गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई 
गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई 

 

गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई
कैथल / गुहला-चीका, 26 जुलाई (अटल हिन्द/राजकुमार अग्रवाल  ) नगर पालिका चीका द्वारा 487 लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत मकान बनाने के लिए पहली, दूसरी व तीसरी किस्त के रूप में अब तक 10 करोड़ 69 लाख 90 हजार रुपये की राशि दी जा चुकी है।एसडीएम गुहला नवीन कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नए मकान बनाने के लिए सरकार की तरफ से कुल 2 लाख 50 हजार रुपए की राशि 3 किस्तों में जारी की गई।
गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई 
चीका नगर पालिका क्षेत्र में नए मकान बनाने के लिए प्रथम किस्त के लिए 454 प्रार्थियों को 4 करोड़ 54 लाख रुपए की राशि जारी की गई है। इसी प्रकार दूसरी किस्त के लिए 425 प्रार्थियों को 4 करोड़ 25 लाख रुपए तथा तीसरी किस्त 308 प्रार्थियों को 15 लाख 40 हजार रुपए के रूप में राशि जारी की गई है। प्रथम व द्वितीय किस्त में एक-एक लाख रुपए और तृतीय किस्त के रूप में 50 हजार रुपये दिए गए है। उन्होंने कहा कि मकान मरम्मत के लिए 33 प्रार्थियों को पहली किस्त के रुप में 11 लाख 80 हजार रुपए, 25 प्रार्थियों को दूसरी किस्त के रुप में 15 लाख रुपए और 7 प्रार्थियों को तीसरी किस्त के रूप में 2 लाख 10 हजार रुपए दिए गए है।
गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई  गुहला-चीका के 487 लाभार्थी को 10 करोड़ 70 लाख रुपए की राशि खुद के मकान बनाने के लिए दी गई 
सरकार की तरफ से डेढ़ लाख रुपये की राशि प्रार्थी को मकान रिपेयर के लिए 3 किस्तों में दी जाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना को 4 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी में कच्चे कड़ियों वाले मकान को तोड़कर बनाने वाले लाभार्थी को 3 किस्तों में 2 लाख 50 हजार रुपए ग्रांट दी जाती है। बीएलसीई योजना के तहत एक कमरे वाले मकान के लाभार्थी को 3 किश्तों में 1 लाख 50 हजार रुपये दिए जाते है। तीसरी एएचपी योजना व चौथी सीएलएसएस योजना के तहत बैंक के माध्यम से कम ब्याज पर लाभार्थी को ऋण दिलवाया जाता है।

बॉक्स-बरसात के दिनों में काफी परेशानी होती थी सरकार ने दी रहने के लिए छत- लाभार्थी
वार्ड-5 की निवासी प्रवीन कौर का कहना है कि मेरे पति मजदूरी का कार्य करते हैं, जिससे वह मकान बनाने में असमर्थ थे। पहले हमें कच्चे मकान में रहना पड़ रहा था और बरसातों के दिनों में काफी परेशानी होती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने के लिए नगर पालिका में मैंने प्रार्थना पत्र दिया था, जिससे सरकार की योजना के तहत 2 लाख 50 हजार रुपए की राशि 3 किस्तों में जारी की गई दी गई और मेरा बहुत जल्दी एक अच्छा मकान बनकर तैयार हो गया।

सपना यही होता है कि उसके सर पर पक्की छत हो
बॉक्स-प्रधानमंत्री आवास के एक और लाभार्थी निशा पत्नी सलीम निवासी वार्ड-3 बताया कि जीवन में एक आम आदमी का सपना यही होता है कि उसके सर पर पक्की छत हो और वो अपने बच्चों के लिए पक्का मकान बनाकर उन्हें दे सके। मेरे पति की आय का साधन इतना सीमित है कि संभवत: मैं अपना मकान बनाने की शायद सोच भी नहीं सकती थी। ये तो भला हो प्रधानमंत्री आवास योजना का जिसने हम जैसे मजबूर लोगों की सुध ली और हम इस काबिल बन सके कि आज इस योजना के तहत मिली राशि से पक्का मकान बनाकर उसमें जिन्दगी बसर कर रहे हैं।  निशा ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर हृदय से आभार व्यक्त किया, वहीं यह भी उम्मीद जाहिर की आने वाले वक्त में मुझ जैसे न जाने कितने जरूरतमंद लोग इस योजना का लाभ उठाकर अपने मकान बनाने के सपने को हकीकत बना सकेंगे।

बॉक्स: राजकुमार अब अपने मकान में रह रहा है सुकून से
दिन भर की जी तोड़ मेहनत कर पसीना बहाने के बाद अपने व अपने बच्चों को लिए दो वक्त की रोटी जुटाने वाला दिहाड़ीदार मजदूर राजकुमार भी अब इस योजना की रूह से पक्का मकान बनाकर अपने आपको किसी रियासत के राजकुमार से कम नहीं समझ रहा है। बात करने पर खुशी चेहरे पर साफ दिखाई दी और उसने भावुक होते हुए बताया कि अगर प्रधानमंत्री आवास योजना हम जैसे लोगों के लिए जमीन पर न उतरती तो शायद जिंदगी भर कच्चे मकान में रहकर अपना समय काटना पड़ता। आज अगर पक्की छत है तो बारिश, लू और तुफान की कोई चिंता नहीं है। दिन भर की मेहनत के बाद बेफिक्र होकर अपने परिवार के साथ अपने खुद के मकान में सुकून से सोते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का कोटि-कोटि धन्यवाद करते हुए कहा कि अगर ये मदद न मिली होती तो अपना छोटा सा मकान बनाने के लिए जिंदगी भर कर्ज में डूबा रहता।

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