logo
  • Fri Dec 31 2021
  • 5:23:59 PM
हरयाणा विजिलेंस की हो रही किरकिरी, रेड की खबर मिलते ही पैदल भागा नसीबपुर जेल सुपरिटेंडेंट अनिल जांगड़ा
इन दोनों की गिरफ्तारी उपरांत जब सघन पूछताछ की और दो दिन का रिमांड लिया गया तो इन्होंने कुछ राज उगले थे।

हरयाणा विजिलेंस की हो रही किरकिरी, रेड की खबर मिलते ही पैदल भागा नसीबपुर  जेल सुपरिटेंडेंट अनिल जांगड़ा

jail

नारनौल (अटल हिन्द /राजकुमार )

राज्य के तेज-तर्रार आईपीएस शत्रुजीत के महकमे विजिलेंस की रेड लीक होने से जहां भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी  जेल सुपरिटेंडेंट अनिल जांगड़ा रात को करीब तीन बजे पैदल ही रफूचक्कर हो गए थे, ऐसी चर्चाओं का दौर चल रहा है। वहीं अब नसीबपुर जेल में भी कुछ फेरबदल हुआ है। जिला जेल नसीबपुर का अतिरिक्त कार्यभार अब अनिल जांगड़ा की जगह भिवानी के जेल सुपरिटेंडेंट सत्यवान को दिया गया है। उन्होंने यहां ज्वाइन भी कर लिया। उनके अलावा एक डीएसपी ने भी यहां ज्वाइन किया है। उल्लेखनीय है कि गत नौ दिसंबर को नसीबपुर जेल में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए स्टेट विजिलेंस गुरुग्राम ने जेल वार्डर राजन को रंगे हाथों दबोचा था, वहीं दूसरे जेल वार्डर गजे सिंह की संलिप्तता होने के चलते उन्हें भी गिरफ्तार किया था। इन दोनों की गिरफ्तारी उपरांत जब सघन पूछताछ की और दो दिन का रिमांड लिया गया तो इन्होंने कुछ राज उगले थे।
जेल सुपरिटेंडेंट का नाम आया था सामने
सरकारी गवाह बने हवलदार विवेक ने तो अपने बयानों में अदालत के सम्मुख इनकी पोल-पट्टी खोलकर रख दी थी। इसमें नसीबपुर जेल के डीएसपी कुलदीप सिंह हुड्डा एवं अतिरिक्त कार्यभार देख रहे रेवाड़ी के जेल सुपरीटेंडेंट अनिल जांगड़ा का भी नाम सामने आया था। रिश्वत का यह मामला कुख्यात गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गैंग के सदस्य संदीप उर्फ सिंधिया के भाई हंसराज द्वारा एक लाख रुपये सुविधा शुल्क के रूप जेल में देने से जुड़ा है।

डीएसपी ने लगाई है मेडिकल लिव
 भ्रष्टाचार के इस मामले में जब डीएसपी कुलदीप सिंह हुड्डा का नाम उजागर हुआ, तब वह दस दिन की छुट्टी पर थे और उन्हें 14 दिसंबर को नसीबपुर जेल में ज्वाइन करना था, लेकिन कमाल की बात यह है कि वह नसीबपुर जेल आए और यहां एक सप्ताह की मेडिकल लिव देने उपरांत आराम से चले भी गए, जबकि विजिलेंस उनकी धर-पकड़ के लिए खाक छानती रह गई। नसीबपुर जेल के अधिकारियों ने अब उनकी छुट्टी की दरखास्त को मंजूरी के लिए उच्चाधिकारियों के पास भेजी हुई है। हालांकि इसकी मंजूरी फिलहाल नहीं मिली है, लेकिन इससे विजिलेंस की टेंशन बढ़ी हुई है।

विजिलेंस की हो रही किरकिरी
जब विजिलेंस ने नसीबपुर जेल में रेड मारी थी, तब विजिलेंस के इंस्पेक्टर अजीत सिंह को यहां मुंबई के एनसीबी पुलिस ऑफिसर समीर वानखेडे की भांति प्रसिद्धि मिलने लगी थी, क्योंकि उनके हाथ केवल जेल वार्डरों की बजाए जेल अधिकारियों के गिरेबान तक पहुंचते दिखाई देने लगे थे और ईमानदार एवं कड़क होने के चर्चे होने लगे थे, लेकिन विजिलेंस में छुपी बैठी काली भेड़ों के चलते वह अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाए। भ्रष्टाचार के बड़े आरोपी जेल सुपरिटेंडेंट के घर पर जब 15 दिसंबर को सबेरे चार बजे रैड मारी, तब उनकी टीम को ना कामयाबी का सामना करना पड़ा।

Share this story