Friday, February 22, 2019
BREAKING NEWS

Fashion/Life Style

"पतली छरहरी थी वो काया"

October 23, 2017 04:50 PM
अटल हिन्द ब्यूरो
     
"पतली छरहरी थी वो काया" 
 
काले कजरारे से नयनों वाली, ऊपर से  मद था छाया।
यौवनं का श्रृंगार उस पर,पतली छरहरी थी वो काया।
|
 
    
:-
कटि मृग सी थी उसकी, मुख पर थी उसके लाली छाई।
     
पंखुड़ियों से होंठ थे उसके, गज सी उसने चाल थी पायी
     
कमर पर उसके काली वेणी, नागिन सी लहराती जाए।
     
मस्त मतवाली 
 
झूम रही
 
,बेल जैसी वो बल खाये।
देख मेरा मन हुआ बावरा,अजब सा नशा था छाया।
यौवन का श्रृंगार उस पर,पतली छरहरी थी वो काया।।
     :-
कमलनाल सी बाहें उसकी, हँसी में उसकी थी किलकारी।
       
कपोल सुर्ख लाल थे उसकेफूलों की जैसे वो फुलवारी।
       
कोयल किसी वाणी उसकी,मेरे हृदय को चीर गई।
       
शीतल जल सा हुआ हृदय मेरा, सारी तन की पीर गयी।
नजर भर जब उसको देखा, मदिरा का प्याला छलक आया,
मेरा मन तो झूमे बावरा, पतली छरहरी थी वो काया।।।
    
           
 
 "सुषमा मलिक"

Have something to say? Post your comment

More in Fashion/Life Style

व्यर्थ समझ फेंकी जाने वाली लकड़ी को उपयोगी वस्तुओं में तब्दील कर रहे अरशद

युवती ने नन्दोई पर रेप का आरोप जड़ किया ब्लैकमेल

बेटियां समाज की सबसे बड़ी पूंजी, बढ़ाती है सम्मान : दीपक सहारण

ऋषिकेश की दीया पांडेय चुनी गई फैशन एक्स क्वीन

फैशन डिजायनिंग में स्वर्णिम भविष्य निर्माण की अपार संभावना : ललिता

ब्यूटी-पार्लर की कार्यशाला के दूसरे दिन सुशीला ने छात्राओं को फेशियल करना सिखाया

जींद प्रशासन ने रूकवाई नाबालिग लडके की शादी

रंगीला हरियाणा देश की खातिर जान लुटा दे ना सीखा डर जाणा

कल से शुरू होगा 12 स्थित हूडा कंनेंशन सेंटर में चार दिवासीय थियेटर फेस्टिवल

साइकिल चलाने से बचेगा पर्यावरण-अजय क्रांतिकारी