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  • Fri Dec 31 2021
  • 5:23:59 PM
मनोहर सरकार का एसडीएम भारत भूषण क्यों हुआ भूमिगत ,घोटाले में शामिल है कोण कोण
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मनोहर सरकार का एसडीएम भारत भूषण क्यों हुआ भूमिगत ,घोटाले में शामिल है कोण कोण 

रतिया के बहुचर्चित जमीन खरीद घोटाले में पटवारी गिरफ्तार, SDM की तलाश में विजिलेंस कर रही छापेमारी


रतिया (अटल हिन्द ब्यूरो )

रतिया के एसडीएम भारत भूषण, नायब तहसीलदार और पटवारी सहित 5 लोगों के खिलाफ प्रॉपर्टी खरीद में धांधली करने के मामले में विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी पटवारी मदनलाल निवासी लाख पुल ( आदमपुर ) हाल योग नगर फतेहाबाद को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को अदालत में पेश कर तीन दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पटवारी ने बताया कि रजिस्ट्री से पहले उसने 50 हजार रुपये लिए थे जबकि बाद में भी उसे 50 हजार रुपये दिए गए। इनमें से 70 हजार रुपये वह खर्च कर चुका है जबकि 30 हजार वह बरामद करवा सकता है। पूछताछ में पटवारी मदनलाल ने स्वीकार किया कि उसकी एसडीएम के साथ काफी अच्छी जान पहचान है और उसके पंजाब तथा हिमाचल के रहने के ठिकाने के बारे में उसे पता है। इस मामले में एसडीएम की भी तलाश की जा रही है। विजिलेंस द्वारा शनिवार को मामला दर्ज करने के साथ से ही एसडीएम छुट्टी पर चले गए और उनका मोबाइल भी बंद है। विजिलेंस द्वारा एसडीएम भारत भूषण कौशिक, उनकी पत्नी सारिका, नायब तहसीलदार भजनलाल, पटवारी मदन लाल, बर्खास्त पुलिस कर्मचारी बाला सिंह व उसकी पत्नी कर्मजीत कौर के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस की चार टीमों ने उक्त रजिस्ट्री मामले व रतिया के भूना रोड पर विवादित जमीन के मामले में तहसील कार्यालय व नगर पालिका कार्यालय में पहुंचकर दस्तावेजों की छानबीन की और दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया।

विजिलेंस डीएसपी राकेश मलिक ने बताया कि पिछले दिनों उन्हें जानकारी मिली थी कि रतिया के एसडीएम भारत भूषण की पत्नी और एसडीएम के जानकारी एवं पुलिस से बर्खास्त कर्मचारी बालाराम की पत्नी के नाम रतिया में प्रॉपर्टी खरीदी गई और रजिस्ट्री करवाई गई। नायब तहसीलदार व पटवारी के जरिये गलत कागजात के आधार पर यह रजिस्ट्री हुई। उन्होंने बताया कि इस सूचनाओं के बाद विजिलेंस ने इस मामले में जांच की तो पता चला कि रतिया में फतेहाबाद रोड पर मिगलानी अस्पताल के पास 24 कनाल 7 मरले जमीन है, जिसके चार हिस्सेदार है। चारों में 1993 में पारिवारिक सेटलमेंट हो गया था। इनमें से एक हिस्सेदार कांता नामक महिला है। डीएसपी ने बताया कि कांता ने जो जमीन अमृतपाल के हिस्से आई थी, उसे तहसील में झूठी दरखास्त देकर अपने नाम दिखाया और इस जमीन की रजिस्ट्री एसडीएम की पत्नी व बाला सिंह की पत्नी के नाम करवा दी। डीएसपी ने बताया कि अब जमीन के बाकी हिस्सेदारों को भी जांच में शामिल कर कांता के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।



उन्होंने बताया कि सही तरीके से इस जमीन की रजिस्ट्री 1 करोड़ 65 लाख 28 हजार में होनी थी लेकिन इसे बहुत कम 46 लाख रुपये में करके राजस्व को काफी नुकसान पहुंचाया गया है। डीएसपी ने बताया कि इस रजिस्ट्री को लेकर न तो नगरपालिका से एनओसी ली गई और न ही प्रॉपर्टी आईडी ली गई। इस बारे विजिलेंस को सूचना मिलने के बाद एसपी विजिलेंस के आदेशों पर निरीक्षक ईश्वर सिंह के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया। इस टीम ने आज पटवारी मदनलाल को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में सभी तथ्यों की जांच के बाद लग रहा है कि एसडीएम ने इस मामले में अपनी पावर का गलत इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम की भी गिरफ्तारी की जाएगी। मामले में पटवारी व नायब तहसीलदार की भूमिका के सवाल पर डीएसपी ने बताया कि पटवारी को रजिस्ट्री पर यह रिपोर्ट करनी थी कि जमीन किसके नाम है और कौन काबिज है लेकिन कांता देवी को काबिज दिखाया गया। बाद में जब मामले ने तूल पकड़ा तो इसे फ्लूयड से मिटाने की भी कोशिश की गई।

एसडीएम की तलाश में छापेमारी
 डीएसपी राकेश मलिक ने बताया कि एसडीएम को जैसे ही मुकदमा दर्ज होने बारे जानकारी मिली तो उसने तुरंत छुट्टी के लिए आवेदन कर दिया। इसके बाद एसडीएम ने यमुनानगर के हिन्दू कॉलेज से अपनी पत्नी को लिया और स्कूल से बच्चों को लेकर फरार हो गया। डीएसपी ने बताया कि सभी आरोपियों के फोन बंद आ रहे हैं। विजिलेंस ने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कैथल और यमुनानगर में भी छापेमारी की थी लेकिन आरोपी भागने में सफल रहा। डीएसपी ने बताया कि एसडीएम का पैन नंबर से लेकर सभी बैंकों को लिखा जा रहा है। एसडीएम के सभी खाते, डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड फ्रीज करवाए जा रहे हैं।

 

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