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नवीन जिन्दल ने देश को सदा नवीन ही दिया, कुरुक्षेत्र को क्यों न हो नाज़

राजकुमार अग्रवाल | March 09, 2018 06:00 PM
राजकुमार अग्रवाल

नवीन जिन्दल ने देश को सदा नवीन ही दिया, कुरुक्षेत्र को क्यों न हो नाज़


कैथल (राजकुमार अग्रवाल )

 

 जिस उम्र में एक आम आदमी की कल्पनाएं अधिक दौलत और शोहरत हासिल करने की होती है, उस उम्र में नवीन जिन्दल ने स्वयं को समाजसेवा को समर्पित कर दिया। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने की सौगात आम आदमी को दिलाने के बाद उन्होंने खेल, शिक्षा, कानूनी शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, आधुनिक स्वास्थ्य सेवा, युवा विकास, महिला सशक्तिकरण जैसे बुनियादी मुद्दों पर काम करके देश को स्वाभिमान-सम्मान का नवीन संदेश दिया। वर्ष 2006 में प्राइवेट मेंबर बिल के माध्यम से उन्होंने लोकसभा में खाद्य सुरक्षा कानून के लिए जंग शुरू की जिससे भारत में कोई भूखा न रहे। उनकी यह मेहनत रंग लाई और सही मायनों में समावेशी विकास का पौधा पनपने लगा। आज समाज के निर्बल तबकों के लिए सस्ता अनाज उपलब्ध है और यह तबका पेट भरकर अपने स्तर पर राष्ट्र को मजबूत करने के काम में जुट गया है। नवीन जिन्दल का कहना है कि जब पेट भरा होगा तभी कोई व्यक्ति सकारात्मक कार्यों के लिए प्रेरित होगा। उन्होंने कुरुक्षेत्र को अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना इसलिए कुरुक्षेत्र वासियों को अपने इस नेता पर नाज़ है।
वर्ष 1991 में उद्योग समूह ओपी जिन्दल ग्रुप को लोगों के दिलों में बसाकर सक्रिय राजनीति में आए श्री ओपी जिन्दल ने नवीन जिन्दल के प्रेरणास्रोत के रूप में काम किया। श्री ओपी जिन्दल की राजनीतिक सक्रियता से उन तबकों को विशेष लाभ हुआ जिनके मन में विकास के दीप प्रज्ज्वलित नहीं हुए थे और जिन्होंने अपनी लाचारी को ही अपनी नियति मान रखा था। दलित, पिछड़े, किसान, युवा और महिला समाज को श्री ओपी जिन्दल ने शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में योगदान करने के लिए प्रेरित किया। यही संस्कार युवा नवीन जिन्दल को मिले और उन्होंने देश और समाज को विकास पथ पर ले जाने का संकल्प ले लिया।
नवीन जिन्दल का जन्म 9 मार्च 1970 को हिसार में हुआ। उन्हें तिरंगा, सेना के बैंड की धुन और देशभक्ति की कहानियां बचपन से ही लुभाती थीं। 1992 में अमेरिका के टेक्सास एट डलास से एमबीए की पढ़ाई पूरी कर भारत आने के बाद उन्होंने रायगढ़ में अपनी फैक्ट्री का कामकाज संभाला तो अमेरिका की ही तरह उन्होंने अपनी फैक्ट्री में भी प्रतिदिन राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराना शुरू कर दिया जिसका वहां के जिला प्रशासन ने विरोध किया। इसके खिलाफ नवीन जिन्दल ने 10 साल तक जंग लड़ी और 23 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके साथ ही तिरंगा फहराने का अधिकार भारतीयों के मौलिक अधिकार में शामिल हो गया। यह नवीन जिन्दल की ही देन है कि आज हम गर्व के साथ प्रतिदिन अपना राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। अब तो हम अपनी शर्ट और अपने वाहनों में भी आदर सहित तिरंगा लगाकर देश के प्रति अपनी निष्ठा और भक्ति का प्रदर्शन करते हैं। नवीन जिन्दल की तिरंगा मुहिम आज भी जारी है। उन्होंने 2005 में फ्लैग फाउंडेशन की स्थापना की और करगिल से लेकर तिरुवनंतपुरम तक विशालकाय तिरंगा फहराया। फ्लैग फाउंडेशन के बैनर तले देश भर में इन विशालकाय तिरंगों की संख्या 69 तक पहुंच गई है। उनसे प्रेरित होकर अन्य संस्थाएं भी विशालकाय तिरंगा फहराने के कार्य में जुट गई हैं। इस मुहिम से निसंदेह पूरे देश में एक नई चेतना का संचार हुआ है। यही वजह है कि देश में आज भी एक पंक्ति गुनगुनाई जाती है-
नवीन तूने नवीन काम किया है
घर-घर में तिरंगा धाम किया है
वर्ष 2004 में नवीन जिन्दल कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने। उन्होंने सबसे पहले उन मां-बहनों की चिंता की जिन्हें रात के अंधेरे में खुले में शौच जाना पड़ता था। उन्होंने 2004 से 2009 के कार्यकाल में पूरे संसदीय क्षेत्र में 66 हजार से अधिक शौचालय बनवाए और लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया। आज कुरुक्षेत्र हरियाणा का सर्वाधिक स्वच्छ जिला है तो इसमें नवीन जिन्दल का भी बड़ा योगदान है।
नवीन जिन्दल ने स्वच्छता के साथ ही स्वस्थ कुरुक्षेत्र की मुहिम चलाई। उन्होंने गांव-गांव तक आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का काम किया। सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशाल मेडिकल कैंप लगाकर मुप्त दवाएं, परामर्श और अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में शल्य चिकित्सा की सुविधाएं भी उपलब्ध कराईं। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों का भी उन्होंने ख्याल रखा और गांव-गांव टीम भेजकर उनकी आंखों का इलाज कराया व मोतियाबिंद ऑपरेशन कराकर चार लाख से अधिक चश्मे बांटे। स्वास्थ्य के प्रति सजग नवीन जिन्दल ने संसद में धूम्रपान पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई और एयरपोर्ट पर रुपये को मान्यता दिलाई। पहले सिर्फ डॉलर ही मान्य था।
उन्होंने प्राथमिक, कानूनी और तकनीकी शिक्षा का महत्व पंक्ति के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचाने का समर्पित प्रयास किया। उन्होंने संसद से मिलने वाले अपने वेतन से कॉपियां खरीदकर पूरे संसदीय क्षेत्र में बच्चों को बंटवाई और हजारों बच्चों को तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के लिए न सिर्फ प्रेरित किया बल्कि उन्हें स्कॉलरशिप देकर योग्य नागरिक बनने में मदद भी की। उन्होंने कानूनी पेचीदगियों में उलझे परिवारों के लिए कानूनी शिक्षा प्रदान करने की मुहिम भी चलाई ताकि लोग अपने अधिकार और कर्त्तव्य दोनों समझ सकें। छोटा परिवार-सुखी परिवार और बेटियों को सम्मान दिलाने के लिए नवीन जिन्दल ने स्वयं गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाया। अपने महिला सशक्तिकरण अभियान तहत उन्होंने महिला स्वाभिमान केंद्रों के माध्यम से कौशल विकास प्रशिक्षण दिलाया। इसके अलावा युवाओं को प्रोत्साहित रखने के लिए नवीन जिन्दल ने जिम, बैडमिंटन, फुटबॉल, क्रिकेट किट बंटवाए ताकि वे स्वस्थ रहें और खेलों में करियर की ओर उन्मुख हों। नवीन जिन्दल आज भी सेवा समर्पित हैं। चाहे जो भी चुनौती पेश आए, नवीन जिन्दल ऐसे व्यक्ति हैं जो राह दिखाते हैं इसलिए कुरुक्षेत्रवासी उन्हें अपना हितैषी और नवीन जिन्दल उन्हें अपने परिवार का सदस्य मानते हैं...

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