सीएम खट्टर का बयान, नहीं मिल रहे हैं ब्लैक फंगस के इंजेक्शन , हमें मुश्किल से 1200-1400 इंजेक्शन मिले हैं
सीएम खट्टर का बयान, नहीं मिल रहे हैं ब्लैक फंगस के इंजेक्शन , हमें मुश्किल से 1200-1400 इंजेक्शन मिले हैं

सीएम खट्टर का बयान, नहीं मिल रहे हैं ब्लैक फंगस के इंजेक्शन , हमें मुश्किल से 1200-1400 इंजेक्शन मिले हैं
फरीदाबाद (अटल हिन्द /योगेश गर्ग )कोरोना वायरस के बीच ब्लैक फंगस भी लोगों पर अटैक कर रहा है| ब्लैक फंगस भी बेहद घातक है और यह बड़े स्तर पर लोगों को नुकसान पहुंचा रहा है| यहां तक की लोगों की जान भी जा रही है| ज्यादातर, कोरोना से जंग जीतकर आये लोगों को ब्लैक फंगस खतरे में डाल रहा है| वहीं, इसकी दवाई की कमी का शोर भी हर ओर सुनाई दे रहा है| ब्लैक फंगस दवाई की कमी जान लोगों को भी टेंशन हो जा रही है कि अगर ब्लैक फंगस उन्हें अपनी चपेट में लेता है तो उनके इलाज में दिक्कत आएगी|उधर , ब्लैक फंगस दवाई को लेकर बात अगर हरियाणा की करें तो यहां भी इसकी किल्लत है| हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि ब्लैक फंगस के इंजेक्शन नहीं मिल रहे हैं, हमें मुश्किल से 1200-1400 इंजेक्शन मिले हैं। इस दौरान कोरोना पर बात करते हुए खट्टर ने कहा कि अब संक्रमण धीरे-धीरे गांवों में फैलना शुरू हुआ है। COVID19 जब गांवों में फैलना शुरू हुआ तब विचार आया कि हमें नीचे तक घर-घर जाकर लोगों की टेस्टिंग करनी होगी, तब हमने 8,000 टीमें बनाईं। हमारे 6,500 गांवों में से 5,000 गांवों में हमारी टीमें पहुंच चुकी हैं|

विज भी कह चुके हैं ब्लैक फंगस दवाई की कमी की बात…..
प्रदेश गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अभी हाल ही में बताया था कि ब्लैक फंगस का इंजेक्शन नहीं मिल रहा है इसलिए इसकी वैकल्पिक दवाई का सुझाव देने के लिए हमने पीजीआई में वरिष्ठ डॉक्टरों की एक कमेटी बनाई है| यानि प्रदेश में ब्लैक फंगस से पीड़ित लोगों के उपचार के लिए वैकल्पिक दवाई का इंतजाम किया जाएगा।
दिल्ली में ब्लैक फंगस की दवाई की कमी…
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कहा कि हमने ब्लैक फंगस के लिए अपने सेंटर बना दिए हैं लेकिन दवाई नहीं है तो इलाज कैसे करें? दिल्ली को रोज़ 2000 इंजेक्शन चाहिए लेकिन हमें 400-500 इंजेक्शन मिल रहे हैं। दिल्ली में ब्लैक फंगस के क़रीब 500 मरीज़ हैं|
बतादें कि, ब्लैक फंगस की दवाई की कमी अन्य राज्यों में भी देखी जा रही है| ब्लैक फंगस कोई नई बीमारी नहीं है लेकिन पहले इसके मामले ज्यादा सामने नहीं आते थे| इसीलिए इसकी दवाई का प्रोडक्शन कम हो रहा था| लेकिन इस कोरोना के बीच अचानक से इसके मामले बढ़कर सामने आने लगे| ऐसे में इसकी दवा की शॉर्टेज को देखा जा रहा है| हालाँकि, दवा का प्रोडक्शन बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया गया है| इसके साथ ही सबसे शर्मनाक बात यह है कि जो दवा मौजूद भी है उसकी कालाबाजारी हो रही है| फिलहाल, कालाबाजारी पर पूरी नजर रखी जा रही है| हरियाणा में तो ब्लैक फंगस दवाई के वितरण के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का भी गठन किया गया है|

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