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डब्लूडब्लूई फाईटर सतेंद्र डागर उर्फ जीत रामा को उपायुक्त ने किया सम्मानित

रणबीर रोहिल्ला | January 09, 2018 06:11 PM
रणबीर रोहिल्ला

डब्लूडब्लूई फाईटर सतेंद्र डागर उर्फ जीत रामा को उपायुक्त ने किया सम्मानित
खली के बाद भारत के दूसरे डब्लूडब्लूई फाईटर हैं सतेंद्र डागर
अंतरराष्ट्रीय पहलवान भी रह चुके हैं
ढाई साल पहले अमेरिका में हुआ था तीन साल का करार
35 में से 32 फाईट जीतक बने सिरमौर
रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत।

वर्ष 2000 में जिले के गांव बाघडू के खेतों में अखाड़ा खोदकर पहलवानी की शुरूआत करने वाले जितेंद्र डागर आज खली के बाद जीत रामा के नाम से भारत के दूसरे प्रोफेसनल डब्लूडब्लूई के फाईटर बन चुके हैं। तीन बार हिंद केसरी का खिताब और 12 बार के नेशनल चैंपियन रहे सतेंद्र डागर अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। मंगलवार को सोनीपत पहुंचने पर उपायुक्त के मकरंद पांडुरंग ने सतेंद्र को गांव के लोगों के साथ अपने कार्यालय में बुलाया और गदा देकर उसे सम्मानित किया।
इस दौरान उपायुक्त के मकरंद पांडुरंग ने कहा कि सतेंद्र डागर ने डब्लूडब्लूई पहले अमेरिका में भी प्रसिद्ध था, लेकिन आज पहले खली और अब हमारे सोनीपत के सतेंद्र डागर की वजह से यह भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए गर्व की बात है। सतेंद्र द्वारा गांव के बच्चों के लिए कुश्ती के प्रशिक्षण के लिए इच्छा जताने पर उपायुक्त ने कहा कि बाघडू गांव में खेल स्टेडियम का निर्माण कार्य किया जा चुका है और उसमें जल्द ही मैट उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि गांव के युवाओं की एक समिति बने और वही स्टेडियम में गतिविधियों का संचालन करे। श्री पांडुरंग ने कहा कि सतेंद्र डागर गांव के युवाओं के लिए रोल माडल है।
35 में से 32 फाईट जीती
36 वर्षीय सतेंद्र डागर का कद छह फुट चार इंच है। सतेंद्र डागर ने बताया कि वर्ष 2000 में मिट्टी से कुश्ती शुरू करने के बाद पहली बार चंडीगढ़ गया तो कुश्ती का मैट देखा। यहां प्रैक्टिस करते हुए 12 बार जूनियर, सब जूनियर और सीनियर में नेशनल चैंपियन रहा। तीन बार हिंद केसरी और एशियन चैंपियनशीप में इंटरनेशनल में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद खुद डब्लूडब्लूई ने उनसे संपर्क किया और तीन साल का करार किया। फिलहाल वह अमेरिका के फ्लोरिडा के आरलेडो शहर में डब्लूडब्लूई की फाईट करते हैं। अब तक हुई 35 फाईट में से उसने 32 में जीत हासिल की। डब्लूडब्लूई ने एक बार फिर से उनके करार को तीन साल के लिए बढ़ा दिया है।
पहले भारत डब्लूडब्लूई की तरफ भागता था
सतेंद्र ने बताया कि डब्लूडब्लूई में नए युवाओं के लिए अच्छा भविष्य है और भारत से बहुत से युवा इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। कुछ लड़कियां भी हाल ही में इससे जुड़ी हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि पहले डब्लूडब्लूई में शामिल होने के लिए हम भारतवासी विश्व की तरफ भागते थे और अब पूरा विश्व हमारी तरफ देख रहा है। उन्होंने कहा कि मैने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस तरह की प्रतियोगिताओं में शामिल होने का मौका मिलेगा।

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