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श्रद्धांजलि सभा के रुप मे मनाई जाएगी जननायक देवी लाल की 17 वीं पुण्यतिथि

कृष्ण प्रजापति | April 05, 2018 07:40 PM
कृष्ण प्रजापति
देश प्रदेश में में श्रद्धांजलि सभा के रुप मे मनाई जाएगी जननायक देवी लाल की 17 वीं पुण्यतिथि
 
 
सभी इनेलो नेताओं ने बताया ताऊ देवीलाल को रियल हीरो,जननायक
 
कैथल, 05 अप्रैल (कृष्ण प्रजापति): कल यानी 06 अप्रैल को जननायक ताऊ देवीलाल  की 17 वीं पुण्यतिथि पर देश व प्रदेश भर में इनेलो कार्यकर्ताओं द्वारा एक प्रार्थना व श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा, जिसको लेकर इनेलो कार्यकर्ताओं में उत्साह है। प्रदेश के जिस भी जिले में स्वर्गीय जननायक ताऊ देवीलाल की प्रतिमा स्थापित है उसको युवा इनेलो के कार्यकर्ताओं द्वारा साफ़ सफ़ाई करके धोया जा रहा है। इनेलो के वरिष्ठ नेता रामपाल माजरा, जिला अध्यक्ष कंवरपाल करोड़ा, बलराज नौच, मा0 प्रेम ग्योंग, रणदीप कौल, युवा इनेलो नेता  राजू ढुल पाई, सावन पबनावा, जिला प्रेस प्रवक्ता हरदीप पाड़ला, जिला पार्षद अंजू जागलान आदि ने आज पुण्यतिथि को लेकर अपने अपने विचार सांझा किए।
 
बॉक्स--ज़ुबान के पक्के थे देवीलाल
 
वरिष्ठ इनेलो नेता व पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा बताते हैं कि "संसद मेंअभी भी कम से कम 50 ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने चौधरी देवीलाल के साथ काम किया है, उनसे बात होती तो ये लोग बताते हैं कि 1989 में इन लोगों का मुंह खुला का खुला रह गया था जब देवीलाल ने विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपनी जगह नेता बनाया था। हालांकि लोग इस बात की भी प्रशंसा करते हैं कि देवीलाल अपनी जुबान के पक्के थे। उन्होंने जो किया था वो कोई आम बात तोनहीं ही थी।"
 
बॉक्स---जब काल-कोठरी में भी नहीं घबराएं चौ. देवीलाल
 
आपातकाल के समय चौ. देवीलाल को जब गिरफ़्तार कर महेन्द्रगढ़ के किले में बंद कर दिया गया था। एक छोटी सी काल कोठरी में जहां दो व्यक्ति भी नहीं सो सकते, मेरे दादा जी चौधरी देवीलाल, मनीरामबागड़ी, सहित तीन व्यक्तियों को कोठरी में बंदी बनाया गया। ऐसे में संतरी शाम को 6 बजे कोठरी में ताला लगाता था और प्रात: 9 बजे ताला खोलता था।
 
एक साथ कोठरी में दो व्यक्ति को लेटना पड़ता था तथा तीसरा व्यक्ति कपड़े से हवा झोलता था, क्योंकि कोठरी में जहां एक ओर दो ही व्यक्तियों के लेटने की व्यवस्था थी, वहीं दूसरी ओर मोटे-मोटे मच्छरों की भरमार थी।बिजली-पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। कोठरी में केवल एक ही छेद था, जिसमें से रोशनी आती थी।इतना ही नहीं वहां पर शौचालय की भी सुविधा नहीं थी।
 
मेरे दादा  चौ. देवीलाल ऐसे हालात में कभी भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में मुर्झाए नहीं और उन्होंने विपरित से विपरित परिस्थितियों में संघर्ष करने की प्रेरणा दी। आज उसी प्रेरणा को आत्मसात कर हम संघर्ष की राह पर हैं। हमें विश्वास है कि एक दिन हमारा संघर्ष रंग लाएगा और हरियाणा की जनता को न्याय मिलेगा। चौधरी देवी लाल अक्सर कहा करते थे कि भारत के विकास का रास्ता खेतों से होकर गुजरता है, जब तक ग़रीब किसान, मज़दूर इस देश में सम्पन्न नहीं होगा, तब तक इस देश की उन्नति के कोई मायने नहीं हैं।
 
इसलिए वो अक्सर यह दोहराया करते थे- हर खेत को पानी, हर हाथ को काम, हर तन पे कपड़ा, हर सिर पे मकान, हर पेट में रोटी, बाकी बात खोटी। अपने इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए चौ. देवीलाल जीवन पर्यंत संघर्ष करते रहे। उनकी सोच थी कि सत्ता सुख भोगने के लिए नहीं, अपितु जन सेवा के लिए होती है। चौ. देवीलाल के संघर्षमय जीवन की तस्वीर आज भारतीय जन-मानस के पटल पर साफ़ दिखाई देती है। भारतीय राजनीति के इतिहास में चौ. देवीलाल जैसे संघर्षशील नेता का मादा किसी अन्य राजनीतिक नेता में दिखलाई नहीं पड़ता।
 
वर्तमान समय में जन मानस के पटल पर चौ. देवीलाल के संघर्षमय जीवन की जो तस्वीर अंकित है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करती रहेगी। चौ. देवीलाल आज हमारे मध्य नहीं हैं, लेकिन उनका बुजुर्गाना अंदाज, मीठी झिड़कियां सही रास्ते की विचारधारा की सीख के रूप में जो कुछ वो देकर गए हैं, वह सदैव हमारे बीच रहेगा।
 
चौ. देवीलाल अपने स्वभावनुसार पूरे ठाठ के साथ, झुझारूपन एवं अनोखी दबंग अस्मिता के साथ जीये। आज अपनी मिट्टी से जुड़े तन-मन के दिलो-दिमाग पर राज करने वाले देवीलाल जैसे जननायक ढूंढने से भी नहीं मिल सकते। जनहित के कार्यों के रूप में स्व. देवीलाल जन-जन के अंत: पटल पर जो कुछ अंकित कर गए हैं, वो लम्बे समय तक उनकी याद जो ताजा कराता रहेगा। जन-मानस बर्बस स्मरण करता रहेगा कि हरियाणा की पुण्य भूमि ने ऐसे नर- केसरी को जन्म दिया था, जिसने अपने त्याग, संघर्ष और जुझारूपन से परिवार के मुखिया ताऊ के दर्जे को, राष्ट्रीय ताऊ के सम्मानजनक एवं श्रद्धापूर्ण पद के रूप में अलंकृत किया
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