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अंगों के प्रत्यारोपण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर: डॉ. वाहिद

रणबीर रोहिल्ला | August 12, 2017 07:04 PM
रणबीर रोहिल्ला

अंगों के प्रत्यारोपण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर: डॉ. वाहिद

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत।


विश्व अंग दान दिवस, के मौके पर जागरूकता कायम करने के लिए मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के डॉक्टर  वरिष्ठ कंसल्टेंट यूरोलॉजिस्ट एवं रीनल प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. वाहिद जमान, वरिष्ठ कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. दीपक जैन और  कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. योगेश छाबड़ा पत्रकारों से रूबरू हुए। 
डॉ. वाहिद ने कहा, ‘‘भारत में दाताओं की कमी के कारण अंग के लिए इंतजार करने के दौरान ही उन मरीजों में से 90 प्रतिशत मरीजों की मृत्यु हो जाती है जिन्हें महत्वपूर्ण अंग का प्रत्यारोपण कराने की जरूरत है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 200,000 लोग किडनी के लिए इंतजार कर रहे हैं और 30,000 लोग लीवर का इंतजार कर रहे हैं। कानूनी दान से लगभग 3 से 5 प्रतिशत मांग (प्रतिवर्श 100 किडनी ट्रांसप्लांट और 800 लीवर प्रत्यारोपण) ही पूरी हो पाती है। इसके अलावा जीवित दाता से लिए गए अंगों के प्रत्यारोपण के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है क्योंकि भारत में 95 प्रतिषत दाता जीवित डोनर होते हैं जबकि केवल एक प्रतिषत कैडेवर (मृत) डोनर होते हैं।’’ 
विश्व अंग दान दिवस का मिशन लाइव और कैडेवर डोनर प्रोग्राम दोनों के लिए अधिक जागरूकता पैदा करना है। डॉ. वाहिद ने यह भी कहा कि हमारे देश में अंगों की ज़रूरत और आपूर्ति के बीच भारी विसंगति है और इसे खत्म किया जा सकता है, अगर दुर्घटनाओं में मौत के षिकार होने वाले लोगों के अंग प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध करा दिए जाएं। भारत में दुर्घटनाओं में करीब चार लाख लोगों की मौत हर साल होती है। इसके अलावा मौजूदा समय में एक अन्य सबसे व्यवहार्य  विकल्प है - डोनर स्वैपिंग एवं एबीओ-रक्त समूह असंगत दाताओं से प्रत्यारोपण। इस तरह के प्रत्यारोपण जो अतीत में उच्च जोखिम वाले माने जाते थे आज के समय में उपलब्ध इम्युनोसप्रैषिव उपचार मानदंडों के कारण अच्छे लघुकालिक एवं स्वीकार्य दीर्घकालिक परिणामों के साथ संभव हो गए हैं। 

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