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Madhya Pradesh

भटक रही गौ माताएं नहीं काम कर रही हैं छतरपुर जिले की गौशालाएं

निर्णय तिवारी | August 09, 2017 05:13 AM
निर्णय तिवारी

भटक रही गौ माताएं नहीं काम कर रही हैं छतरपुर जिले की गौशालाएं 
छतरपुर/जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष कीर्ति विश्वकर्मा ने छतरपुर की दयनीय हालत पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए कहा कि हमारे तथाकथित  स्मार्ट छतरपुर कि रोडो पर पहले ही गलत डिजाइन के डिवाइडर और बड़े बड़े गड्ढे तथा बिजली के खंभों ने कहर मचा रखा था  और अब समूचा गोवंश और अश्व वंश रोडो पर कब्जा कर बैठा है लगने लगा है की हम गांव में रह रहे है फिर भाजपा किस विकास का डंका पीट रही है नगर पालिका से लेकर सांसद तक इस बात का जवाब  देने को तैयार नहीं  की  छतरपुर में संचालित हो रही 14 गौशालाएं  आखिर जमीन पर कहां है प्रशासन भी अजीबोगरीब फरमान जारी करता है की गाय के सींगों पर रेडियम लगा दिया जाए एपरंतु इससे समस्या का वास्तविक हल नहीं निकलता प्रशासन यह भी बताएं की घोड़ों और गधों पर कहां रेडियम लगाया जाएघ् छतरपुर में ना तो कांजी हाउस ओं की व्यवस्था है नाही संबंधित कानून का पालन किया जा रहा है जिसके कारण आए दिन हादसे होते रहते हैं और शहरवासियों को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है रहा है

यातायात प्रबंधन में हो रही बाधा
श्रीमती विश्वकर्मा का कहना है कि गौवंश के प्रति आस्था एवं पशुओं के प्रति प्रेम रखने वाली समाजसेवी संस्थाएं भी नजर नहीं आ रहीं। नगर पालिका एवं क्षेत्रीय विधायक सांसद तथा मंत्री आवारा जानवरों पर चुप्पी साधे बैठे हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का दिखावा कर रही है। सरकार की गलत नीतियों की वजह से ही किसान पशुपालन नहीं करना चाहता। यही वजह है कि इन्हें भूखा प्यासा सड़क पर आवारा भटकने एवं मरने के लिए छोड़ देता है।

क्यों नहीं हुई कांजी हाउसों की स्थापना
नगर पालिका छतरपुर पर अपने कर्तव्यों का पालन न करने का श्रीमती विश्वकर्मा ने आरोप लगाया है। उन्होंने कहां कि जहां कांजी हाउसों की स्थापना करना तथा उनका प्रबंधन करना और पशु अतिचार अधिनियम 1871 प्रवतन में हो वहां उस अधिनियम की धारा 4,5,7, 12,14,17 तथा 19 के आधीन राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट के समस्त कृत्य करने की जिम्मेदारी नगर पालिका की है फिर भी कांजी हाउसों की स्थापना नहीं की गई। हालांकि पूर्व में कांजी हाउस हुआ करते थे लेकिन इन्हें समय के साथ समाप्त कर दिया गया।

निष्क्रिय हैं जिले की गौशालाएं
श्रीमती विश्वकर्मा ने कहा कि उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं छतरपुर मप्र के पत्र क्रमांक 1743/9.8.16 के अनुसार जिले में 14 गौशालाएं संचालित हो रही हैं। इन गौशालाओं को लाखों रूपए का अनुदान दिया जाता है। 14 गौशालाओं में से पांच गौशालाएं छतरपुर में है लेकिन इनमें से तीन निष्क्रिय हैं। सवाल ये है कि जब जिले में 14 गौशालाएं हैं तो फिर गौवंश दर.दर क्यों भटक रहा है। उनका सवाल यह है कि शायद सीएमओ इस बिन्दु से वाकिफ नहीं है।  

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