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..तू सामने आता है तो तेरा सजदा कर लेता हूं

November 06, 2017 06:20 PM
रणबीर रोहिल्ला
..तू सामने आता है तो तेरा सजदा कर लेता हूं
विजय वर्धन की कविताओं और पदमजीत अहलावत के मुरथल यूनिवर्सिटी के सभागार में आयोजित हुआ कार्यक्रम सजदा
फोटो  06एसएनपी1 : सोनीपत। विजय वर्धन की शायरी कार्यक्रम में मौजूद शायर। 
रणबीर  रोहिल्ला, सोनीपत। न नमाज आती है मुझे न वजू आता है, तू सामने आता है तो तेरा सजदा कर लेता हूं। मशहूर शायर मोहम्मद अली जहूर की इन लाइनों को जब वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विजय वर्धन ने पेश किया तो दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्विद्यालय के सभागार में मौजूद हजारों लोगों की भीड़ ने वाहवाही के साथ उनका स्वागत किया। रविवार शाम को यूनिवर्सिटी में यह मौका था विजय वर्धन की शायरी और मशहूर गायक पदमजीत अहलावत के गीतों की जुगलबंदी का। 
मशहूर शायर गुलजार साहब के साथ हुई बातचीत को शब्दों में बयां करते हुए वर्धन ने कहा कि दो लब्ज कागज पर उतार कर चीख भी लेता हूं और आवाज भी नहीं आती। उन्होंने कहा कि कुछ लम्हे हमेशा जिंदा रहते हैं बूढ़े नहीं होते रिश्तों की तरह, उनके चेहरे पर झुर्रिया नहीं गिरती, वो चलते रहते हैं गिरते रहते हैं। 
कार्यक्रम में मां के महत्व को दिखाते हुए उन्होंने शब्दों में बयां किया और कहा कि मैने जन्नत नहीं मां देखी हैं। जज्बातों को कुरेदते हुए श्री वर्धन ने कहा कि हमारे ही दिल में ठिकाना चाहिए था तो फिर तूझे जरा पहले बताना चाहिए था, चलो हम ही सही सारी बुराईयों के सबब, मगर तूझे भी जरा सा निभाना चाहिए था, अगर नसीब में तारीखियां ही लिखी थी तो फिर चराग हवाओं में जलाना चाहिए था। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सफर में लौट जाना चाहता है एक परिंदा आशियाना चाहता है। कोई स्कूल की घंटी बजा दे कोई एक बच्चा मुस्कराना चाहता है। हमारा हक दबा रखा है जिसने सुना है वो मौलवी हज पर जाना चाहता है। इसी बीच मशहूर गायक पदमजीत अहलावत ने अपने गीतों के माध्यम से प्रस्तुती दी। सूफियाना अंदाज में दी इस प्रस्तुती में उन्होंने पुराने दिनों की याद दिलाई। इसके साथ ही हरियाणवी चुटकुलों के माध्यम से भी उन्होंने दर्शकों को गुदगुदाने को मजबूर कर दिया।   

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