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Literature

धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जंयती चित नहीं चरित्र देखते भगवान: सुदीक्षा सरस्वती

संजय गर्ग | April 28, 2017 05:09 PM
संजय गर्ग
धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जंयती 
चित नहीं चरित्र देखते भगवान: सुदीक्षा सरस्वती
लाडवा, 28 अप्रैल (संजय गर्ग): संत देवी सुदीक्षा सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम चित नहीं चरित्र देखते हैं और चरित्रवान व्यक्ति को ही वह पसंद करते हैं। उन्होंने कहा कि अपने चरित्र को ऐसा बनाओ की कोई उंगली न उठा सके। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने रावण जैसे विद्वान, पंडित, योद्धा को भी इसी कारण मारना पड़ा, क्योंकि इन सब गुणों के बावजूद रावण चरित्र अच्छा नहीं था।
संत देवी सुदीक्षा सरस्वती जी शुक्रवार को लाडवा की ब्राह्मणों वाली धर्मशाला में श्रीरम कथा उत्सव के दौरान चौथेें दिन की कथा सुना रही थी। उन्होंने श्रीराम चरित मानस के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन मेंं उतार चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन उसे कभी भी हार नहीं माननी चाहिए और जीवन में आने वाले कष्टों से सूझबूझ के साथ निपटना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में धैर्य से काम लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जब भगवान श्रीराम को लंका पर चढ़ाई के लिए समुंद्र पार करना था तो तीन मार्गों से सेना लंका पहुंची थी। उन्होंने बताया कि श्रीराम चरित मानस में स्वामी तुलसी दास जी ने बताया है कि कुछ नल और नील द्वारा बनाए गए रास्ते से लंका तक पहुंचे तो कुछ वायु मार्ग से उडक़र व कुछ जल मार्ग तैरकर ही लंका पहुंच गए थे। सुश्री सुदीक्षा सरस्वती जी ने इसे पश्चात वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम चरित मानस में उस झांकी को स्वामी तुलसी दस जी ने सर्वोत्तम का दर्जा दिया है, जिसमें पुल पार करने के उपरांत सुग्रीव को बैठा देखकर भगवान श्रीराम उनकी गोद में सिर रखकर लेट जाते हैं और उनको लेटा देखकर युवराज अंगद व हनुमान जी उनकी सेवा में लग जाते हैं। श्रीराम मंत्रणा के लिए विभीषण को अपने कान के पास बुलाते हैं और लक्ष्मण जी कुछ दूरी पर धनुष व बाण लेकर बैठ जाते हैं। कथा के बाद धर्मशाला में भगवान परशुराम जंयती भी धूमधाम से मनाई गई। ब्राहम्ण समाज के लोगों ने भगवान परशुराम के चित्र पर फूल चढ़ाकर उनकी पूजा-अर्चना की। वहीं धर्मशाला में परशुराम जंयती के उपल्क्ष में समाजसेवी पंकज गोयल तरावड़ी द्वारा एक लोगों के लिए वाटर कूलर भी लगवाया गया। जिसका उद्घाटन देवी सुदीक्षा जी महाराज ने किया। इस अवसर पर ब्राह्मण सभा के प्रधान सोम प्रकाश शर्मा, पं. जगदीश राम शर्मा,  प्रदीप गर्ग, अशोक पपनेजा, जितेंद्र शर्मा, सतपाल धीमान, विनोद गर्ग, सुनील गर्ग, बिजेश शर्मा, पवन बंसल, सुरेश शर्मा, रोकी शर्मा, योगेन्द्र काम्बोज, संजीव शर्मा, श्याम लाल बंसल, अश्वनी गोसांई, मदन लाल सोनी, नरेंद्र सेन, नीरज गर्ग, कौशल सिंगला, शशि गोयल सहित भारी संख्या में भारी संख्या में सहारनपुर, तरावड़ी, शाहबाद समेत कई अन्य स्थानों से आए श्रद्धालुओं उपस्थित थे।
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