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  • Fri Dec 31 2021
  • 5:23:59 PM
वाराणसी: घाटों पर सांप्रदायिक पोस्टर लगाने वाले पांच लोगों पर मामला दर्ज, कोई गिरफ़्तारी नहीं
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पांच लोगों में से दो विहिप और बजरंग दल से संबंध रखते थे. वीडियो में वे यह स्वीकार करते भी देखे गए थे. पुलिस ने दोनों की पहचान राजन गुप्ता और निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ के रूप में की है.

वाराणसी: घाटों पर सांप्रदायिक पोस्टर लगाने वाले पांच लोगों पर मामला दर्ज, कोई गिरफ़्तारी नहीं


नई दिल्ली: वाराणसी में गंगा के विभिन्न घाटों पर कथित तौर पर पोस्टर चिपकाकर गैर-हिंदुओं को घाटों से दूर रहने की चेतावनी देने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भेलूपुर पुलिस थाने में 9 जनवरी रविवार को मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कथित सदस्यों ने घाटों पर ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है’ लिखे हुए पोस्टर चिपका दिए थे. इन पोस्टर को लगाते हुए उनके फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाले गए थे.

इन पांच लोगों में से दो विहिप और बजरंग दल से संबंध रखते थे. वीडियो में वे यह स्वीकार करते भी देखे गए थे. पुलिस ने दोनों की पहचान राजन गुप्ता और निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ के रूप में की है.

द वायर  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि विहिप की वाराणसी विंग के सचिव राजन गुप्ता ने एक वीडियो में कहा था, ‘ये पोस्टर अपील नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सनातन धर्म का पालन नहीं करते हैं.’

काशी के घाटों और मंदिरों को हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए गुप्ता ने कहा था, ‘अन्य धर्म के लोगों को यहां से दूर रहना चाहिए.’

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर यहां आने वाले लोगों की हिंदू धर्म में आस्था है तो उनका स्वागत है, और अगर आस्था नहीं है तो हम उन्हें यहां से भगा देंगे.

वहीं, बजरंग दल के वाराणसी संयोजक निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ ने कहा था, ‘गंगा हमारी मां है, यह पिकनिक स्पॉट नहीं है. जो गंगा को पिकनिक स्पॉट मानते हैं, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए. अगर वे खुद दूर नहीं रहते तो बजरंग दल ऐसा करेगा.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विहिप ने रविवार को कहा कि दोनों सदस्यों  को संगठन से बाहर कर दिया गया है.

रविवार को पुलिस सह-आयुक्त (भेलूपुर) प्रवीण कुमार सिंह ने इस अखबार को बताया कि जांचकर्ता मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

भेलूपुर थाना प्रभारी रमाकांत दुबे ने कहा कि पुलिस ने गुप्ता और त्रिपाठी को नोटिस दिया है और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें पांच-पांच लाख रुपये के निजी मुचलके जमा करने के आदेश दिए हैं.

विहिप के काशी (वाराणसी) प्रांत मंत्री आनंद सिंह ने बताया कि गुप्ता और त्रिपाठी को संगठन से हटाकर उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई हैं.

स्थानीय कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे ने  बताया कि उनकी पार्टी ने पुलिस को दक्षिणपंथियों की इस उपद्रवी हरकत की सूचना दी थी. उन्होंने कहा, ‘मैंने ही वरुणा जोन के डीजीपी को फोन करके नफरत फैलाने वाली इस हरकत के बारे में सूचित किया था.’

वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने  फोन पर बताया कि गंगा और उसके घाट कभी एक धर्म के नहीं रहे. उन्होंने बताया कि कैसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान गंगा में स्नान के बाद ही नमाज अदा करते थे.

उन्होंने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, ‘राजनीतिक फायदे के लिए कोई धर्म के नाम पर वाराणसी को बांट कैसे सकता है?’

बता दें कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यह हरकत विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है.नई दिल्ली: वाराणसी में गंगा के विभिन्न घाटों पर कथित तौर पर पोस्टर चिपकाकर गैर-हिंदुओं को घाटों से दूर रहने की चेतावनी देने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भेलूपुर पुलिस थाने में 9 जनवरी रविवार को मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कथित सदस्यों ने घाटों पर ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है’ लिखे हुए पोस्टर चिपका दिए थे. इन पोस्टर को लगाते हुए उनके फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाले गए थे.

इन पांच लोगों में से दो विहिप और बजरंग दल से संबंध रखते थे. वीडियो में वे यह स्वीकार करते भी देखे गए थे. पुलिस ने दोनों की पहचान राजन गुप्ता और निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ के रूप में की है.

 रिपोर्ट में बताया था कि विहिप की वाराणसी विंग के सचिव राजन गुप्ता ने एक वीडियो में कहा था, ‘ये पोस्टर अपील नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सनातन धर्म का पालन नहीं करते हैं.’

काशी के घाटों और मंदिरों को हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए गुप्ता ने कहा था, ‘अन्य धर्म के लोगों को यहां से दूर रहना चाहिए.’

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर यहां आने वाले लोगों की हिंदू धर्म में आस्था है तो उनका स्वागत है, और अगर आस्था नहीं है तो हम उन्हें यहां से भगा देंगे.

वहीं, बजरंग दल के वाराणसी संयोजक निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ ने कहा था, ‘गंगा हमारी मां है, यह पिकनिक स्पॉट नहीं है. जो गंगा को पिकनिक स्पॉट मानते हैं, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए. अगर वे खुद दूर नहीं रहते तो बजरंग दल ऐसा करेगा.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विहिप ने रविवार को कहा कि दोनों सदस्यों  को संगठन से बाहर कर दिया गया है.

रविवार को पुलिस सह-आयुक्त (भेलूपुर) प्रवीण कुमार सिंह ने इस अखबार को बताया कि जांचकर्ता मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

भेलूपुर थाना प्रभारी रमाकांत दुबे ने कहा कि पुलिस ने गुप्ता और त्रिपाठी को नोटिस दिया है और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें पांच-पांच लाख रुपये के निजी मुचलके जमा करने के आदेश दिए हैं.

विहिप के काशी (वाराणसी) प्रांत मंत्री आनंद सिंह ने बताया कि गुप्ता और त्रिपाठी को संगठन से हटाकर उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई हैं.

स्थानीय कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे ने द वायर  को बताया कि उनकी पार्टी ने पुलिस को दक्षिणपंथियों की इस उपद्रवी हरकत की सूचना दी थी. उन्होंने कहा, ‘मैंने ही वरुणा जोन के डीजीपी को फोन करके नफरत फैलाने वाली इस हरकत के बारे में सूचित किया था.’

वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने द वायर  को फोन पर बताया कि गंगा और उसके घाट कभी एक धर्म के नहीं रहे. उन्होंने बताया कि कैसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान गंगा में स्नान के बाद ही नमाज अदा करते थे.

उन्होंने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, ‘राजनीतिक फायदे के लिए कोई धर्म के नाम पर वाराणसी को बांट कैसे सकता है?’

बता दें कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यह हरकत विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है.नई दिल्ली: वाराणसी में गंगा के विभिन्न घाटों पर कथित तौर पर पोस्टर चिपकाकर गैर-हिंदुओं को घाटों से दूर रहने की चेतावनी देने के मामले में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भेलूपुर पुलिस थाने में 9 जनवरी रविवार को मामला दर्ज किया गया है. हालांकि, अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कथित सदस्यों ने घाटों पर ‘गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है’ लिखे हुए पोस्टर चिपका दिए थे. इन पोस्टर को लगाते हुए उनके फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाले गए थे.

इन पांच लोगों में से दो विहिप और बजरंग दल से संबंध रखते थे. वीडियो में वे यह स्वीकार करते भी देखे गए थे. पुलिस ने दोनों की पहचान राजन गुप्ता और निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ के रूप में की है.

द वायर  ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि विहिप की वाराणसी विंग के सचिव राजन गुप्ता ने एक वीडियो में कहा था, ‘ये पोस्टर अपील नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सनातन धर्म का पालन नहीं करते हैं.’

काशी के घाटों और मंदिरों को हिंदू धर्म और संस्कृति का प्रतीक बताते हुए गुप्ता ने कहा था, ‘अन्य धर्म के लोगों को यहां से दूर रहना चाहिए.’

उन्होंने यह भी कहा था कि अगर यहां आने वाले लोगों की हिंदू धर्म में आस्था है तो उनका स्वागत है, और अगर आस्था नहीं है तो हम उन्हें यहां से भगा देंगे.

वहीं, बजरंग दल के वाराणसी संयोजक निखिल त्रिपाठी ‘रुद्र’ ने कहा था, ‘गंगा हमारी मां है, यह पिकनिक स्पॉट नहीं है. जो गंगा को पिकनिक स्पॉट मानते हैं, उन्हें इससे दूर रहना चाहिए. अगर वे खुद दूर नहीं रहते तो बजरंग दल ऐसा करेगा.’

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, विहिप ने रविवार को कहा कि दोनों सदस्यों  को संगठन से बाहर कर दिया गया है.

रविवार को पुलिस सह-आयुक्त (भेलूपुर) प्रवीण कुमार सिंह ने इस अखबार को बताया कि जांचकर्ता मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

भेलूपुर थाना प्रभारी रमाकांत दुबे ने कहा कि पुलिस ने गुप्ता और त्रिपाठी को नोटिस दिया है और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उन्हें पांच-पांच लाख रुपये के निजी मुचलके जमा करने के आदेश दिए हैं.

विहिप के काशी (वाराणसी) प्रांत मंत्री आनंद सिंह ने बताया कि गुप्ता और त्रिपाठी को संगठन से हटाकर उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई हैं.

स्थानीय कांग्रेस नेता राघवेंद्र चौबे ने द वायर  को बताया कि उनकी पार्टी ने पुलिस को दक्षिणपंथियों की इस उपद्रवी हरकत की सूचना दी थी. उन्होंने कहा, ‘मैंने ही वरुणा जोन के डीजीपी को फोन करके नफरत फैलाने वाली इस हरकत के बारे में सूचित किया था.’

वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने द वायर  को फोन पर बताया कि गंगा और उसके घाट कभी एक धर्म के नहीं रहे. उन्होंने बताया कि कैसे उस्ताद बिस्मिल्लाह खान गंगा में स्नान के बाद ही नमाज अदा करते थे.

उन्होंने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा, ‘राजनीतिक फायदे के लिए कोई धर्म के नाम पर वाराणसी को बांट कैसे सकता है?’

बता दें कि वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और यह हरकत विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुई है.ज्ञात हो कि प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर सात मार्च तक सात चरणों में मतदान होगा और नतीजे दस मार्च को आएंगे.
 

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