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अरबो खरबो रूपये लेकर फरार पल्स इंडिया लिमिटेड ?मामला कोर्ट में विचाराधीन

एएच ब्यूरो | March 26, 2017 07:39 PM
एएच ब्यूरो

योगी से फरियाद , अरबो खरबो रूपये लेकर फरार पल्स इंडिया लिमिटेड ?
*काफी ग्राहकों का पूर्ण हो चुका है बीमा कागज लेकर टहल रहे हैं इधर उधर कोई नहीं देने वाला पैसा*
प्रतापगढ़ (राहुल )प्रदेश में एक ऐसी कंपनी आई थी जिसका नाम था PACL पल्स इंडिया लिमिटेड इस कंपनी ने उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में लोगों का बीमा करवाया था इस कंपनी पर लोगों का भरोसा भी था लेकिन धीरे-धीरे यह कंपनी उठते-उठते पूरे देश में छा गई परंतु समय आते आते यह कंपनी भागना प्रारंभ कर दी लोगों का पैसा डूबने लगा आज कोई भी राजनीतिक पार्टियां इस कंपनी के बारे में नहीं बोलता ना कोई नेता बोलता है अरबों-खरबों रुपए यह कंपनी गरीबों का पैसा लेकर चली गई एजेंटों से बात करने पर पता चलता है की PACL कंपनी हाईकोर्ट में एक मुकदमा के तहत कार्रवाई चल रही है इनकी तरफ से सिर्फ अस्वासन दिया जाता हैं की आपका पैसा मिलेगा लोगों का भरोसा अब।उठता जा रहा है कि आखिर हमारा पैसा मिलेगा या नहीं pacl कंपनी का कोई कार्यालय भी नहीं दिखाई पड़ता जहां पर अधिकारियों से बात की जाए क्या इन गरीबों का हक मिलेगा क्या मेहनत से कमाया यह पैसा मिलेगा जो पैसा किसी पिता ने अपनी बेटी की शादी के लिए बड़ी मेहनत से कमाया हुआ पैसा पल्स जैसी इंडिया कंपनी में लगाया था क्या यह पैसा अपनी बेटी की शादी तक मिलेगा अपने पत्रकार भाइयों से कहना चाहता हूं कि इस मुद्दे को उठाया जाए ताकि गरीबों का पैसा मिल सके यह जनहित में जरूरी है माननीय मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ योगी से निवेदन करता हूं कि इस कंपनी के बारे में यहां के गरीब जनतां को बताया जाए क्या pacl कंपनी है या अभी चली गई क्या इन गरीबों का हक मिलेगा ,लेकिन जिस तरह भारत सरकार और प्रदेश सरकारें इस तरह की नॉन बैंकिंग कपंनियों को लोगो के बीच जाकर चिट फंड या अन्य तरह से कार्य करने की इज्जात देती है ये भी सोचनीय विषय है आखिर इस तरह की कंपनिया मार्किट में आकर इतने सालों तक जमी रहती है सरकार और प्रसाशन को इनके कार्यों की भनक क्यों नही लगती क्यों नही समय समय पर इनकी आर्थिक स्तिथि पर नजर रखी जाती ,क्या भारत सरकार की सेबी संस्था इस तरह की नकली कम्पनियों के खिलाफ कार्यवाही करने में असक्षम है जबकि भारतीय प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) ने बाजार नियामक सेबी के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया जिसमें प्रॉपर्टी डेवलपर पीएसीएल को निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश जारी किया गया था। यही नही 1996 में बाज़ार में आई इस नॉन बैंकिंग प्लस इंडिया लिमिडेट कम्पनी ने हज़ारों करोड़ का कारोबार कर देश भर में अपना नेटवर्क स्थापित किया ,बाद में देश भर में इस कम्पनी के खिलाफ खुद इसके एजेंटों ने ही आवाज उठानी शरू कर दी जिसकी आवाज आम जनता के बीच फलते ही आम जनता में खलबली मच गई लेकिन सरकार या प्रसाशन ने तब भी कोई ध्यान नही दिया ,आखिर में जब देश भर में इस तरह की नॉन बैंकिंग चिट फंड कंपनियों की आम जनता से धोखा धड़ी की गूंज उठी तो भारत सरकार की संस्था सेवी ने गत 21 अगस्त 14 को ही सभी नॉन बैंकिंग कंपनियों के कार्य पर रोक लगाने का आदेश देना पड़ा ,लेकिन इन कंपनियों से आम जनता का पैसा कैसे वसूला जाये यह सिर्फ अदालतों में विचाराधीन है मगरप्लस इंडिया लिमिडेट जैसी हज़ारों कम्पनियों से आज तक आम जनता का पैसा वसूल कर निवेशकों को मिला हो ऐसा कोई मामला सामने नही आया क्योंकि निवेशक आज भी अपने खून पसीने की कमाई इस नकली कंपनियों से वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे है ,आखिर हमारे देश के सिस्टम को यह सब क्यों तब दिखाई नही देता जब धुंआ उठने लगता है ,मामला हाथ से निकल जाने या फिर इस तरह की धोखे बाज कम्पनियों के मालिकों के देश छोड़ कर भाग जाने के बाद की हमारे देश की सरकारें क्यों जागती है ,क्या आम जनता का पैसा पैसा नही है या फिर राजनेताओं और अफसरों की आँखों पर ना देखने वाली पट्टी क्यों बंद जाती है और कौन बांधता है ,यही नही चिट फंड कम्पनियो के पीछे नेताओ और उनके रिश्तेदारों के नाम भी समय समय पर उजागर होते रहते है ,यानी जब रक्षक की भक्षक बन जाए तो उम्मीद किसके करें ,आज भी देश के करोड़ों लोग प्लस इंडिया लिमिडेट से अपने पैसे वापस मिलने की आस में 22 साल से इंतज़ार कर रहे है ,जबकि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व न्यायधीश आरएस लोढ़ा की अध्यक्षता में जो कमेटी इस कम्पनी की छानबीन कर रही है उससे तो उम्मीद है की जल्द ही निवेशकों को उनका पैसा मिलेगा लेकिन यह सब आने वाला समय बताएगा

 

 

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