logo
  • Fri Dec 31 2021
  • 5:23:59 PM
डॉक्टर रंजना अग्रवाल और पूर्व वाईस चांसलर प्रोफेसर दिनेश अग्रवाल ने किया कैथल की नीलम यूनिवर्सिटी का दौरा
विद्यार्थी ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना चाहते हैं एवं हायर एजुकेशन में नहीं जाना चाहते, उनके लिए तीन साल का डिग्री कोर्स महत्वपूर्ण साबित होगा।

डॉक्टर रंजना अग्रवाल और पूर्व वाईस चांसलर प्रोफेसर दिनेश अग्रवाल ने किया कैथल की नीलम यूनिवर्सिटी का दौरा 

nillam

कैथल (अटल हिन्द/राजकुमार अग्रवाल )

कैथल की नीलम यूनिवर्सिटी में रविवार को निदेशक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, कम्युनिकेशन एंड पॉलिसी रिसर्च, CSIR नई दिल्ली से डॉक्टर रंजना अग्रवाल और पूर्व वाईस चांसलर प्रोफेसर दिनेश अग्रवाल ने दौरा किया जिसमें NEP 2020 की पढ़ाई और रिसर्च के उत्थान के बारे में चर्चा की गई। चर्चा में इस बात पर भी फोकस किया गया कि विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर के युवाओं में किस प्रकार से इस मैथड से स्किल और रोजगार के अवसर मजबूत होंगे। इससे डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। नई शिक्षा नीति से उच्चतर शिक्षा पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को विकल्प भी अधिक मिल पाएंगे। जो विद्यार्थी ग्रेजुएशन के बाद नौकरी करना चाहते हैं एवं हायर एजुकेशन में नहीं जाना चाहते, उनके लिए तीन साल का डिग्री कोर्स महत्वपूर्ण साबित होगा। वहीं, शोध में जाने वाले विद्यार्थियों के लिए चार साल की डिग्री क्वालिटी रिसर्च की दृष्टि से बेहतर साबित होगी। नई शिक्षा नीति में एमफिल को खत्म कर पीएचडी के लिए शोध के साथ चार साल की डिग्री एक रिसर्च स्कॉलर के लिए बढ़िया परिपक्वता प्रदान करेगा।

Share this story