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सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससीएसटी एक्ट में संशोशन को लेकर समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

कलायत से तरसेम की रिपोर्ट | March 30, 2018 05:28 PM
कलायत से तरसेम की रिपोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एससीएसटी एक्ट में संशोशन को लेकर समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन
 
पुर्नविचार याचिका की उठाई मांग
 
महामहिम राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार प्रकाश चंद को सौंपा ज्ञापन
 
एक्ट के प्रभावी होने पर ही नहीं रूक रहा उत्पीडऩ निष्प्रभावी होने पर बढ़ेगा अत्याचार
कलायत।(तरसेम  चंद )
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गत 20 मार्च को एससीएसटी एक्ट के संबंध में किए गए संशोधन को लेकर अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच के बैनर तले विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन में कलायत सहित आसपास कई गांव से महिलाओं, बच्चों, युवाओं व बुजुर्गों ने सक्रिय भागेदारी दर्ज करवाई। रेलवे रोड़ पर से विरोध प्रदर्शन व सरकार विरोधी नारेबाजी करते प्रदर्शनकारी हिसार चंडीगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए उपमंडलाधीश कार्यालय पहुंचे। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जहां एस.डी.एम. कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए पड़ाव डाला वहीं वक्ताओं ने जहां अपने विचार व्यक्त किए तथा नायब तहसीलदार प्रकाश चंद को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन कर रहे रोहताश ने कहा कि सरकार की बेरूख्री के चलते ही एस.सी.एस.टी. एक्ट को कमजोर करने का कार्य 20 मार्च को किया गया। अगर सरकार इस मामले के प्रति पूरी तरह सजग होती तथा अनुसूचित जाति वर्ग का सही प्रकार से पक्ष रखती तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय का फैसला कुछ ओर ही होता। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार अब एससीएसटी मामलों के संबंध में तत्काल गिरफ्तारी पर न केवल रोक लगा दी गई है बल्कि अग्रिम जमानत पर लगी रोक को भी हटा दिया गया है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला साफ दर्शाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा आंकड़ों की अनदेखी कर कमजोर दलीलें प्रस्तुत की गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा व आरएसएस के मन में खोट है जिसके चलते ही वे एससीएसटी कानून को पूरी तरह कमजोर व निष्प्रभावी बनाना चाहती है। सरकार द्वारा पूरा संज्ञान न लिए जाने के चाहते सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुनाए गए निर्णय के प्रति दलितों पर होने वाले अत्याचारों पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए सभी मेहनतकश दलित आबादी को एकजुट होकर संघर्ष करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंप पुर्नविचार याचिका की मांग की गई है ताकि दलित समाज का किसी भी प्रकार से उत्पीडऩ न हो और 1989 का एक्ट फिर से बहाल हो जाए। इस अवसर पर प्रतिनिधि मंडल में शामिल रामपाल, सोनू, अमरजीत, सुशील, हैप्पी, जस्सी, सुभाष, रमन व कुलदीप सहित अनेक व्यक्ति मौजूद रहे।  
 
एक्ट के प्रभावी होने के बावजूद भी बढ़ रहे है अत्याचार
विरोध प्रदर्शन के दौरान अपने विचार व्यक्त कर रहे वक्ताओं ने कहा कि इस एक्ट के प्रभावी होने के बावजूद भी दलित समाज पर जब अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर इस समाज की महिलाओं से हो रहे अत्याचार की बात की जाए तो वह और अधिक भयानक है। प्रतिदिन औसतन करीब 6 महिलाओं से बलात्कार के मामले सामने आते हैं। स्पष्ट पता चलता है कि यह समाज आज भी अपने अधिकारों से वंचित है। 
 
सदियों पुरापी दासता की बेडियों में फिर से जकडऩा चाहती है सरकार: अजय
मंच संयोजक अजय ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा सरकार लोगों को कभी धर्म जाति के नाम पर बांट रही है तो कभी आपस भी फुट डलवा लोगों को लड़ाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की सोची समझी नीति के कारण ही एस.सी.एस.टी. एक्ट मामले में ठोस कार्रवाई अमल में नहीं लाई जिसके कारण ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह निर्णय दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा इस समाज को सदियों पुरानी दासता की बेडियों में जकडऩे का कार्य करना है जिसे समाज के जागरूक लोग कभी भी पूरी नहीं होने देेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दलित उत्पीडऩ के मामले में मामला दर्ज करवाना जहां सबसे मुश्किल कार्य होता है वहीं पहले से ही प्रावधान है कि झूठा मामला दर्ज करवाए जाने पर धारा 182 के तहत केस दर्ज कर दंडित करने का प्रावधान भी है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिशा निर्देश दिया गया है उससे दलित समाज की रक्षा होने की बजाए उत्पीडऩ करने वाला हित दिखाई दे रहा है जिसके चलते दलित उत्पीडऩ की घटनाओं में बढ़ौतरी होने की संभावना है। 
 
2 अप्रैल के भारत बंद का समर्थन करता है अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच: सुशील
विरोध प्रदर्शन के दौरान सुशील ने कहा कि प्रदेश में चाहे मनोहर लाल खट्टर की सरकार हो या फिर भूपेंद्र ङ्क्षसह हुड्डा सरकार, इस दौरान दलित उत्पीडऩ की घटनाओं में बढ़ौतरी ही हुई है। उन्होंने कहा कि मिर्चपुर, गोहाना, भगाणा से लेकर कैथल व करनाल में हुई दलित उत्पीडऩ की घटनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दलित विरोधी चेहरे को उजागर करती है। इसके साथ ही आर.एस.एस. की मनुवादी मानसिकता समाज में नफरत फैला बांटने का कार्य कर रही है। इस स्थिति में मेहनत कश आबादी को एकजुट होकर इनकी फुट डालो राज करो की नीति का पर्दाफाश करना होगा। उन्होंने कहा कि इस विराध प्रदर्शन में अखिल भारतीय जाति विरोध मंच पूरी तरह इनके साथ है।  
 
बच्चों ने सुनाया क्रांतिकारी गीत
एसडीएम कार्यालय परिसर में पहुंचे रोष प्रकट करने वाले प्रदर्शनकारियों को वैभव व साक्षी द्वारा तबले की थाप पर क्रांतिकारी गीत भी सुनाया गया। उन्होंने अपने गीत के बोल में चुप्पी तोडक़र, जाति की बेडियां तोडऩे का आह्वान किया। 
 
जिला उपायुक्त को प्रेषित किया जा रहा है ज्ञापन: प्रकाश चंद
नायब तहसीलदार प्रकाश चंद ने ज्ञापन लेने के पश्चात समाज के लोगों को आश्वस्त करते कहा कि महामहिम राष्ट्रपति के नाम जो ज्ञापन उन्हें सौंपा गया है उसे आगामी कार्रवाई अमल में लाने हेतु इसी समय जिला उपायुक्त सुनीता वर्मा के पास प्रेषित किया जा रहा है। इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना प्रभारी ललित मोहन के नेतृत्व में पुलिस बल जहां एसडीएम कार्यालय में तैनात रहा जिसमें महिला पुलिस कर्मचारी भी मौजूद थी वहीं रेलवे रोड़ के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी पुलिस तैनात रही ताकि वाहनों के आवागमन में कहीं भी दिक्कत न आए। 
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