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रेवाड़ी की बेटी ने साईकिल से नाप डाला पूरा हिंदुस्तान।

बी डी अग्रवाल | August 31, 2017 08:20 PM
बी डी अग्रवाल

रेवाड़ी की बेटी ने साईकिल से नाप डाला पूरा हिंदुस्तान।
कन्या कुमारी से लेह लद्दाख तक गूंजा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और पर्यावरण बचाओ-पेड़ लगाओ का संदेश।

रेवाड़ी बी डी अग्रवाल
हरियाणा में रेवाड़ी जिले के छोटे से गुर्जर माजरी गांव की बेटी सुनीता चोकन ने अपनी सोलो साईकिल से 45 दिनों की अपनी यात्रा में पूरा हिंदुस्तान नाप डाला। सुनीता वह बहादुर बेटी है जो गत 15 जुलाई को अपनी सोलो साईकिल पर कन्या कुमारी से लेह स्थित खारदुंगला चोटी पर पहुँच कर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सन्देश देने के लिए अकेले ही निकल पड़ी। इस सोलो साईकिल एक्सपीडिशन में सुनीता प्रातः 4 बजे उठ कर अकेले ही साईकिल पर तिरंगा और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के चिन्ह के साथ प्रत्येक शहर में जाकर लोगों को कन्या भ्रूण हत्या और पर्यावरण का संदेश देती रही । जगह जगह पर सुनीता का भारी स्वागत भी किया गया। सुनीता ने अपने 45 दिनों की इस यात्रा में काफी रोमांचक अनुभव प्राप्त किये ।  उल्लेखनीय है कि सुनीता चोकन ने सन 2011 में विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउन्ट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराकर भारत और भारतीय सेना बीएसएफ का झंडा लहराकर सेना का नाम बुलंद किया था । सुनीता को देश के राष्ट्रपति ने भी नारी शक्ति अवार्ड से सम्मानित किया और हरियाणा सरकार ने सुनीता को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एंबेसेडर भी बनाया हुआ है। सुनीता ने 29 अगस्त को खारदुंगला चोटी पर पहुँच कर अपना यह सोलो साईकिल एक्सपीडिशन पूरा किया और 30 अगस्त को हवाई यात्रा से रेवाड़ी पहुँच गई थी।
संवाददाता से सुनीता ने अपने वो अनुभव साझा किए जिनकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

पर्स व आईडी हुई चोरी

सुनीता ने बताया कि एक जगह उसका किसी ने पर्स चोरी कर लिया जिसमे लगभग 25 हजार रूपये नकद और पहचान पत्र आदि दे । बिना पैसों के यात्रा करना बहुत कठिन था मगर जनता ने उन्हें इतना प्यार और मदद की तो उन्हें पैसों की कोई कमी नहीं आई। सुनीता ने वहां के थाने में चोरी का मामला भी दर्ज कराया मगर उन्हें जो एफआईआर की कॉपी दी गई वो कन्नड़ भाषा में थी।

चिकित्सक बना पैसे का पुजारी तो भुट्टा बेचने वाली बुजुर्ग बनी मानवता की पुजारी।

महाराष्ट्रा के खंडाला में एक ऐसे चिकित्सक का भी सामना करना पड़ा जिसमें मानवता नाम की कोई चीज ही नहीं थी । साइकलिंग के दौरान जब सुनीता घायल हो गई तो वह पूना हाइवे स्थित एक सपना हस्पताल में फर्स्टएड के लिए पहुंची । सुनीता अपने रुपये व साईकिल घटना स्थल पर ही छोड़ पैदल हस्पताल पहुंची थी। हस्पताल के चिकित्सक ने सुनीता की कोहनी पर लगी चोट पर कुछ टांके लगाए और एक हजार रूपये फ़ीस मांगी । सुनीता ने चिकित्सक को अपनी यात्रा का पूरा व्रतांत सुनाया और चिकित्सक से कुछ फ़ीस कम करने का आग्रह किया मगर निर्दयी चिकित्सक ने सुनीता की एक नहीं सुनी और उसे वहां से नहीं जाने दिया । सुनीता ने अपनी जेब टटोली तो उसे 700 रुपये मिले जो उस चिकित्सक को दे दिए मगर चिकित्सक ने सुनीता पर कोई रहम नहीं खाया और बाकी पैसे उसे तुरंत अदा करने के लिए बोला तब सुनीता ने अपनी बहन को फोन कर चिकित्सक के खाते में पैसे डालने के लिए बोला और अपना फोन नंम्बर भी दिया की आप क बकायाे पैसे मिल जायेंगे तब जाकर चिकित्सक ने पीछा छोड़ा। 
वहीं इस के विपरीत सुनीता घायल अवस्था में बारिश से बचने के लिए एक भुट्टे भूनकर बेचने वाली महिला के खोमचे में पहुंची तो उस महिला ने अपना सारा प्यार सुनीता पर उडेल दिया। सुनीता को न केवल खाना, चाय और भुट्टा खिलाया बलिक उसकी गिरी हुई साईकिल को जो लगभग 2 किलोमीटर दूर पड़ी हुई थी उसे भी उठा कर लाई । सुनीता उस बुजुर्ग महिला इमर दीपक कदम के इस प्यार को कभी नहीं भुला सकती है।

बड़ी बहन की मदद के लिए पहुंची छोटी बहन

सुनीता को अकेले निकले एक माह से ऊपर निकले हुए हो गया था । परिवार भी चिंतित था सुनीता की छोटी बहन जिनि चोकन ने अपनी बहन की मदद करने की ठानी और वह भी फ्लाइट पकड़ मनाली पहुंच गई और वहां से एक साईकिल ले अपनी बहन की मदद के लिए पहुँच गई । जिनि ने बताया कि कब तक अकेला आदमी चलता रहेगा।आगे खतरनाक रास्ता भी था तो सुनीता का हौंसला बढ़ाने के लिए वह पहुँच गई और दोनों बहनों ने हँसते हँसते इस कठिन रास्ते को पार कर लिया। 
रेवाड़ी पहुँचने पर माता मणि देवी ने दोनों बहनों की आरती उतार उनका स्वागत किया ।

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