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सोनीपत,ओउम् ही सृष्टि का पहला शब्द जिसमें निहित ब्रह्मज्ञान : डा. शिखा

रणबीर रोहिल्ला | April 10, 2018 05:34 PM
रणबीर रोहिल्ला

सोनीपत,ओउम् ही सृष्टि का पहला शब्द जिसमें निहित ब्रह्मज्ञान : डा. शिखा
जीवीएम में हैप्पिनेस प्रोग्राम के दूसरे दिन योग-मेडिटेशन का कराया अभ्यास

रणबीर रोहिल्ला, सोनीपत।

 

ओउम्, ऐसा शब्द जिसमें संपूर्णता है। सृष्टि की रचना के साथ पहले शब्द के रूप में ओउम् का उच्चारण किया गया। ओउम् शब्द में ही ब्रह्मज्ञान समाहित है, जिसे समझने के पश्चात् कुछ भी शेष नहीं रह जाता। यह कहना है आर्ट ऑफ लिविंग की योगाचार्या डा. शिखा खुराना का। डा. शिखा खुराना जीवीएम गल्र्ज कालेज में अंग्रेजी विभाग के संयोजन में आयोजित हैप्पिनेस प्रोग्राम में हिस्सा लेने वाली प्राध्यापिकाओं को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रही थी। आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कालेज की प्राध्यापिकाएं हिस्सा ले रही हैं। कालेज की शिक्षिकाओं को योगाभ्यास तथा मेडिटेशन का प्रशिक्षण देते हुए डा. शिखा खुराना ओउम् पर व्याख्यान दिया। ओउम् ध्वनि पर भजनों की प्रस्तुति दी गई, जिन पर थिरकते हुए प्राध्यापिकाओं को दैवीय अनुभूति कराने का प्रयास किया गया। शिक्षिकाओं को भौतिकवाद से ऊपर उठाते हुए आत्मबोध की ओर ले जाने का भरसक प्रयास किया गया, जिसके लिए योग, मेडिटेशन तथा भजनों का सहारा लिया गया। डा. शिखा खुराना की सह-संयोजक पुष्पा तिवारी ने कार्यक्रम के दौरान सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कराया। उन्होंने शक्तिशाली श्वांस क्रियाओं एवं तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया। इस दौरान प्रतिभागी प्राध्यापिकाओं ने अपने अनुभव भी साझा किये, जिसमें कार्यक्रम की संयोजक कमलेश चोपड़ा ने कहा कि निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि यह हैप्पिनेस प्रोग्राम उनके अंदर खुशी का संचार कर रहा है। कार्यक्रम के आयोजन के लिए संस्था के प्रधान डा. ओपी परूथी व प्राचार्या डा. ज्योति जुनेजा ने बधाई देेते हुए शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि तनाव भरे दौर में इस प्रकार के कार्यक्रमों की अत्यधिक आवश्यकता है। इससे कार्यस्थल तथा घर-परिवार में सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलती है। तनाव को खुद से दूर करने में सहायता मिलती है, जिससे कार्यक्षमता प्रभावित नहीं होती।

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