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जीवन्ता चिल्डर्न हॉस्पिटल ने विश्व के सबसे कम वजन के शिशु के दिल का सफल ऑपरेशन कर पूरी दुनिया में नया रिकॉर्ड स्थापित किया

एएच ब्यूरो | May 26, 2017 05:52 PM
एएच ब्यूरो
जीवन्ता चिल्डर्न  हॉस्पिटल ने  नवजात गहन चिकित्सा इकाई में सफल ऑपरेशन कर   एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया
उदयपुर(अटल हिन्द संवाददाता )-जीवन में संघर्ष करती नन्हीं सी जान, उम्र 15 दिन, वजन मात्र 470 ग्राम के शिशु की अभी आंख भी नहीं खुल पाई थी, जिसके हृदय से निकलने वाली दो मुख्य धमनियां आपस में जुड़ी हुई थी। पूरी दुनिया के चिकित्सा इतिहास में पहली बार इतने छोटे एवं कम वजनी नवजात शिशु की जीवन्ता चिल्डर्न  हॉस्पिटल के नवजात गहन चिकित्सा इकाई में सफल ऑपरेशन कर पूरी दुनिया के चिकित्सा इतिहास में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है।
 

एसपी जैन की धर्मपत्नी को वर्षों बाद आईवीएफ द्वारा माँ बनने का सौभाग्य मिला, किंतु साढ़े पांच माह में ही प्रसव पीड़ा शुरू होने से 20 अप्रैल 2017 को शिशु का समय पूर्व ही जन्म हो गया। जन्म पर शिशु नीला पड़ रहा था एवं स्वयं श्वास भी नहीं ले पा रहा था। जीवन्ता चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. सुनील जांगिड़, डॉ. निखिलेश नैन एवं उनकी टीम ने प्रसव के तुरंत पश्चात नवजात शिशु के फेफड़ों में नली डालकर पहली सांस दी एवं उसे जीवन्ता चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में अति गंभीर अवस्था में वेंटीलेटर पर भर्ती किया। डॉ. सुनील जांगिड़ द्वारा जैन दंपत्ति को ऐसे कम दिन एवं कम वजन के प्रीमोच्योर शिशु की देखभाल एवं भविष्य में आने वाली सभी कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी।

उदयपुर निवासी एसपी जैन की धर्मपत्नी को वर्षों बाद आईवीएफ द्वारा माँ बनने का सौभाग्य मिला, किंतु साढ़े पांच माह में ही प्रसव पीड़ा शुरू होने से 20 अप्रैल 2017 को शिशु का समय पूर्व ही जन्म हो गया। जन्म पर शिशु नीला पड़ रहा था एवं स्वयं श्वास भी नहीं ले पा रहा था। जीवन्ता चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के नवजात शिशु विशेषज्ञ डॉ. सुनील जांगिड़, डॉ. निखिलेश नैन एवं उनकी टीम ने प्रसव के तुरंत पश्चात नवजात शिशु के फेफड़ों में नली डालकर पहली सांस दी एवं उसे जीवन्ता चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई में अति गंभीर अवस्था में वेंटीलेटर पर भर्ती किया। डॉ. सुनील जांगिड़ द्वारा जैन दंपत्ति को ऐसे कम दिन एवं कम वजन के प्रीमोच्योर शिशु की देखभाल एवं भविष्य में आने वाली सभी कठिनाइयों के बारे में जानकारी दी।
 
 
दंपत्ति को चिकित्सकों पर भरोसा था क्योंकि पहले भी इनके द्वारा 607 ग्राम वजनी प्रीमोच्योर शिशु को जीवनदाय दिया जा चुका है। डॉ. जांगिड़ ने बताया कि शिशु को जीवित रखने के लिए ग्लूकोज, प्रोटीन को सेंट्रल लाईन के द्वारा दिया गया, फेफड़ों के विकास के लिए फेफड़ों में दवाई डाली गई, नियमित रूप से मस्तिष्क एवं हृदय की सोनोग्राफी भी की गई, जिससे आंतरिक रक्तस्त्राव तो नहीं हो रहा है, को सुनिश्चित किया जा सके। डॉ. सुनील जांगिड़ ने बताया कि शिशु के हृदय में दो मुख्य धमनियों के बीच की नस (पीडीए) जो कि जन्म के कुछ समय बाद बंद हो जानी चाहिए वो प्राकृतिक रूप से बंद नहीं हो पाई। इस कारण शिशु के हृदय, फेफड़ों पर सूजन बढ़ रही थी और वेंटीलेटर कम नहीं कर पा रहे थे और दवाइयों द्वारा उपचार भी संभव नहीं हो सका, इस कारण ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प रह गया था।
 
शिशु की हालत को देखते हुए 5 मई 2017 को जीवन्ता चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल एनआईसीयू में ही ऑप्रेशन किया। नवजात की हार्ट सर्जरी के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कॉटरी मशीन जिसके द्वारा उत्तकों को खोला गया ताकि रक्तस्त्राव न हो। इन धमनियों के जुड़ाव से फेफड़ों में आवश्यकता से अधिक रक्त प्रवाह हो रहा था, जिसको क्लिप व सर्जिकल टांकों से बंद किया गया। इससे रक्त प्रवाह कम एवं सामान्य हो पाया। डॉ. सुनील जांगिड़ ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान एवं पश्चात शिशु की हालत स्थिर बनी रही,अब शिशु लगभग एक माह का हो गया है व वजन भी बढ़ रहा है, दिल एवं फेफड़ों की सूजन कम हो रही है, पूरा दूध भी पच रहा है। पूरे विश्व में इतने कम वजन के शिशु के दिल के सफल ऑपरेशन के लिए उन्होंने शिशु के माता-पिता, डॉ. संजय गांधी की कार्डियक टीम और जीवन्ता हॉस्पिटल नवजात शिशु इकाई के सभी स्टाफ को बधाई दी और शिशु के आगे के स्वास्थ्य के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
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