Friday, February 22, 2019
BREAKING NEWS

Fashion/Life Style

"प्रेम की स्वतंत्रता' और भारतीय मन समझता है "यौन की स्वतंत्रता'।

December 03, 2017 02:15 PM
राजकुमार अग्रवाल

दमित भारतीय चित्त ओशो की प्रेम-स्वतंत्रता को यौन-स्वतंत्रता समझ बैठा है ॥
मैं कहता हूं "प्रेम की स्वतंत्रता' और भारतीय मन समझता है "यौन की स्वतंत्रता'।
यह भारतीय मन का रोग है। तुम्हारा दमित चित्त प्रेम का अर्थ तत्क्षण यौन करता है। तुम्हारे लिए प्रेम की कोई और अवधारणा नहीं रही। तुम्हारे लिए प्रेम हमेशा कामवासना बन जाता है। यह तुम्हारे रुग्न चित्त का सबूत है।

(SUBHEAD)
मैंने कभी यौन स्वतंत्रता की बात नहीं कही। लेकिन सारे भारतीय अखबार मेरे ऊपर यौन-स्वतंत्रता का सिद्धांत थोपते हैं। वे अपना प्रक्षेप मेरे ऊपर करते हैं। मैं कहता हूं: प्रेम की स्वतंत्रता चाहिए। मैं कहता हूं: वह विवाह अनैतिक है जो प्रेम के आधार पर नहीं हुआ है। उस स्त्री से बच्चे पैदा करना अनाचार है, उस पुरुष से संबंध रखना अनाचार है, जिससे प्रेम नहीं। लेकिन हमारे सारे विवाह प्रेमशून्य हैं। कोई पोंगा पंडित, कोई ज्योतिषी जन्म-कुंडलियां मिला देता है। तारों में कसूर मत खोजो। तारों पर उत्तरदायित्व मत छोड़ो। बेचारे निरीह तारे कुछ बोल भी नहीं सकते। ग्रह-नक्षत्र कहें भी तो क्या कहें? तुम्हारा जो दिल हो वैसा बना लो। और परिणाम देखते हो? तुम्हारी जन्म-कुंडलियां मिला-मिला कर भी क्या परिणाम हुआ है विवाह का? इससे ज्यादा सड़ी कोई संस्था नहीं है। लोग सड़ रहे हैं मगर अपने मुखौटे लगाए हुए हैं, छिपाए हुए हैं अपने को।

(SUBHEAD1)
जहां प्रेम नहीं है वहां नर्क है और जहां प्रेम है वहां स्वर्ग है।
मैं प्रेम की स्वतंत्रता का पक्षपाती हूं। लेकिन जब भी भारतीय सुनता है, वह तत्क्षण समझ लेता है कि यौन की स्वतंत्रता है। क्योंकि उसके लिए प्रेम का कोई अर्थ और है ही नहीं। उसके भीतर तो यौन उबल रहा है। उसके भीतर तो वासना ही वासना भरी हुई है।...
मैं जरूर प्रेम की स्वतंत्रता का पक्षपाती हूं, क्योंकि जिस व्यक्ति के जीवन में प्रेम भी स्वतंत्र नहीं है उसके जीवन में क्या खाक और कोई स्वतंत्रता होगी! प्रेम तो जीवन का फूल है--इस जीवन की सर्वाधिक बहुमूल्य संपदा है। वह तो स्वतंत्र होना ही चाहिए। उसकी स्वतंत्रता से ही तो किसी दिन प्रार्थना का जन्म होगा। और प्रार्थना से किसी दिन परमात्मा का अनुभव होगा। प्रेम ही अवरुद्ध हो गया तो प्रार्थना अवरुद्ध हो गयी। गंगोत्री पर ही मार डालो गंगा को...आसान है वहां मारना, क्योंकि गंगोत्री छोटी-छोटी बूंद बूंद टपकता है पानी वहां। गौमुख से निकलती है। अब गौमुख से कोई बहुत ज्यादा बड़ी धारा तो निकल नहीं सकती। गौमुख को रोका जा सकता है, बड़ी आसानी से रोका जा सकता है, काशी में आ कर गंगा को रोकना मुश्किल हो जाएगा। और गंगा सागर में जब पहुंचती है उसके पहले तो रोकना बिलकुल असंभव हो जाएगा। लेकिन गंगोत्री में रोकना बहुत आसान है।

(SUBHEAD3)
प्रेम गंगोत्री है--और परमात्मा गंगा सागर। और प्रार्थना यूं समझो कि बीच का तीर्थ--प्रयाग समझो। लेकिन जब मैं प्रेम की स्वतंत्रता की बात करता हूं तो अनिवार्यरूपेण लोग समझते हैं मैं यौन की स्वतंत्रता की बात कर रहा हूं। और कारण यह है कि उनके भीतर दमित वासना "प्रेम' शब्द सुनते ही उभरने लगती है। प्रेम शब्द ही काफी है--शब्द ही काफी है।
ज्यूं मछली बिन नीर, प्रवचन~९, ओशो

Have something to say? Post your comment

More in Fashion/Life Style

व्यर्थ समझ फेंकी जाने वाली लकड़ी को उपयोगी वस्तुओं में तब्दील कर रहे अरशद

युवती ने नन्दोई पर रेप का आरोप जड़ किया ब्लैकमेल

बेटियां समाज की सबसे बड़ी पूंजी, बढ़ाती है सम्मान : दीपक सहारण

ऋषिकेश की दीया पांडेय चुनी गई फैशन एक्स क्वीन

फैशन डिजायनिंग में स्वर्णिम भविष्य निर्माण की अपार संभावना : ललिता

ब्यूटी-पार्लर की कार्यशाला के दूसरे दिन सुशीला ने छात्राओं को फेशियल करना सिखाया

जींद प्रशासन ने रूकवाई नाबालिग लडके की शादी

रंगीला हरियाणा देश की खातिर जान लुटा दे ना सीखा डर जाणा

कल से शुरू होगा 12 स्थित हूडा कंनेंशन सेंटर में चार दिवासीय थियेटर फेस्टिवल

साइकिल चलाने से बचेगा पर्यावरण-अजय क्रांतिकारी