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क्या तुम जिंदा हो❓अगर यही जिंदगी है तो मौत क्या होगी❓*🍃

राजकुमार अग्रवाल | November 28, 2017 09:04 AM
राजकुमार अग्रवाल

 


और तुम क्या खाक जिंदा हो!
तुम्हारी जिंदगी क्या है?
एक धोखा है। नाममात्र को जिंदा हो। खा लिया, पी लिया,उठ लिए, सो लिए, चल लिए, काम कर लियाः सांस आयी,सांस गयी; सत्तर साल यूं गुजर गए जैसे नदी में पानी बह जाए;और फिर एक दिन मिट्टी में गिर गए। तुम्हारी जिंदगी क्या है! इस जिंदगी को अभी शाश्वत का कुछ भी तो पता नहीं। यह जिंदगी तो खिलौनों में उलझी है। इस खिलौनों में उलझी जिंदगी को जिंदगी नहीं कह सकते।
दुनिया जिसे कहते हैं, बच्चे का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है.
अच्छा—सा कोई मौसम, तन्हा—सा कोई आलम,
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है!
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है.
ये वक्त जो तेरा है ये वक्त जो मेरा है,
हर गाम पे पहरा है, फिर भी इसे खोना है.
गम हो कि खुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है, हंसना है न रोना है.
आवारा मिजाजी ने फैला दिया आंगन यों,
आकाश की चादर है, धरती का बिछौना है.
दुनिया जिसे कहते हैं, बच्चे का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है.
इस दुनिया का अद्भुत नियम है—मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है! जो तुम्हें मिल जाता है, वही मिट्टी हो जाता है। तुम्हारा हाथ सोने को लगा कि वह भी मिट्टी हो जाता है! तुम इतने मुर्दा हो कि तुम्हारे हाथ में जिंदगी आते—आते मौत हो जाती है। तुमने जो भी पा लिया, सब बेकार हो गया है। हां, आकांक्षा भटकती है दूर—दूर। जो नहीं मिलता है......दूर के ढोल सुहावने मालूम पड़ते हैं......और उसके लिए तुम दौड़ते रहते, दौड़ते रहते—दौड़ते—दौड़ते गिरते हो एक दिन, मिट जाते हो एक दिन। दूसरों को गिरते देखते हो मगर तुम्हें यह खयाल नहीं आता कि मुझे भी गिरना है। दूर जो है वह सोना मालूम पड़ता है। जो नहीं मिला, सोना मालूम पड़ता है; हाथ लगते ही मिट्टी हो जाता है।
इसे तुम जिंदगी कहोगे?!
अगर यही जिंदगी है तो फिर मौत क्या होगी? मौत और क्या हो सकती है? जिंदगी तो वह है जहां शाश्वत का अनुभव हो; जहां परमात्मा भीतर विराजमान हो; जहां उसका दीया जले—बिन बाती बिन तेल! जो जलता है तो है, लेकिन फिर बुझता नहीं। जहां आनंद की अहर्निश वर्षा हो! जहां अमृत झरे! जब तक तुम ऐसे शाश्वतता से परिचित न हो जाओ, जिसकी कोई मृत्यु नहीं है;

(OSHO)

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