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मानस तन देवों से भी श्र्रेष्ट है, इसे पाने के लिए देवता भी तरसते है: सुदीक्षा

संजय गर्ग | April 25, 2017 06:32 PM
संजय गर्ग
मानस तन देवों से भी श्र्रेष्ट है, इसे पाने के लिए देवता भी तरसते है: सुदीक्षा 
माता रेणूका भवन का किया उद्घाटन 
6 दिवसीय राम कथा शुरु 
लाडवा, 25 अप्रैल (संजय गर्ग): जब तक कर्मों की पूंजी है, इसका सुख भोग लो। बाद में यहीं आना पड़ेगा। यह मृत्युलोक श्रे्रष्ट है। मानस तन देवों से भी श्र्रेष्ट है। इस चोले को पाने के लिए देवता भी तरसते हैं। स्वर्ग में सुख ही सुख है। जहां धरती पर किख कर्मों को भोगा जाता है। 
मंगलवार ब्राह्मणों वाली धर्मशाला में शुरु हुई 6 दिवसीय राम कथा के पहले दिन साध्वी श्री सुश्री सुदीक्षा जी महाराज अपने प्रवचनों में बोल रही थी। उन्होंने कहा कि धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं, इसी प्रकार हमारे गुरु महाराज ने समाज को जोडऩा सिखाया, तोडऩा नहीं। उन्होंने कहा कि रावण चारों वेदों के ज्ञाता थे। लेकिन उसने कभी किसी की बात नहीं मानी। लेकिन जो उसकी बात न मानने के कारण दुर्गति हुई वह सबकों मालूम है। उन्होंने कहा कि सत्संग में पांच चीजें मिलती है :- मति, कीर्ति, भलाई, भूती और गति। उन्होंने कहा कि संतों दृष्टि शुद्ध और अच्छी होती है, जो सबको देखकर खुश होती है। उन्होंने कहा कि सत्संग को जो तन और मन लगाकर सुनते है, उनका पूरा जीवन बदल जाता है। सत्संग में आने से विचार, बुद्धि, कर्म, आचरण बदलता है। धीरे-धीरे सत्संग से एक दिन पूरा जीवन बदल जाता है। इससे पूर्व श्री सुदीक्षा जी महाराज ने ब्राह्मण धर्मशाला में बने माता रेणूका भवन का उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर नपा प्रधान साक्षी खुराना, ब्राह्मण सभा के प्रधान सोमप्रकाश शर्मा, डा. गणेश दत्त, प. जगदीश राम शर्मा, संत शर्मा, प्रदीप गर्ग, डा. योगेंद्र कश्यप, श्यामलाल अत्री, बृजेश शर्मा, सुरेश शर्मा, श्याम लाल अत्री, जितेंद्र अत्री, अश्वनी शर्मा, महेश कांत, ज्ञान सिंह ब्राहाण, तीलक राज, प्रदीप गर्ग, सुनील गर्ग, पवन बंसल, मुनीश सिंघल, देवराज, कलाधर शर्मा, नरेदं्र सैन, नीरज गर्ग, शशि गोयल, कौशल सिंगला सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। 
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