कि परिवार के सभी सदस्य रात दस बजे के बाद अपने-अपने मोबाइल फोन सायलैन्ट कर देंगे। इसके बावजूद,भी आप अपने बच्चों  को हफ्ते में बार बार देर रात बारह बजे के बाद मैसेज करते पकडते होगें। आपके बच्चें अच्छी तरह जानते है कि रात के दस बजे तक उसे घर आ जाना चाहिए। लेकिन अक्सर वे रात को दस बजे के बाद घर पहुँचते है। कही ऐसा तो नही आपका बच्चा आपके हाथ से निकल गया हैं???ऐसा है तो आप क्या कर सकते है???
 
 
यह सच है कि आपके बच्चों ने गलती की हैं लेकिन अनुशासन देने से पहले, आपको यह जानने की ज़रूरत है कि वह किस वजह से आपके द्धारा बनाए नियम और कानुन को तोड़ रहा है। मगर आप निराश मत होइए। हो सकता है, आपको जो उनकी असंतुष्टि लग रही है वो उसका असंतुष्टि नहीं बल्कि कुछ और हो।
 
क्यों होता है ऐसा ??
 
 कुछ बच्चें आपके द्धारा बनाये गये  नियम और कानुन को तोड़कर यह देखना चाहते हैं कि माता-पिता उन्हें कितनी छुट देंगे। उदाहरण के लिए, अगर माता-पिता ने कहा है कि गलती करने पर उन्हें उसकी सज़ा मिलेगी, तो हो सकता है कि बच्चा उस नियम को तोड़कर यह देखना चाहे कि क्या आप वाकई उसे सज़ा देंगे या नहीं। तो क्या इसका मतलब है कि वह असन्तुष्ट बन गया है? ऐसा ज़रूरी नहीं है। सच तो यह है कि जब माता-पिता अपनी बात पर  नहीं टिकते  और बच्चें के गलत काम करने पर उसे सज़ा नहीं देते या फिर उन्हें उनकी सीमाओं का एहसास नहीं कराते, तो वे आसानी से नियमों को नजर अंदाज कर सकते हैं।
 
 कुछ माता-पिता अपने बच्चों को काबू में रखने के लिए ढेर-सारे नियम बनाते हैं। लेकिन जब बच्चें उनके बनाए नियम तोड़ देता है, तो माता-पिता गुस्से में आकर और सख्त नियम कानुन बना देते हैं। ऐसा करने से अकसर हालात और बिगड़ जाते हैं। एन. जी एफ रेडियो की सामाजिक समन्वयक अल्पना मित्तल समझाती है कि, “आप अपने बच्चें को जितना ज़्यादा दवाब में रखने की कोशिश करेंगे वह उतना ही ज़्यादा आपका विरोध करेगा,” वह यह भी बताती है कि “बच्चों को काबू में रखना उतना ही मुश्किल है, जितना मुश्किल नर्म रोटी पर सख्त मक्खन लगाना क्योंकि सख्त मक्खन से रोटी टूट सकती है। ऐसे में सख्ती अपनाना इसका इलाज नहीं है।”
 
पलवल डोनर्स क्लब के मुख्य संयोजक आर्यवीर लायन विकास मित्तल कहते है कि सही अनुशासन बच्चों की मदद कर सकता है। आखिर अनुशासन और सज़ा में क्या फर्क होता है। “सज़ा” का मतलब होता हैं, "किसी को दुख देना" और “अनुशासन” का मतलब होता है, "किसी को कुछ सिखाना होता है"। तो आप अपने बच्चों को कैसे सिखाएँगे, जिससे वह आपके नियमों के मुताबिक कार्य करे।
 
क्या कर सकते हैं आप??? 
 
 आपके युवा बच्चों को अच्छे से पता होना चाहिए कि उनसे क्या उम्मीद की जा रही है और उसे न मानने का क्या नतीजा हो सकता है??
 
 पलवल डोनर्स क्लब के मुख्य संयोजक आर्यवीर लायन विकास मित्तल कहते है कि माता पिता को चाहिए कि अपने घर के  नियम और कानुन की एक लिस्ट बनाइए। साथ ही साथ खुद उनको यह तय करना होगा कि  ‘क्या हमने बहुत ज़्यादा नियम और कानुन तो नही बना दिए हैं?  क्या इनमें से कुछ नियम ऐसे  तो नही हैं जिनकी अब ज़्यादा आवश्यकता नहीं? जिस तरह हमारे बच्चें ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाना सीखा है उसे ध्यान में रखकर, क्या हमें कुछ नियमों में फेरबदल करनी चाहिए?’
 
माता पिता को अपनी बात पर अटल रहिए। अगर एक बच्चें को एक बार किसी गलती के लुए छूट मिली हो और अगली बार वही गलती करने पर उसे अनुशासन दे दिया जाए, तो वह सोच  में पड़ सकता है।
 
 कोशिश कीजिए कि बच्चे के गल्ती के मुताबिक सज़ा दी जाए। मिसाल के लिए, जब एक बच्चा तय किए गए समय पर घर नहीं लौटता, तो उसकी गलती के मुताबिक आप उसके घर आने का समय और जल्दी कर सकते हैं।
 
माता पिता को चाहिए कि वे नर्मी दिखाइए। जैसे-जैसे आपका बच्चा ज़िम्मेदार बनता जाता है, वैसे-वैसे आप फेरबदल करने के लिए तैयार रहे, जिससे उसे अपनी आज़ादी पाने का पूरा अवसर मिल सके।
 
आप अपने बच्चों के साथ बैठकर घर के नियमों पर चर्चा कीजिए। आप चाहें तो, उनकी राय ले सकते है कि किसी नियम के तोड़ने का क्या नतीजा होना चाहिए। जब एक बच्चें को यह अवसर मिलता है कि वह कोई नियम तय करे, तो उस नियम को मानना उसके लिए आसान हो जाता है।
 
 आप अपने बच्चों की अच्छी शख्सियत बनाने में मदद दीजिए। आपका लक्ष्य सिर्फ यह नहीं कि बच्चा आपका कहना माने, बल्कि यह भी होना चाहिए कि वह एक अच्छी सोच रख सके यानी सही और गलत की पहचान कर सके ।अपने बच्चें की मदद कीजिए कि वह समझ सके कि वह अपनी पहचान कैसे शख्स के तौर पर कराना चाहते है। चुनौती का सामना करते वक्त , वह सही निर्णय लेना सीख सकें।
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