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कत्थक लोक नृत्य के दीवाने है अंग्रेज

December 08, 2016 06:12 PM

कत्थक लोक नृत्य के दीवाने है अंग्रेज
 भारतीय संस्कृति और कला के दिवाने है कनाडा-रूस के लोग, भारतीय मूल के वैशाली व हेमंत कनाडा में अंग्रेजों को सिखाते कत्थक 
 कुरुक्षेत्र 8 दिसम्बर भारतीय संस्कृति और कत्थक लोक नृत्य के अंग्रेज दीवाने है, बेशक अंग्रेज हिन्दी को नहीं जानते लेकिन हिन्दूस्तान की संस्कृति को बहुत मोहब्बत करते है। इसलिए कनाडा में भारतीयों से ज्यादा कनाडा, रूस, चीन सहित अन्य देशों के लोग भारतीय लोक नृत्यों को बेहद शौक के साथ सीखते है। इन लोगों को भारतीय संस्कृति के रंग में रंगने के लिए ही पिछले 16 सालों से लगातार प्रयास कर रहे है।

 

 
> कनाडा में भारतीय संस्कृति का परचम फहराने वाली वैशाली और हेमंत ने वीरवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड कार्यालय में पत्रकारों से विशेष बातचीत की है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव में महाभारत से जुड़े अहम लम्हों को तरोताजा करने के लिए पर्यटकों के लिए विशेष डांस ड्रामा तैयार करके लाएं है। इस मारकम्बा की प्रस्तुती का विषय जन्म से लेकर गीता ज्ञान रखा गया है। इस प्रस्तुती का प्रीमियर अगस्त माह में कनाडा में किया और कुरुक्षेत्र की भूमि पर दूसरी प्रस्तुती करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

 


 उन्होंने कहा कि कनाडा में संस्कृति के अलग-अलग रंग है। लेकिन इन तमाम रंगों पर भारतीय संंस्कृति का रंग अलग नजर आता है। अब अंगे्रज भी हिन्दूस्तानियों को भारतीय संस्कृति के कारण विशेष तवज्जों देने लगे है।

 

अंग्रेज भारतीय संस्कृति को लेकर बहुत भावुक है और पवित्रता के साथ संस्कृति को सीखने का प्रयास करते है। अंग्रेजों को कत्थक नृत्य व वॉकल सिखाने के लिए पिछले 16 सालों से प्रशिक्षणशाला चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव है और भारतीयों पर अंग्रेजों का प्रभाव है।

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