डॉ हर्षवर्धन व  बाबा रामदेव की मिलीभगत ? ,   IMA क्या देगा इन सवालों का जवाब?
डॉ हर्षवर्धन व  बाबा रामदेव की मिलीभगत ? ,   IMA क्या देगा इन सवालों का जवाब?

डॉ हर्षवर्धन व  बाबा रामदेव की मिलीभगत ? ,   IMA क्या देगा इन सवालों का जवाब?

संयम श्रीवास्तव

बीते दिनों इंटरनेट (Internet) पर एक वीडियो खूब वायरल (Viral Video) हुआ, इसमें बाबा रामदेव (Baba Ramdev) एलोपैथी (Allopathy) दवाओं (Medicine) पर तीखे सवाल करते नजर आ रहे थे. इन सवालों से डॉक्टरों के संगठन IMA को इतना बुरा लगा कि उसने बाबा रामदेव के खिलाफ कार्रवाई (Action) की मांग कर डाली और कहा कि अगर बाबा रामदेव ने माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई (Legal Action)की जाएगी. जब मामला बढ़ने लगा तो बीच में देश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (Health Minister Harsh Vardhan) को आना पड़ा और उन्हें बाबा रामदेव को एक पत्र लिख कर कहना पड़ा कि वह अपना बयान वापस लें. देश के स्वास्थ्य मंत्री का पत्र मिलते ही बाबा रामदेव ने भी बिना देर किए अपना बयान वापस ले लिया.

डॉ हर्षवर्धन व  बाबा रामदेव की मिलीभगत ? ,   IMA क्या देगा इन सवालों का जवाब?

इसमें कोई दो राय नहीं कि कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ाई में डॉक्टरों ने बहुत बड़ी कुर्बानी दी है. इसके लिए उनको सलाम है . देश का कोई भी शख्स अगर डॉक्टरों की इस महानता को कहीं से भी कमतर आंकता है तो उसे धिक्कार है. इसमें बहस की कोई गुंजाइश नहीं है कि देश की जनता को एलोपैथ पर पूरा भरोसा है. अगर ऐसा नहीं होता देश में हेल्थ सेक्टर में आयुर्वेद, होम्योपैथ, नेचुरौपैथ आदि का हिस्सा नगण्य के करीब नहीं होता. पर देश की जनता को अगर अपने स्वास्थ्य की रक्षा में कोई परेशानी हुई, दवाइयों को लेकर कन्फ्यूजन हुआ तो इसकी जवाबदेही किसकी बनती है? निश्चित ही आईएमए को इसके लिए भी जवाब देना होगा. पूरे देश की जनता का बड़े या छोटे अस्पतालों ने जो खून चूसा है उसकी भी आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी होगी. यह बिल्कुल सत्य है कि जितना बुरा आपको बाबा रामदेव की बातों का लगा उतना बुरा आपको देश भर में परेशान हो रहे कोरोना पेशंट की परेशानी से लगा होता तो देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बहुत कुछ सुधार कर सकते थे.
बाबा रामदेव के बयान पर इतना घमासान मचा, इस पर बाबा रामदेव ने माफी भी मांग ली. लेकिन क्या कोई बताएगा कि उन्होंने जो एलोपैथी पर सवाल उठाए थे उसका जवाब कौन देगा. क्या उन्होंने गलत कहा कि कोरोना से निपटने के लिए बताई गई सभी दवाइयां एक बाद एक फेल होती गईं, क्या इस पर किसी की कोई जवाबदेही नहीं है. क्या जो IMA बाबा रामदेव के बयान पर आगबबूला हो गया था उसके पास इन सवालों के जबाव हैं? और अगर हैं तो IMA देश को कब बताएगा कि कैसे पहले कोरोना के इलाज में क्लोरोक्वीन फेल हुई, फिर रेमडेसिविर फेल हुई उसके बाद प्लाज्मा थैरपी को भी कोरोना के इलाज से बाहर कर दिया गया. क्या यह गलत है कि दुनियाभर के तमाम एलोपैथी के डॉक्टर कन्फ्यूजन में ही कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं.

1- क्या जो डॉक्टर मरीज को रेमडेसिविर लिखते हैं वो झोला छाप हैं?
क्या देश के जो ड़ॉक्टर कोरोना मरीजों की जान बचाने के लिए एंटी वायरल ड्रग रेमेडेसिविर लिख रहे हैं वो झोला छाप हैं , उनको पता नहीं है कि ये दवा लोगों की जान ले लेगी? दूसरी बात अगर इस दवा की देश में कमी है तो इस दवा को प्रेस्क्राइब किए जाने की ही क्या जरूरत है? क्या आपके संगठन ने कोई सर्कुलर जारी किया कि जो भी डॉक्टर इसे प्रेसक्राइब करेगा उसे इलाज करने से रोक दिया जाएगा. तीसरी बात है कि अगर दवा फायदा कर रही है और लिखना जरूरी है तो इसके लिए लड़ाई क्यों नहीं लड़ी कि डब्लूएचओ गलत कह रहा है , देश के लिए ये दवाई जरूरी है. अगर देश में इसे लेकर कन्फ्यूजन की स्थित है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार मरने वाले लोग या उसके परिजन या आईएमए खुद?

2-प्लाज्मा थैरपी से जिनकी जान बची उनके बारे में क्या कहेंगे आप
देश भर के डॉक्टर प्लाज्मा थिरेपी में अगर यकीन रखते थे और उसमें सैकड़ों मरीजों की जान बचाकर सफल भी हुए तो कैसे मान लें कि प्लाज्मा थिरेपी से कोई फायदा नहीं था. अगर सरकार ने इस थिरेपी को रोक दिया तो आईएमए क्या कर रहा था? अगर प्लाज्मा थिरेपी सही नहीं थी तो क्या देश भर के कोरोना मरीज चिकित्सा जगत के लिए चूहे का काम कर रहे थे जो शोध के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं.

3-स्टेरॉयड से हुई मौतों का जिम्मेदार कौन?
देश में संक्रमण जब तेजी से फैला तो उसके साथ एक और बीमारी फैली ब्लैक फंगस, जिसके केस लगातार सामने आते जा रहे हैं. डॉक्टरों के पास कोरोना की तरह इसका भी कोई पुख्ता इलाज नहीं है, इसीलिए हर डॉक्टर अपने हिसाब से इसका इलाज कर रहा है. ज्यादातर डॉक्टर इसके इलाज के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं, बिना ये सोचे की इसका साइड इफेक्ट कितना खतरनाक साबित हो सकता है. इसकी वजह से जो लोग कोरोना से नहीं मर रहे हैं वो हार्ट अटैक से मर जा रहे हैं. क्या ये ज़रूरी नहीं है कि IMA जैसे संगठन इस पर भी बात करें और डॉक्टरों को बताएं कि किस दवा का इस्तेमाल कहां करना है और कहां नहीं करना है.

4-देश भर के अस्पतालों में लूट खसोट मची उसके लिए कभी एक्शन उठाया आईएमए ने
कोरोना संकट के दौरान देश भर से ऐसी खबरें आ रही हैं कि बिल न चुकाने के चलते हॉस्पिटल ने डेडबॉडी देने से मना किया, 5 दिन में बना 25 लाख का बिल, वीआईपी मरीज के लिए खाली करा दि ओया हॉस्पिटल का बेड, रेमडेसिविर की कालाबाजारी खुद डॉक्टर ही था शामिल आदि, इस तरह की खबरों से आप लोगों का दिल नहीं दुखा ? और अगर दिल दुखा तो इसके लिए क्या कोई ठोस उपाय किया?

5-देश भर के डॉक्टर एक ही कोरोना पेशेंट के लिए कोई एक गाइडलाइन क्यों नहीं तैयार कर सके
कोरोना के पेशेंट के इलाज के दौरान एक बात और देखने में आई कि थोक के भाव में मरीजों का इलाज ऑनलाइन हो रहा था. इसके बावजूद आप लोगों ने ऐसी कोई गाइडलाइन डिवेलप करने में असफल रहे जो एक तरह के मरीज के लिए अप्लाई किया जा सके. दिल्ली-एनसीआर में एक ही पेशेंट को कई डॉक्टर्स को दिखाने पर कई तरह की सलाह मिलती रही. एक डॉक्टर रेमडेसिविर लेने की सलाह देता दूसरा उससे इनकार कर देता. एक प्लाज्मा थिरेपी के लिए कहता एक नहीं कहता. यहां तक की ऑक्सीजन लेवल पर भी एक तरह की सलाह नहीं मिल पा रही है. क्या इसके लिए मान लिया जाए के सभी डॉक्टर झोलाछाप हैं?

Share this story