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Guest Writer

हम कैसी दुनिया बनाना चाहते हैं?

प्रदीप कुमार सिंह, | February 27, 2017 08:47 PM

हम कैसी दुनिया बनाना चाहते हैं?
(अब से समस्या को तभी पकड़िये जब वह छोटी हो)
- प्रदीप कुमार सिंह, शैक्षिक एवं वैश्विक चिन्तक
पाकिस्तान में सिंध प्रांत की मशहूर दरगाह लाल शाहबाज कलंदर को आत्मघाती हमले से दहल गई। हमले में 100 लोगों की मौत हो गई और 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। आतंकवाद का संरक्षण देने वाला पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित है। वहीं प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सूफी अल्पसंख्यक समुदाय पर हुए इस हमले की निंदा की है। पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल के अनुसार लाल शाहबाज कलंदर जैसी सूफी दरगाह पर हमले से सब सकते में हैं। पवित्र दरगाह उस वक्त निशाना बनी, जब वहाँ भारी तादाद में बच्चे और औरतें भी मौजूद थे। यानी मकसद साफ था कि ज्यादा से ज्यादा जानें जाएं। वैसा ही हुआ भी। आतंकी हमलों की कड़ी में इस ताजा घटना ने कई सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा सवाल पाकिस्तानी खुफिया तंत्र की विफलता का है, जिसे इतनी बड़ी दरगाह के टारगेट होने की भनक तक नहीं हुई। घटना के बाद आतंकवादियों पर हुई ताबड़तोड़ कार्यवाही भी सवालों के घेरे में है कि आखिर जिन्हें निशाना बनाया गया, वे यदि निशाने पर थे, तो पहले ही कार्यवाही क्यों न हुई? जरूरत बहुत गहराई तक पड़ताल की है।


पाकिस्तान के शहबाज कलंदर पर हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान ने जिस प्रकार आतंकवाद के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है, उससे आगे बढ़ते हुए अब माना जा रहा है कि पाकिस्तान जंग के मूड में आ गया है। पाकिस्तान ने पिछले दो दिनों में अफगानिस्तान के साथ लगते बाॅर्डर पर अपनी इन्वाॅल्वमेंट लगातार तेज कर दी हैं। जहां, इन क्षेत्रों में पाक लगातार आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, वहीं माना जा रहा है अब वह क्राॅस बाॅर्डर आॅपरेशंस की तैयारी कर रहा है। वहीं दूसरी खब़र के अनुसार पाकिस्तान ने पश्चिम बंगाल से सटी बांग्लादेश सीमा के जरिए भारत में नकली नोटों का कारोबार तेजी से फैलाने की कोशिश तेज कर दी है। भारत-बांग्लादेश सीमा पर कुछ ही दिनों के भीतर दो बार दो हजार के जाली नोट पकड़े जाने से भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश को सुरक्षित रखने के उपायों के तहत आतंकी संगठन आईएस को पूरी तरह नष्ट करने और अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण करने का संकल्प दोहराया है। अमेरिका के समाचार पत्र क्रिश्चियन साइंस माॅनीटर ने लिखा है कि ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में व्यापक बदलाव का वादा किया है, खासकर उसके शांति मिशन के क्षेत्र में, जो फिलहाल 16 देशों में जारी है। लेकिन इससे पहले कि अमेरिका इस लिहाज से कोई बड़ी पहल करे, उसे हैती से आ रही इस खबर का संज्ञान लेना चाहिए कि इस कैरीबियाई देश की हिंसा में आई भारी कमी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ अब जल्द ही वहां से अपनी शांति सेना को वापस बुला लेगी। बहरहाल, हैती अब भी अन्तर्राष्ट्रीय मदद के बिना अपने पैरों पर खड़े होने के लायक नहीं है। इसकी राजनीतिक व कानूनी व्यवस्था को भी अभी लंबे वक्त तक दुनिया की निगरानी की दरकार है। मगर सुरक्षा के मोर्चे पर इस देश न केवल उल्लेखनीय प्रगति की है, बल्कि दुनिया के सामने स्थानीय हिंसा को थामने की एक मिसाल भी पैदा की है।
अमेरिकी नेवी का कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने डिस्प्यूटेड साउथ चाइना सी में गश्त शुरू कर दी है। अमेरिका की शुरू हुई पेट्रोलिंग में नेवी के कई एयरक्राफ्ट कैरियर शिप्स और फाइटर जेट्स शामिल हैं। चीन ने अमेरिका से उसकी संप्रभुता को चुनौती नहीं देने को कहा था। चेतावनी के बावजूद अमेरिकी नेवी के इस कदम से साउथ चाइना सी को लेकर चल रहे विवाद के भड़कने की आशंका है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश को सुरक्षित रखने के उपायों के तहत आतंकी संगठन आईएस को पूरी तरह नष्ट करने और अमेरिकी सेना का पुनर्निर्माण करने का संकल्प दोहराया है। अमेरिका के समाचार पत्र क्रिश्चियन साइंस माॅनीटर ने लिखा है कि ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र संघ में व्यापक बदलाव का वादा किया है, खासकर उसके शांति मिशन के क्षेत्र में, जो फिलहाल 16 देशों में जारी है।


आतंकी अभियानों से निपटने के लिए हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड यानी एनएसजी को स्मार्ट गैजेट और घातक हथियारों से लैस किया गया है। इसमें ग्रेनेड गिराने वाला ड्रोन, दीवार के पार देख सकने वाले थ्रीडी फ्लाई आॅन द वाॅल रडार और रिमोट पिस्तौल से लैस डोगो रोबोट शामिल हैं। वहीं अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अनुरोध किया है कि वह उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण पर चर्चा करने के लिए एक आपात बैठक बुलाए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कार्यभार संभाले जाने के बाद यह पहला परीक्षण है। पांच महाशक्तिशाली देशों ने स्वयं हजारों की संख्या में परमाणु बम बना रखे हैं। कोई शेर मंुह में हिरण दबाकर जंगल में शान्ति की अपील करेगा तो उसे कौन सुनेगा।
सवाल यह है कि क्या कश्मीर में अंतहीन युद्ध कभी खत्म होगा? कब तक हमारे जवान शहीद होते रहेंगे। अब तो कारगर समाधान तो भारत को निकालना ही पड़ेगा, चाहे वह वैचारिक हो या हथियारों से। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाक और आतंकवादी संगठनों का रूख काफी आक्रामक हुआ है और वह एक के बाद एक हमले कर रहे हैं। वहीं दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएस का खतरा भारत के पड़ोसी मुल्कों में लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान से पहले आईएस ने बांग्लादेश, अफगानिस्तान और मालदीव में भी कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया है। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी आईएसआईएस के लेने से भारतीय एजेंसियां चैकन्ना हो गई हैं। पड़ोस तक आईएस की दस्तक को भारत के लिए भी बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
इराक के किरकुर में पिछले साल अक्तूबर में चलाए अभियान में पकड़े गए आईएस आतंकी अमर हुसैन ने 500 लोगों की हत्याओं का गुनाह कबूला है। इस बर्बर आतंकी ने करीब 200 महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटना को भी स्वीकार किया। जघन्य अपराधों की इतनी बड़ी संख्या होने के बावजूद वह पूरी तरह सामान्य नजर आता है। इराक की जेल में बंद हुसैन का कहना है कि वह बेहतर इंसान बनने के लिए रोज कुरान पढ़ता है। लेकिन आतंकियों के लिए लड़ते समय किए गए अपने अपराधों पर उसे तनिक भी आत्म ग्लानि नहीं होती।
भारत पिछले पांच साल के दौरान हथियारों का सबसे बड़ा आयातक रहा है। स्टाॅकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीटयूट ने बताया कि भारत की विदेश से हथियारों की खरीद इस दौरान चीन और पाकिस्तान की तुलना में काफी अधिक रही है। रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से 2016 के दौरान हथियारों के कुल वैश्विक आयात में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी रही है जो सर्वाधिक है। चीन ने जहां स्वदेशी उत्पादों से हथियारों की आयात को लगातार कम किया है वहीं भारत इसके लिए रूस, यूरोप, अमेरिका, इजरायल और दक्षिण कोरिया पर निर्भर बना हुआ है। भारत का हथियारों का आयात 43 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान कुल निर्यात में एक तिहाई हिस्सेदारी के साथ अमेरिका शीर्ष हथियार निर्यातक रहा है। वहीं दक्षिण एशिया क्षेत्र में सुरक्षा और अन्य चुनौतियों के मद्देनजर भारत को ऐसे देश के रूप में बड़ी उम्मीद के साथ देखा जा रहा हैं, जो इस क्षेत्र के व्यापार और विकास के लिए अपनी आर्थिक और मानव संसाधन का इस्तेमाल करने की क्षमता रखता है।
चुनाव में धनबल के बढ़ते प्रभाव पर विभिन्न वर्गों की चिंताओं के बीच 2016 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में संपन्न हुए चुनाव के दौरान कानून अनुपालन एजेंसियों ने 1.25 अरब रूपए से अधिक धनराशि जब्त की थी। इसके अलावा इन राज्यों में हुए चुनाव के दौरान भारी मात्रा में शराब, मादक पदार्थ तथा मतदाताओं को लुभाने के लिए साड़ी, धोती, लुंगी, कंबल, मच्छरदानी, शर्ट, बैनर, होर्डिंग, टोपी आदि जब्त किए गए थे। आरटीआई के तहत चुनाव आयोग ने दी जानकारी।
भारत और चीन में कई मुद्दों को लेकर चल रहा तनाव ताइवान सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के नई दिल्ली दौरे को लेकर गहरा गया है। चीन ने कहा कि उसने भारत से राजनयिक विरोध दर्ज कराया है। जबकि भारत ने कहा कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है और इसके राजनीतिक मायने न निकाले जाएं। वहीं अमेरिका के रिकाॅर्ड 26 सांसद इन दिनों भारत यात्रा पर आये हैं। यह दल प्रधानमंत्री श्री मोदी से मिला। यात्रा के दौरान ये अमेरिकी सांसद सरकार के उच्च अधिकारियों, नेताओं, थिंक टैंक संस्थाओं के सदस्यों और गैर सरकारी संगठनों से मिला। अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरना ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
हमारा मानना है कि युद्ध के विचार सबसे पहले मनुष्य के मस्तिष्क में पैदा होते हैं। मनुष्य के मस्तिष्क में ही शान्ति के विचार रोपना होगा। मनुष्य को शान्ति के विचार देने की श्रेष्ठ अवस्था बचपन है। नोबेल शान्ति पुरस्कार प्राप्त नेल्शन मण्डेला का कहना था कि शिक्षा संसार का सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसके द्वारा सामाजिक परिवर्तन लाया जा सकता है। उद्देश्यपूर्ण शिक्षा किसी बालक को अच्छा इंसान बना सकती है तथा उसके विपरीत उद्देश्यहीन शिक्षा किसी बालक को हैवान बना सकती है। आज संसार में जो भी आपाधापी मची है उसके मूल में मूल्यविहीन शिक्षा ही है। शिक्षा के द्वारा ही समस्या पैदा हुई है तथा शिक्षा द्वारा ही समस्या का समाधान खोजना होगा।

 

 

पता- बी-901, आशीर्वाद, उद्यान-2
एल्डिको, रायबरेली रोड, लखनऊ मो0 9839423719

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