Friday, August 17, 2018
Follow us on
BREAKING NEWS
ढांड के बीपीआर स्कूल में राजकीय अवकाश के बावजूद लहराता रहा राष्ट्रीय ध्वजजब नए सांसदों को राजनीतिक शुचिता का पाठ पढाने हरियाणा आए वाजपेयीकन्या जन्म पर कुआं पूजन का आयोजन कर लोगों को किया प्रेरित18 अगस्त को हरियाणा बंद को लेकर किसानों व व्यापारियों से साधा संपर्कभारत में कोई नहीं है छोटा या बड़ा, सबको मिलकर करना चाहिए देशहित में कार्य: अमित यादववीर शहीदों की याद में तिरंगा यात्रा निकाल हर्षोल्लास व जोश के साथ मनाया गया स्वतंत्रता दिवससावधान, क्षेत्र में एक बार फिर पशु चोर गिरोह सक्रिय, गांव बारड़ा से चुराई दो भैंसगुरूकुल में मिलती है संस्कारवान शिक्षा: दुष्यंत चौटाला
Literature

31 जनवरी को चंद्रग्रहण ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दिखाई देगा, सुतक सुबह 08 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा

तोशाम विष्णु दत्त शास्त्री | January 30, 2018 02:57 PM
तोशाम विष्णु दत्त शास्त्री
31 जनवरी को  चंद्रग्रहण  ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दिखाई देगा, सुतक सुबह 08 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा 
 
विष्णु दत्त शास्त्री, 
 
 
ज्योतिषाचार्य पं. कुंज बिहारी शास्त्री 
तोशाम (भिवानी)। साल 2018 का पहला चंद्रग्रहण आज होगा। ज्योतिषाचार्य पं. कुंज बिहारी शास्त्री के अनुसार चंद्र ग्रहण का असर अलग-अलग पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह ग्रहण स्वास्थ्य समस्याएं लाएगा। इसलिए ज्योतिषियों के अनुसार उन्हें इसके कुछ उपाय करने चाहिए। कहा जाता है कि ग्रहण के किसी भी प्रभाव से बचने के लिए इस दौरान श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त का जाप करना चाहिए। इसके अलावा रोगों से बचने के लिए महामृत्युंजय मत्र का जाप करना चाहिए।ज्योतिषाचार्य पं. कुंजबिहारी शास्त्री ने बताया कि 31 जनवरी को साल 2018 का पहला ग्रहण माघ शुक्ल पूर्णिमा पर खग्रास चन्द्रग्रहण होगा। सुतक सुबह 08 बजकर 14 मिनट से शुरू होगा क्योंकि चन्द्र ग्रहण का सूतक12 घण्टे पूर्व लगता है यह ग्रहण पूरे भारतवर्ष में दिखाई देगा। चन्द्रग्रहण 31 जनवरी की शाम को 5 बजकर18 मिनट पर शुरू होगा और रात 8 बजकर 42 मिनट पर समाप्त होगा यानि ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 24 मिनट होगी। साल का लगने वाला यह पहला व पूर्ण चन्द्र ग्रहण होगा । ज्योतिषियों और विद्वानों की मानें तो चंद्रग्रहण के दौरान कुछ काम नहीं करने चाहिए, नहीं तो बड़ी हानी हो सकती है।
 
क्या है चंद ग्रहण...... 
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब वह चंद्रमा पर पडऩे वाली सूर्य की किरणों को रोकती है और उसमें अपनी छाया बनाती है। इस घटना को चंद्र ग्रहण कहा जाता हैण् इसे ब्लड मून भी कहा जाता है। वहींए विज्ञान के अनुसार यह एक प्रकार की खगोलीय स्थिति है जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं। इससे चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता हैए जिस वजह से उसकी रोशनी फि की पड़ जाती है।
 
क्या है पौराणिक मान्यता...... 
एक पौराणिक कथा के अनुसार एक बार समुद्र मंथन के दौरान असुरों और दानवों के बीच अमृत के लिए घमासान चल रहा था। इस मंथन में अमृत देवताओं को मिला लेकिन असुरों ने उसे छीन लिया। अमृत को वापस लाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और असुरों से अमृत ले लिया। जब वह उस अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर अमृत पिने के लिए बैठ गया। जैसे ही वो अमृत पीकर हटाए भगवान सूर्य और चंद्रमा को भनक हो गई कि वह असुर है। तुरंत उससे अमृत छिना गया और विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं। उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम के ग्रह पर गिरकर स्थापित हो गए। ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है, इसी वजह से उनकी चमक कुछ देर के लिए चली जाती है वहीं, इसके साथ यह भी माना जाता है कि जिन लोगों की राशि में सूर्य और चंद्रमा मौजूद होते हैं उनके लिए यह ग्रहण बुरा प्रभाव डालता है।
 
राशियों के अनुसार चंद्रग्रहण का प्रभाव-----
ज्योतिषाचार्य पं. कुंज बिहारी शास्त्री के अनुसार यह ग्रहण कर्क राशि वालो के लिए विशेष कष्टप्रद होगा क्योंकि कर्क राशि के चन्द्रमा पे ही यह ग्रहण है कर्क राशि के चन्द्र के ग्रहण का फल मेष के लिए कष्ट, वृष के लिए धनलाभ, मिथुन के लिए हानि, कर्क के लिए घात, सिंह के लिए हानि, कन्या के लिए लाभ, तुला के लिए सुख, वृश्चिक के लिए अपमान, धनु के लिए कष्ट, मकर के लिए स्त्री-पति कष्ट, कुंभ के लिए सुख, मीन के लिए चिंता का होगा । यह ग्रहण माघ पूर्णिमा को घटित हो रहा है अत: गंगा आदि पवित्र नदियों और अन्य तीर्थ स्थानों पर स्नान, दान , मंत्रजप का विशेष महत्व हो जाता है तो दान, होम, अनुष्ठान आदि का विशेष महत्व होगा, यह चन्द्र ग्रहण विकलांगो, आदिवासी और पंजाब के लिए कष्टप्रद है।
 
ग्रहण के वक्त क्या न करें----
1 - ग्रहण के वक्त खुले आकाश में ना निकलें, खासकर गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, रोगी और बच्चे।
2 - ऐसा कहा जाता है कि ग्रहण से पहले या बाद में ही खाना खाएं।
3 - किसी भी तरह का शुभ कार्य ना करें और पूजा भी ना करें इसी वजह से ग्रहण के दौरान मंदिर के द्वार भी बंद कर दिए जाते हैं।
 
ग्रहण के वक्त क्या करें.....
1 - दान करें दान में आटा, चावल, चीनी, दाल आदि दें।
 
2 - ग्रहण के बुरे प्रभाव से बचने के लिए दुर्गा चालीसा या श्रीमदभागवत गीता आदि का पाठ भी करें।
 
3 - जो लोग साढ़े-साती से परेशान हो तो शनि मंत्र का जाप करें या फि र हनुमान चालीसा पढ़ें।
 
 
 
 
Have something to say? Post your comment
More Literature News
सत्संग से हमारा मन भगवान की याद में रम जाता है- ब्रहमचारिणी साध्वी ऋषि महाराज
गीता में मनुष्य जीवन का रहस्य छिपा-स्वामी ज्ञानानंद
श्रद्धालुशक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर में विशाल भगवती जागरण संपन्न
नवरात्रों के 6वे दिन श्रद्धालुओं ने की माँ भगवती की आराधना
ओंकार महायज्ञ में बैठने से नहीं आता कभी असाहय रोग व अकाल कष्ट : शक्तिदेव
काली कमली वाला मेरा यार है, मेरे मन का मोहन तू दिलदार है
कैसे और कब मनाएं श्रीमहाशिवरात्रि 13 या 14 फरवरी को ?
एक पर्व के लिए दो-दो तिथियां भविष्य नहीं आएगी सामने
श्रीमद् भागवत कथा में दिखाया कृष्ण-सुदामा चरित्र नेकी कर दरिया में डाल: गोस्वामी
111 श्री रामायण पाठों का हुआ शुभारंभ