Sunday, February 17, 2019
Follow us on
BREAKING NEWS
संगठन सर्वोपरी होता है और इससे बडी ताकत नहीं-डा. श्रीकांतएक्शन मूढ में कांग्रेस,नए प्रभारी लोकसभा के उम्मीदवारों की सूचि तैयार करनें में जूटे,पार्टी पदाधिकारियों से ले रहे है प्रदेश अध्यक्ष की रायडॉक्टरों का एनपीए 20 प्रतिशत बढ़ामेले के अंतिम दिन रही भारी भीड़, रामकुमार के बैगपाईपर की धुन पर युवाओं की खूब मस्ती।रा.व.मा. विद्यालय बुडीन की दो छात्राओं का NMMS में हुआ चयनएग्री समिट-2019:राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 25 किसानों को 1 लाख रुपए राशि के साथ दिया कृषि रत्न पुरस्कारराज्य सरकार पर्यटन को बढावा देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है-राम बिलास शर्मारातभर अंधेरे में डूबा रहता है सतनाली का मुख्य बाजार, स्ट्रीट लाइटें खराब होने से कस्बे की गलियां व मुख्य चौक रहते है अंधकारमय
 
 
Fashion/Life Style

कामवासना के प्रति तुम्हारा विरोध मिट जाए।

राजकुमार अग्रवाल | December 11, 2017 03:41 PM
राजकुमार अग्रवाल

 

कामवासना के प्रति तुम्हारा विरोध मिट जाए।

मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि श्वास तुम पूरी तभी ले सकोगे, जब कामवासना के प्रति तुम्हारा विरोध मिट जाए। तुम श्वास भी ऊपर-ऊपर लेते हो; छाती के ऊपरी हिस्से से लेते हो, भीतर तक नहीं क्योंकि अगर श्वास भीतर तब जाएगी, तो वह काम के केंद्र पर चोट करती है।

मेरे पास लोग आते हैं। जब वे ठीक से सक्रिय ध्यान करते हैं, तो वे कहते हैं: क्या मामला है? हम तो सोचते थे ब्रह्मचर्य आएगा--वासना जग रही है। मैं उनसे कहता हूं: जगेगी, क्योंकि अब तक तुमने दबाया है। पर जगने दो, भयभीत मत होओ। उसे जाग ही जाने दो, ताकि भय मिट जाए। तुम उससे गुजर जाओ। और ध्यान तुम किए जाओ। क्योंकि वासना की ही शक्ति जब ऊपर चढ़ेगी, तभी ब्रह्मचर्य बनेगी।

ब्रह्मचर्य काम का दुश्मन नहीं है--काम का रूपांतरण है। रूपांतरण के लिए पहले तो वासना का जगना जरूरी है। शक्ति हो तभी तो रूपांतरित होगी; शक्ति ही न हो तो रूपांतरण वैसा? तो तुम भयभीत मत होओ।

तुम्हारे साधु-संत तुम्हें सब तरफ से भयभीत करते हैं। एक बात सूत्र की तरफ समझ लो: जो तुम्हें भयभीत करे, उससे बचना। जो तुम्हें निर्भय करे, उकसे पास जाना।

गुरजिएफ के पास कोई जाता तो वह पहला करता कि शराब पिला देता--इतना पिला देता कि लोग पूछते कि यह किसलिए करते हैं? तो वह लोगों को कहता कि अब बैठ जाओ। जब आदमी शराब पी लेता तो सारा रूप बदल जाता उस आदमी का। क्योंकि जो-जो दबा पड़ा है, वह बाहर निकलना शुरू हो जाता है। शराब जब तक नहीं पी थी तब तक रात-राम, राम-राम कर रहा था, अब वह गालियां देना शुरू कर देता है।

तुम जानते हो शराबियों को? भला आदमी, लेकिन शराब पीकर...तुम कहते हो शराब की वजह से कर रहा है। कोई शराब गाली को पैदा नहीं कर सकती। कोई केमिस्ट्री सिद्ध नहीं कर सकती कि शराब से गाली कैसे पैदा हो सकती है। गाली भीतर दबी पड़ी थी, शराब ने बंधन हटा दिया, गाली उठ कर ऊपर आ गई। अब राम-राम नहीं कहता, राम चदरिया उतार कर फेंक देता है। अब तक बिलकुल शांत मालूम पड़ता था, एकदम क्रोधित हो जाता है!
मधुशाला में जाकर देखो, वहां तुम्हें असली तस्वीर दिखाई पड़ेगी आदमी की। वही तुम्हारी असली तस्वीर भी है।

तुम सिर्फ छिपाये खड़े हो। इसलिए तो तुम डरते हो शराब पीने से, कि कहीं शराब पी ली तो प्रकट हो जाएगा। ...कभी भांग-वगैरह पीकर देखी, अनर्गल आदमी बकने लगता है! वह सब भीतर दबा पड़ा है। भांग कैसे उसे पैदा करेगी? भांग सिर्फ इतना करती है कि नियंत्रण को हटा लेनी है। तुम भूल गए--समाज, संस्कार, सभ्यता--सब भूल गए; सब तुम शुद्ध आदमी हो गए, जैसे तुम हो भीतर। अब शुद्ध आदमी बाहर प्रकट होने लगा। तो जब तुम होश में थे, तब तुम कह रहे थे कि बड़ी कृपा की कि आप आए! बड़ा शकुन हुआ! आप जब आते हैं तो घर में मंगल की वर्षा शुरू हो जाती है। आपका चेहरा ही देखकर फूल खिल जाते हैं। फिर शराब पी गए और कहने लगे--निकलो बाहर! इस शकल को सुबह से यहां ले आए! जब भी तुम दिखायी पड़ जाते हो, तभी दिन खराब जाता है।
यही भीतर दबा पड़ा था, वह बाहर आ गया।

गुरजिएफ पहले भीतर के आदमी को बाहर लाता है। वह कहता है, पहले यह जान लेना जरूरी है कि यह आदमी भीतर कैसा है! फिर उस हिसाब से इसकी विधियां तय करेंगे। तुम सक्रिय ध्यान करते हो, कुंडलिनी करते हो, और ध्यान करते हो--उसमें तुम्हारे भीतर जो-जो दबा है, वह बाहर आ जाता है। गुरजिएफ शराब पिलाता था, मैं उसे जरूरी नहीं मानता। सक्रिय ध्यान बाहर ले जाता है। देखो! सक्रिय ध्यान में जो आदमी बिलकुल शांत था। चीख रहा है, पुकार रहा है! जो आदमी बिलकुल भूला मालूम होता था, कि कभी चोट नहीं करेगा, वह एकदम घूंसे तान रहा है हवा में, युद्ध कर रहा है; जैसे किसी को मार डालेगा। यह असली आदमी है।

शराब की कोई जरूरत नहीं है, थोड़ा नियंत्रण ढीला करने की जरूरत है, और चीज बाहर आ जाएगी। यही असली है और इसी को बदलना है। वह जो नकली ऊपर-ऊपर है, वह तो रंग-रोगन है। उसका कोई भी मूल्य नहीं है। उससे कुछ सार भी नहीं है। उसमें बदलाहट करने से कुछ बदलाहट होगी भी नहीं। असली को ही बदला जा सकता है, क्योंकि वही शक्ति के स्रोत हैं। 
🌹ओशो 🌹

 
Have something to say? Post your comment
 
More Fashion/Life Style News
व्यर्थ समझ फेंकी जाने वाली लकड़ी को उपयोगी वस्तुओं में तब्दील कर रहे अरशद
युवती ने नन्दोई पर रेप का आरोप जड़ किया ब्लैकमेल
बेटियां समाज की सबसे बड़ी पूंजी, बढ़ाती है सम्मान : दीपक सहारण
ऋषिकेश की दीया पांडेय चुनी गई फैशन एक्स क्वीन
फैशन डिजायनिंग में स्वर्णिम भविष्य निर्माण की अपार संभावना : ललिता
ब्यूटी-पार्लर की कार्यशाला के दूसरे दिन सुशीला ने छात्राओं को फेशियल करना सिखाया
जींद प्रशासन ने रूकवाई नाबालिग लडके की शादी
रंगीला हरियाणा देश की खातिर जान लुटा दे ना सीखा डर जाणा
कल से शुरू होगा 12 स्थित हूडा कंनेंशन सेंटर में चार दिवासीय थियेटर फेस्टिवल
साइकिल चलाने से बचेगा पर्यावरण-अजय क्रांतिकारी