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डिजिटल तिलिस्मी दुनिया के आपातकाल से लगी जिंदगी पर ब्रेक

प्रदीप दलाल | August 31, 2017 08:56 PM
प्रदीप दलाल


डिजिटल तिलिस्मी दुनिया के आपातकाल से लगी जिंदगी पर ब्रेक

प्रदीप दलाल

पिछले 7 दिनों के डिजिटल आपातकाल के बाद आज फिर से इंटरनेट शुरू हो गया। नेट क्या शुरू हुआ मानों मुँह मांगी मुराद ही पूरी हो गई हो। हो भी क्यों ना, आजकल पूरी दुनिया जो डिजिटल वर्ल्ड बन गई है। इंटरनेट शुरू होने के साथ ही एक बार फिर से शुरू हो गई युवाओं की तिलिस्मी दुनिया, जिस दुनिया में वह इतना मशगूल हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कोई भी उनके पास बैठा है या कोई उनसे बात करना चाहता है। बस वह तो लगे हैं इस डिजिटल तिलिस्मी दुनिया में, वर्तमान में पूरी दुनिया पर इंटरनेट का नशा इस कदर छाया है कि जो छूटने का नाम ही नहीं ले रहा। आपात कारणों से जब इंटरनेट बंद होता है तो सब ऐसा महसूस करने लगे हैं। मानो उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा छूट गया हो। इंटरनेट के शुरू होने की सूचना जैसे ही युवाओं को मिली। मानो एक आपातकाल का अंत हुआ हो। इस दौरान हर कोई मानो बेगाना हो गया हो। हो भी क्यों ना, जो फोन हर समय हाथ में रहता था। जिस फोन पर हर समय नजरें किसी निशानेबाज की तरह गड़ी रहती थी और अंगुलियाँ तो मानों जादूगर की तरह चलती नजर आती थी। लेकिन वह फोन बिना इंटरनेट के पिछले 7 दिनों में धरा का धरा नजर आया। हर समय सोशल मीडिया पर मशगूल रहने वाला युवा वर्ग डिजिटल रूपी तिलिस्मी दुनिया में मानो अपना अस्तित्व भुला चुका हो। वह पल-पल इंटरनेट के लिए तड़पता सा नजर आया। जो मोबाइल फोन हर समय चार्जिंग पर लगे दिखते थे। इंटरनेट के आपातकाल के दौरान वह जेब में ही नजर आए। जेब में बज़ते और घनघनाते फोन को मानो सांप सूंघ गया हो। इंटरनेट के मायाजाल में पागल आज का युवा ओर रातों की तरह जागता नहीं बल्कि चैन की नींद लेता नजर आया। अब उसके पास अपने परिवार अपने मित्रों को देने के लिए समय भी था। परिवार वालों की तो मानो इंटरनेट बंद होने के साथ ही मुराद पूरी हो गई हो। हालांकि इंटरनेट बंद होने से नुकसान भी बेहद हुआ। शिक्षा के लिए इंटरनेट प्रयोग करने वालों को इंटरनेट के बंद होने का बेहद नुकसान हुआ। कई स्टूडेंट इंटरनेट से ही स्टडी करते हैं। इससे उन्हें बेहद परेशानी का सामना करना पड़ा। अगर हम कल्पना करें कि आज के समय में बिना इंटरनेट के जीना पड़ जाए तो हमारा जीवन कैसा होगा। तो हम सोच कर भी सिहर उठते हैं कि बिना नेट के जिंदगी कैसी होती होगी। लेकिन हम यह नहीं सोचते कि उस तिलिस्मी दुनिया ने हमारी जिंदगी में कुछ इस कदर दखल दिया है कि वह सभी रिश्ते नाते सुख-दुख और हर चीज को निगल गया हो। इंटरनेट के मायाजाल की तिलस्मी दुनिया का नशा कुछ ऐसा है कि मानो हमारे सर से उतरने का नाम ही नहीं ले रहा हो। कहा जाता है कि किसी भी चीज की अति बेहद खतरनाक होती है। बढ़ते मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। बढ़ती बीमारियां, बढ़ता मानसिक तनाव किसी से छिपा नहीं है। अगर सोचा जाए तो यह किसकी देन है। यह हमें समझना होगा। जो समय पहले माता-पिता, परिवार और मित्रजनों के साथ हँसते-हँसाते बीतता था। आज वह समय मानो खत्म हो चुका हो। वर्तमान समय में किसी से पूछ लो, किसी के पास समय ही नहीं है क्योंकि वह सारा समय मोबाइल और इंटरनेट की बलि चढ़ जाता है। जो लोग इंटरनेट प्रयोग नहीं करते वह सामने सामने बैठे-बैठे देखते रह जाते हैं लेकिन युवा तो मानो अपनी एक अलग सी तिलस्मी दुनिया में खोया हो। जहां उनके पास न तो किसी से बात करने का समय है और ना ही किसी से सुख-दुख बांटने का समय, बस वह तो अपनी एक अलग सी तिलिस्मी दुनिया में खोए हैं। तिलिस्मी दुनिया में उनके ना जाने कितने ही दोस्त हैं लेकिन यह दोस्त भी तिलिस्मी दुनिया की तरह तिलिस्मी ही हैं। जो आपस में कभी एक-दूसरे से मिले हो, या जानते हो और ना जानते हो लेकिन सब है कि बस लगे हैं सोशल मीडिया पर, हमारे सर चढ़कर बोल रहा है इंटरनेट का नशा। अगर इस तिलिशमि दुनिया का नशा इस तरह ही हमारे ऊपर चढ़ता रहा तो आने वाले समय में इसके और भी दुष्प्रभाव देखने को मिलेंगे। जो हमारे स्वास्थ्य और मानसिकता पर प्रभाव तो डालेंगे ही इसके साथ ही वह प्रभाव डालेंगे हमारे समाज और हमारी दुनिया पर, वह दुनिया जिसमें हम रहते हैं। यह इंटरनेट की तिलिस्मी दुनिया की तरह किसी तिलिस्म जाल में जकड़ी हुई नहीं है बल्कि इस दुनिया के लोग हमारे यहां आस-पास रहने वाले वह लोग हैं जो हमारे लिए सब कुछ करते हैं लेकिन इस तिलिस्मी दुनिया के चक्कर में हमारे पास आज उनके लिए कोई समय ही शेष नहीं बचा है। इस तिलिस्मी दुनिया के मकड़जाल में अगर हम इसी तरह उलझते रहे तो हमारे आस पास की दुनिया भी इस मकड़जाल में उलझ कर रह जाएगी। आज जिनको हम समय नहीं देते। कल उनके पास भी हमारे लिए कोई समय नहीं होगा। समय है तिलिशमि दुनिया को समझने का और उसके प्रयोग को समझने का भी, ताकि हमारी दुनिया में हँसी-खुशी बनी रहे।

 
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